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Jammu News: दुनिया से जाकर भी दो महिलाओं को रोशनी दे गए रवींद्र जैन
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जीएमसी जम्मू में एक मरीज में कार्निया प्रत्यारोपित करती चिकित्सा टीम।
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-जैन समुदाय की ओर से एक साल में 11 मृत दाताओं के 22 नेत्र दान
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। तालाब तिल्लो निवासी 75 वर्षीय रवींद्र जैन शुक्रवार को दुनिया से अलविदा होकर भी दो जरूरतमंद महिलाओं को दुनिया देखने के लिए रोशनी दे गए। रवींद्र के दो कार्निया (नेत्र) का दोनों महिला मरीजों में प्रत्यारोपण किया गया। पिछले एक साल में जैन समुदाय की ओर से 11 मृत दाताओं की ओर से 22 नेत्र दान किए जा चुके हैं।
अस्वस्थ होने के कारण शुक्रवार की सुबह रवींद्र जैन का घर पर निधन हो गया। परिवार के सदस्यों ने सोटो (स्टेट आर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन) जेएंडके से संपर्क करके दिवंगत के दोनों नेत्र दान करने की इच्छा जताई। जिसके बाद जीएमसी के नेत्र विज्ञान विभाग की ओर से एक चिकित्सा टीम ने घर पर पहुंचकर रवींद्र के नेत्र लिए और उन्हें जीएमसी में एक 61 वर्षीय और एक 55 वर्षीय महिला में प्रत्यारोपित किया गया। बताया जाता है कि जीएमसी में ऐसे 50 मरीजों को नेत्र की जरूरत है। यानी 25 मृत दाताओं के 50 कार्निया से सभी को नई दुनिया देखने का मौका मिल सकता है।
जीएमसी जम्मू के प्रिंसिपल डा. आशुतोष गुप्ता ने लोगों से अपील की कि उनके अपने किन्हीं कारणों से दुनिया से चले जाते हैं, तो उनके महत्वपूर्ण अंग दान करके जरूरतमंद लोगों को नया जीवन दिया जा सकता है। डॉ. अशोक शर्मा, प्रोफेसर और नेत्र विज्ञान प्रमुख ने कार्निया प्रत्यारोपण प्रक्रिया में सर्जिकल टीम का नेतृत्व किया। प्रत्यारोपण सर्जरी में डॉ. निहारिका वर्मा और डॉ. तपन शर्मा, दोनों स्नातकोत्तर के समर्पित प्रयासों के साथ नेत्र ओटी स्टाफ सदस्यों में कमलेश कुमारी (आई/सी ओटी), कमलेश कुमारी, अजय शर्मा और संदीप सिंह ने सहयोग दिया।
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इसके अलावा डॉ. हंसराज शर्मा (प्रोफेसर और प्रबंध निदेशक आईबैंक) और डॉ. विजयता गुप्ता (प्रत्यारोपण समन्वयक) की देखरेख में डॉ. नैन्सी शर्मा, डॉ. नलिनी बीरपुरी, डॉ. मनप्रीत कौर, रिफत (एसएसएन) और आकर्षण (एमटीएस) के संयुक्त प्रयासों से मृतक दाता की आंख की समय पर पुनर्प्राप्ति, परिवहन, भंडारण और प्रत्यारोपण पूरा किया गया।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। तालाब तिल्लो निवासी 75 वर्षीय रवींद्र जैन शुक्रवार को दुनिया से अलविदा होकर भी दो जरूरतमंद महिलाओं को दुनिया देखने के लिए रोशनी दे गए। रवींद्र के दो कार्निया (नेत्र) का दोनों महिला मरीजों में प्रत्यारोपण किया गया। पिछले एक साल में जैन समुदाय की ओर से 11 मृत दाताओं की ओर से 22 नेत्र दान किए जा चुके हैं।
अस्वस्थ होने के कारण शुक्रवार की सुबह रवींद्र जैन का घर पर निधन हो गया। परिवार के सदस्यों ने सोटो (स्टेट आर्गन एंड टिशू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन) जेएंडके से संपर्क करके दिवंगत के दोनों नेत्र दान करने की इच्छा जताई। जिसके बाद जीएमसी के नेत्र विज्ञान विभाग की ओर से एक चिकित्सा टीम ने घर पर पहुंचकर रवींद्र के नेत्र लिए और उन्हें जीएमसी में एक 61 वर्षीय और एक 55 वर्षीय महिला में प्रत्यारोपित किया गया। बताया जाता है कि जीएमसी में ऐसे 50 मरीजों को नेत्र की जरूरत है। यानी 25 मृत दाताओं के 50 कार्निया से सभी को नई दुनिया देखने का मौका मिल सकता है।
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जीएमसी जम्मू के प्रिंसिपल डा. आशुतोष गुप्ता ने लोगों से अपील की कि उनके अपने किन्हीं कारणों से दुनिया से चले जाते हैं, तो उनके महत्वपूर्ण अंग दान करके जरूरतमंद लोगों को नया जीवन दिया जा सकता है। डॉ. अशोक शर्मा, प्रोफेसर और नेत्र विज्ञान प्रमुख ने कार्निया प्रत्यारोपण प्रक्रिया में सर्जिकल टीम का नेतृत्व किया। प्रत्यारोपण सर्जरी में डॉ. निहारिका वर्मा और डॉ. तपन शर्मा, दोनों स्नातकोत्तर के समर्पित प्रयासों के साथ नेत्र ओटी स्टाफ सदस्यों में कमलेश कुमारी (आई/सी ओटी), कमलेश कुमारी, अजय शर्मा और संदीप सिंह ने सहयोग दिया।
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इसके अलावा डॉ. हंसराज शर्मा (प्रोफेसर और प्रबंध निदेशक आईबैंक) और डॉ. विजयता गुप्ता (प्रत्यारोपण समन्वयक) की देखरेख में डॉ. नैन्सी शर्मा, डॉ. नलिनी बीरपुरी, डॉ. मनप्रीत कौर, रिफत (एसएसएन) और आकर्षण (एमटीएस) के संयुक्त प्रयासों से मृतक दाता की आंख की समय पर पुनर्प्राप्ति, परिवहन, भंडारण और प्रत्यारोपण पूरा किया गया।