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रुद्राक्ष भगवान शंकर का प्रिय, धारण करने से दूर होते हैं कष्ट : सूरज शास्त्री
Mon, 29 Jul 2024 02:56 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Mon, 29 Jul 2024 02:56 AM IST
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श्री सनातन धर्म सभा में महा शिव पुराण कथा आठवें दिन भी जारी रही
संवाद न्यूज एजेंसी
रियासी। जहां के श्री सनातन धर्म सभा में जारी श्री शिव महा पुराण कथा के आठवें दिन सूरज कौशल शास्त्री जी ने बताया कि
रुद्राक्ष भगवान शंकर के प्रिय हैं। इनको गले में धारण करने और ओम नम शिवाय का जाप करने से सभी कष्ट दूर होते हैं। पापों से मुक्ति मिलती है। यह ज्ञान सूरज कौशल शास्त्री ने रविवार को श्री सनातन धर्म सभा में जारी महा शिव पुराण कथा के आठवें दिन संगत को दिया है।
उन्होंने बताया कि एक बार शिव ने पार्वती को बताया कि पूर्व काल में हजारों सालों तक तपस्या की थी। मेरे मन में कुछ भय था। तभी नेत्र खोल दिए और उसके बाद मेरे आंसू गिरने लगे। उनकी बूंदों से गौड़ प्रदेश से लेकर के मथुरा, काशी, अयोध्या आदि में रुद्राक्ष के पेड़ उग गए। तभी से रुद्राक्ष की महिमा है।
सभी वर्णों के व्यक्ति रुद्राक्ष की माला धारण कर सकते हैं। तीन मुख वाला रुद्राक्ष धारण करने से साधन सिद्ध होते है और विद्या में निपुणता आती है। चार मुख वाला रुद्राक्ष ब्रह्मा स्वरूप होता है। कालाग्नि नामक पांच मुख वाला रुद्राक्ष रूद्र रूप है जिसे धारण करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है और मोक्ष मिलता है। कथा के समापन पर संगत में प्रसाद वितरित किया गया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
रियासी। जहां के श्री सनातन धर्म सभा में जारी श्री शिव महा पुराण कथा के आठवें दिन सूरज कौशल शास्त्री जी ने बताया कि
रुद्राक्ष भगवान शंकर के प्रिय हैं। इनको गले में धारण करने और ओम नम शिवाय का जाप करने से सभी कष्ट दूर होते हैं। पापों से मुक्ति मिलती है। यह ज्ञान सूरज कौशल शास्त्री ने रविवार को श्री सनातन धर्म सभा में जारी महा शिव पुराण कथा के आठवें दिन संगत को दिया है।
उन्होंने बताया कि एक बार शिव ने पार्वती को बताया कि पूर्व काल में हजारों सालों तक तपस्या की थी। मेरे मन में कुछ भय था। तभी नेत्र खोल दिए और उसके बाद मेरे आंसू गिरने लगे। उनकी बूंदों से गौड़ प्रदेश से लेकर के मथुरा, काशी, अयोध्या आदि में रुद्राक्ष के पेड़ उग गए। तभी से रुद्राक्ष की महिमा है।
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सभी वर्णों के व्यक्ति रुद्राक्ष की माला धारण कर सकते हैं। तीन मुख वाला रुद्राक्ष धारण करने से साधन सिद्ध होते है और विद्या में निपुणता आती है। चार मुख वाला रुद्राक्ष ब्रह्मा स्वरूप होता है। कालाग्नि नामक पांच मुख वाला रुद्राक्ष रूद्र रूप है जिसे धारण करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है और मोक्ष मिलता है। कथा के समापन पर संगत में प्रसाद वितरित किया गया।
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