{"_id":"6ad8f480a591ab4ad2004df2","slug":"a-new-beginning-for-justice-at-an-altitude-of-11500-feet-2026-10-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"लेह: 11,500 फीट की ऊंचाई पर न्याय की नई शुरुआत, लेह में हाईकोर्ट की नियमित सुनवाई शुरू; 65 मामले सूचीबद्ध","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
लेह: 11,500 फीट की ऊंचाई पर न्याय की नई शुरुआत, लेह में हाईकोर्ट की नियमित सुनवाई शुरू; 65 मामले सूचीबद्ध
Wed, 21 Oct 2026 10:56 PM IST
Akash Dubey
संवाद न्यूज एजेंसी, लेह
संवाद न्यूज एजेंसी, लेह
Published by: Akash Dubey
Updated Wed, 21 Oct 2026 10:56 PM IST
सार
जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट की पीठ में बुधवार को नियमित सुनवाई शुरू हुई। पहले दिन 65 मामले सूचीबद्ध हुए। इससे वादकारियों को जम्मू-श्रीनगर की लंबी यात्रा से राहत मिलेगी। मुख्य न्यायाधीश डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संजय परिहार ने सुनवाई की।
विज्ञापन
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाईकोर्ट
- फोटो : फाइल फोटो
विस्तार
लद्दाख में न्याय तक पहुंच आसान बनाने की दिशा में बुधवार को एक नया अध्याय जुड़ गया। समुद्र तल से 11,500 फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित लेह में जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट की बेंच में नियमित सुनवाई शुरू हो गई। पहले ही दिन डिवीजन बेंच और एकल पीठ में कुल 65 मामले सूचीबद्ध किए गए। यह शुरुआत उन वादकारियों के लिए बड़ी राहत की उम्मीद लेकर आई है, जिन्हें अब तक अपने मामलों की पैरवी के लिए जम्मू या श्रीनगर तक लंबी यात्रा करनी पड़ती थी।
विज्ञापन
जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डॉ. पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संजय परिहार की डिवीजन बेंच ने पहले दिन पांच मामलों की सुनवाई की। सुनवाई के लिए हाइब्रिड व्यवस्था अपनाई गई। मुख्य न्यायाधीश वर्चुअल माध्यम से जुड़े, जबकि जस्टिस संजय परिहार लेह बेंच में मौजूद रहे। डिवीजन बेंच की सुनवाई के बाद जस्टिस परिहार ने एकल पीठ में बैठकर 60 अन्य मामलों की सुनवाई की।
विज्ञापन
भौगोलिक दूरी नहीं बनेगी न्याय में बाधा
लद्दाख जैसे दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्र में नियमित सुनवाई शुरू होने का सबसे बड़ा महत्व न्यायिक प्रक्रिया को लोगों के करीब लाना है। लेह, कारगिल और अन्य दूरदराज इलाकों के वादकारियों को अपने मामलों की पैरवी के लिए जम्मू या श्रीनगर जाने में समय और संसाधन खर्च करने पड़ते थे। स्थानीय स्तर पर सुनवाई की व्यवस्था से उनकी यह निर्भरता कम होने की उम्मीद है। इससे लद्दाख के अधिवक्ताओं को भी अपने क्षेत्र में ही मामलों की पैरवी करने का अवसर मिलेगा। जस्टिस संजय परिहार ने पहले दिन 65 मामलों को सूचीबद्ध किए जाने को लद्दाख के वादकारियों को न्यायिक प्रक्रिया से जोड़ने और सुनवाई को व्यवस्थित बनाने की शुरुआती कोशिश बताया। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में इसे और भी बेहतर बनाया जाएगा।
विज्ञापन
18 अक्तूबर को हुआ था बेंच का उद्घाटन
जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट की लद्दाख बेंच का औपचारिक उद्घाटन भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने 18 अक्तूबर को लेह के मेलोंगथांग में किया था। अब नियमित सुनवाई शुरू होने से उद्घाटन के बाद न्यायिक कामकाज का अगला चरण शुरू हो गया है।