{"_id":"647105d1f6ffc453410e2338","slug":"religious-function-reasi-news-c-10-1-124944-2023-05-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: संसार में मन जैसा राजा और आंखों के समान मंत्री मिलना मुश्किल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: संसार में मन जैसा राजा और आंखों के समान मंत्री मिलना मुश्किल
Sat, 27 May 2023 12:47 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Sat, 27 May 2023 12:47 AM IST
विज्ञापन
उधमपुर। संत शिरोमणि सुभाष शास्त्री महाराज ने बारटा में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के पांचवें दिन ऊर्दु के शायर शाद अजीमाबादी के शेयर जो चाहिए देखना, न देखा हमने... से प्रवचन शुरू किए।
उन्होंने कहा कि दूसरों को समझने में हम सारा जीवन गंवा देते हैं और हम स्वयं क्या है, इस और कभी ध्यान ही नहीं दिया। शायर भी यही संदेश दे रहा है कि दूसरों को समझना बहुत कठिन है, पर जो आसान है अर्थात् स्वयं को जानना, हमने तो उसे बिल्कुल ही न समझा। समाज में कठिनाइयों का, विवादों का, अशांति का सबसे बड़ा कारण यही है। हर धर्म हमें प्रेरणा देता है कि आपके अंदर विद्यमान आत्मा, जो मन-मंदिर में रहती है, वही ईश्वर है, गुरु है, अल्लाह है। इसलिए जिसने स्वयं को जान लिया, पहचान लिया फिर इस जगत की किसी भी वस्तु, व्यक्ति पदार्थ को जानने की और कुछ पाने की जिज्ञासा नही रहेगी। फिर संसार से, समाज से हिंसा सदा के लिए लुप्त हो जाएगी। उन्होंने बताया कि संत रहीम कहते हैं कि इस संसार में मन जैसा राजा और आंखों के समान मंत्री मिलना मुश्किल है। आंखें जिसको देखकर रीझ जाती हैं, मन भी उसी पर मोहित हो जाता है, उसके हाथों बिक जाता है। उन्होंने समझाया कि आप इस तथ्य पर विचार करें कि सभी इंद्रियां मन के कहने पर ही कार्य करती हैं, स्वयं कुछ नहीं करती और न ही कर सकती हैं।
उन्होंने कहा कि जरुरत इस बात की है कि इंद्रियों को दोष न देकर मन को विवेक से वश में किया जाए। मन को शुद्ध रख कर सदा कल्याणकारी विचारों से युक्त रखा जाए। इंद्रियों से सदा शुभ और उचित कर्म ही कराए, अशुभ- गलत नहीं। यदि आपको इस मार्ग पर चलता है तो सर्वप्रथम स्वयं को जानने की प्रक्रिया, किसी सदगुरु की शरण में आकर शुरू करें।
विज्ञापन
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि दूसरों को समझने में हम सारा जीवन गंवा देते हैं और हम स्वयं क्या है, इस और कभी ध्यान ही नहीं दिया। शायर भी यही संदेश दे रहा है कि दूसरों को समझना बहुत कठिन है, पर जो आसान है अर्थात् स्वयं को जानना, हमने तो उसे बिल्कुल ही न समझा। समाज में कठिनाइयों का, विवादों का, अशांति का सबसे बड़ा कारण यही है। हर धर्म हमें प्रेरणा देता है कि आपके अंदर विद्यमान आत्मा, जो मन-मंदिर में रहती है, वही ईश्वर है, गुरु है, अल्लाह है। इसलिए जिसने स्वयं को जान लिया, पहचान लिया फिर इस जगत की किसी भी वस्तु, व्यक्ति पदार्थ को जानने की और कुछ पाने की जिज्ञासा नही रहेगी। फिर संसार से, समाज से हिंसा सदा के लिए लुप्त हो जाएगी। उन्होंने बताया कि संत रहीम कहते हैं कि इस संसार में मन जैसा राजा और आंखों के समान मंत्री मिलना मुश्किल है। आंखें जिसको देखकर रीझ जाती हैं, मन भी उसी पर मोहित हो जाता है, उसके हाथों बिक जाता है। उन्होंने समझाया कि आप इस तथ्य पर विचार करें कि सभी इंद्रियां मन के कहने पर ही कार्य करती हैं, स्वयं कुछ नहीं करती और न ही कर सकती हैं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि जरुरत इस बात की है कि इंद्रियों को दोष न देकर मन को विवेक से वश में किया जाए। मन को शुद्ध रख कर सदा कल्याणकारी विचारों से युक्त रखा जाए। इंद्रियों से सदा शुभ और उचित कर्म ही कराए, अशुभ- गलत नहीं। यदि आपको इस मार्ग पर चलता है तो सर्वप्रथम स्वयं को जानने की प्रक्रिया, किसी सदगुरु की शरण में आकर शुरू करें।
विज्ञापन