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Jammu News: रियासी में शिव महापुराण की कथा जारी
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रियासी।शिव महा पुराण कथा में आई महिलाएं ब कथा करते सूरज कौशल जी।फोटो,संवाद।
संवाद न्यूज एजेंसी।
रियासी। श्री सनातन धर्म सभा के हाल में बुधवार को शिव महापुराण की कथा जारी रही। कथा वाचक सूरज कौशल शास्त्री ने कहा कि मैं यानि कि अपने आप को बड़प्पन दिखाने के प्रयास से भगवान भी नहीं बचे। आज के समय में भी मनुष्य मैं और बड़प्पन के चक्कर में आपस में द्वेष की भावना रखने लगा है।
भगवान विष्णु व ब्रह्मा के बीच आपस में हुई तनातनी का नुकसान उन्हें श्राप लेकर चुकाना पड़ा था। भगवान विष्णु व ब्रह्मा में स्वामित्व को लेकर अभिमान हो गया। दोनों के बीच भयंकर युद्ध होने लगा। दोनों के युद्ध से देवता व्याकुल होने लगे और भगवान शिव के पास पहुंचे। देवताओं के दुख को देखते हुए शिव दोनों के युद्ध के बीच एक चमकते हुए स्तंभ बन कर प्रकट हुए।
स्तंभ को देख विष्णु व ब्रह्मा इस की असलियत जानने का प्रयास में जुट गए। भगवान विष्णु शूकर रूप धारण कर पाताल में चले गए तो ब्रह्म हंस बन कर आकाश में गए। ब्रह्मा ने झूठे स्वांग रचा अपने साथ केतकी का फूल ले आए। ब्रह्मा के असत्य बोलने पर भगवान शिव ने क्रोध में आ कर भैरव को ब्रह्मा का सिर काटने को कहा जिस के बाद पांच सिर वाले ब्रह्मा चार सिर वाले रह गए और अपनी गलती की माफी मांगी।
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भगवान शिव ने केतकी के फूल को भी श्राप दिया कि वह दिखने में तो सुंदर रहेगा लेकिन पूजा में उस का इस्तेमाल नहीं हो सकेगा। कथा का समापन आरती कर प्रसाद बांट कर किया गया।
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रियासी। श्री सनातन धर्म सभा के हाल में बुधवार को शिव महापुराण की कथा जारी रही। कथा वाचक सूरज कौशल शास्त्री ने कहा कि मैं यानि कि अपने आप को बड़प्पन दिखाने के प्रयास से भगवान भी नहीं बचे। आज के समय में भी मनुष्य मैं और बड़प्पन के चक्कर में आपस में द्वेष की भावना रखने लगा है।
भगवान विष्णु व ब्रह्मा के बीच आपस में हुई तनातनी का नुकसान उन्हें श्राप लेकर चुकाना पड़ा था। भगवान विष्णु व ब्रह्मा में स्वामित्व को लेकर अभिमान हो गया। दोनों के बीच भयंकर युद्ध होने लगा। दोनों के युद्ध से देवता व्याकुल होने लगे और भगवान शिव के पास पहुंचे। देवताओं के दुख को देखते हुए शिव दोनों के युद्ध के बीच एक चमकते हुए स्तंभ बन कर प्रकट हुए।
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स्तंभ को देख विष्णु व ब्रह्मा इस की असलियत जानने का प्रयास में जुट गए। भगवान विष्णु शूकर रूप धारण कर पाताल में चले गए तो ब्रह्म हंस बन कर आकाश में गए। ब्रह्मा ने झूठे स्वांग रचा अपने साथ केतकी का फूल ले आए। ब्रह्मा के असत्य बोलने पर भगवान शिव ने क्रोध में आ कर भैरव को ब्रह्मा का सिर काटने को कहा जिस के बाद पांच सिर वाले ब्रह्मा चार सिर वाले रह गए और अपनी गलती की माफी मांगी।
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भगवान शिव ने केतकी के फूल को भी श्राप दिया कि वह दिखने में तो सुंदर रहेगा लेकिन पूजा में उस का इस्तेमाल नहीं हो सकेगा। कथा का समापन आरती कर प्रसाद बांट कर किया गया।