तीन राज्यों में उलझा रंजीत सागर वेटलैंड
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तीन राज्यों के बीच विवाद और संवादहीनता के चलते पिछले एक दशक से अटकी रंजीत सागर वेटलैंड योजना दूर की कौड़ी बन गई है। वेटलैंड विकास प्रस्ताव के एक दशक बाद अब रियासत अपने अधिकार क्षेत्र वाले इलाकों में जैव विविधता संरक्षण की कवायद शुरू करने जा रहा है।
एक मुकम्मल योजना का खाका तैयार किया जा रहा है, जिसमें खासतौर पर जलीय जीवन से जुड़े जीव जंतुओं की गणना और सुरक्षा पर जोर रहेगा। वन्यजीव विभाग के उच्च पदस्थ सूत्रों ने बताया कि सात बिंदुओं पर ध्यान देते हुए मसौदा लगभग तैयार कर लिया गया है।
इसे अब मंजूरी के लिए सरकार को भेजा जाएगा। दरअसल जनवरी 2006 में रंजीत सागर बांध की झील को नेशनल वेटलैंड कंजरवेशन प्रोग्राम के तहत लाने की कवायद शुरू की गई थी।
वेटलैंड योजना तीन राज्यों के बीच विचाराधीन है
केंद्र से आई उच्च स्तरीय टीम ने जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और पंजाब सरकार के आला अफसरों के साथ बांध स्थल पर बैठक की, जिसमें 7 हजार एकड़ क्षेत्र विस्तार की झील को वेटलैंड के तौर पर विकसित करने की जानकारी दी गई।
केंद्र से इस बाबत 500 करोड़ रुपये दिए जाने थे, लेकिन जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और पंजाब सरकार की ओर से वेटलैंड के संबंध में न तो गंभीरता दिखाई गई और न ही सहमति स्थापित कर प्रस्ताव को मूर्त देने के लिए कोई काम हो पाया।
पूरे एक दशक बाद अब झील विस्तार के सबसे बड़े हिस्सेदार जम्मू कश्मीर ने अपने इलाके के संरक्षण की कवायद तेज की है। नई योजना संबंधी पूछे जाने पर रीजनल वाइल्ड लाइफ वार्डन अश्वनी कुमार गुप्ता ने कहा रंजीत सागर बांध क्षेत्र में जम्मू कश्मीर के पास अठारह वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र है।
वेटलैंड योजना चूंकि तीन राज्यों के बीच विचाराधीन है, ऐसे में जम्मू कश्मीर के अधीन इलाके में जीवों की गणना, पौधरोपण, मिट्टी संरक्षण, हैबिटेट इंप्रूवमेंट, तारबंदी सहित अन्य बिंदुओं पर काम किया जाएगा। प्रस्ताव लगभग तैयार है, जिसे मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।