राहत सेतु को वापिस लाने में जुटी सेना
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पिछले साल आई बाढ़ सतवारी के बरजाला स्थित निक्की तवी पर बने पुल को बहा ले गया था। इसके बाद हजारों गांव का संपर्क टूट गया। लोगों को राहत देने के लिए सेना की तरफ से यहां ट्यूबों की मदद से अस्थायी पुल का निर्माण किया गया था।
लेकिन बीते दिनों बारिश की वजह से तवी उफान पर आई और इस अस्थायी पुल को बहा ले गई। मंगलवार को सेना ने पुल को आठ किलोमीटर दूर जाकर डूंढा। इसे सेना के जवान वापिस लाने में जुट गए हैं। वहीं इस पुल के बह जाने के कारण फिर से इस पुल के साथ जुड़े लोगों का संपर्क टूट गया।
इस पुल से लोग दस मिनट में जम्मू के साथ जुड़ जाते हैं। अब लोगों को दूसरे रास्ते से जम्मू आना पड़ रहा है, यहां एक से दो घंटे लग रहे हैं। मंगलवार को प्रशासन ने भी पुल का जायजा लिया और इसके लिए जरूरी कदम उठाने पर विचार विमर्श किया।
हजारों लोगों का था सहारा, बार्डर तक था दारोमदार
सितंबर में बाढ़ आने के बाद बरजाला का पुल टूट गया था। लोगों को राहत देते हुए सेना की ओर से पुल के पास ट्यूबों से अस्थायी पुल (राहत सेतु) बनाया गया। तब से इस पुल का इस्तेमाल किया जा रहा था। सोमवार को बारिश से तवी में बाढ़ आने पर पुल बह गया।
पुल की तलाश में सेना ने जांच अभियान चलाया तो पुल आठ किलोमीटर दूर ललयाल गांव के पास मिला। इसके बाद सेना की 15 इंजीनियर के जवान अपने तकनीकी ढांचे के साथ मौके पर पहुंचे और पुल को वापिस लाने का काम शुरू किया। पुल बहकर दूसरे किनारे थोड़ी ऊंचाई पर रुक गया था।
जवान किश्तियों के माध्यम से पुल तक पहुंचे। जवानों ने थोड़ा थोड़ा सामान किश्तियों पर लाद कर लाने का काम शुरू किया गया है। लेकिन पुल को वापिस लाने के लिए अभी वक्त लगेगा। कुछ जवानों से बात करने पर जानकारी मिली कि अभी एक दो दिन सामान लाने में लगेगा। इसके बाद फिर से पुल तैयार किया जाएगा।
राहत सेतु पुल सेना के लिए भी काफी जरूरी था और इससे काफी लाभ था। मकवाल का कुछ क्षेत्र एलओसी और बार्डर से जुड़ता है। यहां पर सेना की काफी बटालियनें तैनात हैं। पुल बह जाने के बाद सेना का अस्थायी पुल ही आने जाने के लिए इस्तेमाल हो रहा था।
लेकिन अब पुल बह जाने से सेना को भी दिक्कतें पेश आ रही हैं। सेना फिर से इस पुल को जल्द बनाने पर बल दे रही है। एसडीएम शाहिद महमूद का कहना है कि सेना के लिए भी पुल काफी अहम है। जल्द ही फिर से यह अस्थायी पुल बनेगा।