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Jammu News: सिंदूर खेला के रंग में रंगा पुराना शहर बंगाल की तर्ज पर मां दुर्गा की विदाई
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- पुराने हाईकोर्ट परिसर में 1997 से निभाई जा रही परंपरा, नौ दिन बेटी बनकर मायके आती हैं मां दुर्गा
- जैन बाजार, लखदाता कनक मंडी और रेजिडेंसी रोड से निकली शोभायात्रा, तवी में मूर्ति विसर्जन
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। लाल सिंदूर से सजे चेहरे, एक-दूसरे को सिंदूर लगाती महिलाएं और मां दुर्गा के जयकारों से गूंजता पुराना शहर। मुबारक मंडी के पुराने हाईकोर्ट परिसर में बंगाली समुदाय ने पारंपरिक सिंदूर खेला की रस्म निभाकर मां दुर्गा को विदाई दी। महिलाओं ने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन और जयकारों के बीच मां की प्रतिमा के साथ शोभायात्रा निकाली गई।
मुबारक मंडी से शोभायात्रा पंजतीर्थी, जैन बाजार, लखदत्ता बाजार, कनक मंडी, रेजिडेंसी रोड, विवेकानंद चौक, प्रेम नगर से होते हुए महाराजा हरि सिंह पार्क के पास पहुंची। तवी नदी में मां दुर्गा की मूर्ति विसर्जन किया गया। इसके साथ ही नौ दिवसीय दुर्गा पूजा उत्सव का समापन हो गया। मुबारक मंडी के पुराने हाईकोर्ट परिसर में वर्ष 1997 से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है। बंगाली स्वर्णकार संघ के अध्यक्ष नित्यानंद ने बताया कि बंगाली समुदाय में मां दुर्गा को बेटी के रूप में माना जाता है। मान्यता है कि मां नौ दिनों के लिए मायके आतीं हैं। विजयदशमी पर विदाई के साथ अगले वर्ष फिर उनके आगमन की कामना की जाती है।
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- जैन बाजार, लखदाता कनक मंडी और रेजिडेंसी रोड से निकली शोभायात्रा, तवी में मूर्ति विसर्जन
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। लाल सिंदूर से सजे चेहरे, एक-दूसरे को सिंदूर लगाती महिलाएं और मां दुर्गा के जयकारों से गूंजता पुराना शहर। मुबारक मंडी के पुराने हाईकोर्ट परिसर में बंगाली समुदाय ने पारंपरिक सिंदूर खेला की रस्म निभाकर मां दुर्गा को विदाई दी। महिलाओं ने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन और जयकारों के बीच मां की प्रतिमा के साथ शोभायात्रा निकाली गई।
मुबारक मंडी से शोभायात्रा पंजतीर्थी, जैन बाजार, लखदत्ता बाजार, कनक मंडी, रेजिडेंसी रोड, विवेकानंद चौक, प्रेम नगर से होते हुए महाराजा हरि सिंह पार्क के पास पहुंची। तवी नदी में मां दुर्गा की मूर्ति विसर्जन किया गया। इसके साथ ही नौ दिवसीय दुर्गा पूजा उत्सव का समापन हो गया। मुबारक मंडी के पुराने हाईकोर्ट परिसर में वर्ष 1997 से दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है। बंगाली स्वर्णकार संघ के अध्यक्ष नित्यानंद ने बताया कि बंगाली समुदाय में मां दुर्गा को बेटी के रूप में माना जाता है। मान्यता है कि मां नौ दिनों के लिए मायके आतीं हैं। विजयदशमी पर विदाई के साथ अगले वर्ष फिर उनके आगमन की कामना की जाती है।
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