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Jammu News: सुग्रीव को फूलों की माला पहना कर बाली को मार दिया तीर, जय सिया राम से गूंजा पंडाल
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संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। नवरात्र के उपलक्ष्य में अलग-अलग मंदिरों में रामलीला जारी है। दीवान मंदिर में 5वें नवरात्र पर हनुमान-राम मिलन, राम-सुग्रीव मिलन, बाली-सुग्रीव युद्ध और बाली वध का प्रसंग दर्शाया गया। बाली वध के बाद भक्तों ने रामलला के जयघोष लगाए और कहा कि सत्य की हमेशा विजय होती है।
पहला दृश्य हनुमान-राम मिलन से आरंभ होता है। सीता हरण के बाद राम जी मां सीता को ढूंढने वन में भटकते हैं। इसी बीच हनुमान से मिलते हैं। हनुमान जी प्रभु राम को मायावी समझते हैं। उन्हें लगता है कि सुग्रीव जी का वध करने वे आए हैं, इसलिए सच्चाई जानने के लिए हनुमान जी ब्राह्मण का रूप धारण कर लेते हैं। जब पता चलता है कि भगवान राम और लक्ष्मण हैं तो कंधे पर बैठा कर राजा सुग्रीव के पास ले जाते हैं। राम जी की मुलाकात सुग्रीव से होती है जिन्हें उनके भाई बाली ने घर से निकाल दिया था और बाली जान से मारना भी चाहता है। इसी बीच सुग्रीव के पास सीता मां के कुछ आभूषण मिलते हैं जिससे प्रभु की थोड़ी चिंता दूर हो जाती है। इसके बाद राम जी सुग्रीव की मदद करने के लिए कहते हैं कि वह बाली को युद्ध के लिए ललकारे। युद्ध काफी देर तक चलता है जिसमें सुग्रीव हार रहे होते हैं। सुग्रीव मदद के लिए फिर भगवान राम के पास जाते हैं। राम जी कहते हैं कि आप दोनों बिल्कुल एक जैसे हो। किसे तीर मारु समझ नहीं पाया, इसलिए सुग्रीव को प्रभु फूलों की माला पहनाते हैं और फिर बाली को युद्ध के लिए ललकारने हैं। इस बार बाली को पहचानते हुए राम जी तीर मार देते हैं और यहीं से पर्दा नीचे आ जाता है। राम विनय शर्मा, लक्ष्मण साहिल गुप्ता, बाली राजेश कुमार और सुग्रीव का शिव कुमार ने निभाया।
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जम्मू। नवरात्र के उपलक्ष्य में अलग-अलग मंदिरों में रामलीला जारी है। दीवान मंदिर में 5वें नवरात्र पर हनुमान-राम मिलन, राम-सुग्रीव मिलन, बाली-सुग्रीव युद्ध और बाली वध का प्रसंग दर्शाया गया। बाली वध के बाद भक्तों ने रामलला के जयघोष लगाए और कहा कि सत्य की हमेशा विजय होती है।
पहला दृश्य हनुमान-राम मिलन से आरंभ होता है। सीता हरण के बाद राम जी मां सीता को ढूंढने वन में भटकते हैं। इसी बीच हनुमान से मिलते हैं। हनुमान जी प्रभु राम को मायावी समझते हैं। उन्हें लगता है कि सुग्रीव जी का वध करने वे आए हैं, इसलिए सच्चाई जानने के लिए हनुमान जी ब्राह्मण का रूप धारण कर लेते हैं। जब पता चलता है कि भगवान राम और लक्ष्मण हैं तो कंधे पर बैठा कर राजा सुग्रीव के पास ले जाते हैं। राम जी की मुलाकात सुग्रीव से होती है जिन्हें उनके भाई बाली ने घर से निकाल दिया था और बाली जान से मारना भी चाहता है। इसी बीच सुग्रीव के पास सीता मां के कुछ आभूषण मिलते हैं जिससे प्रभु की थोड़ी चिंता दूर हो जाती है। इसके बाद राम जी सुग्रीव की मदद करने के लिए कहते हैं कि वह बाली को युद्ध के लिए ललकारे। युद्ध काफी देर तक चलता है जिसमें सुग्रीव हार रहे होते हैं। सुग्रीव मदद के लिए फिर भगवान राम के पास जाते हैं। राम जी कहते हैं कि आप दोनों बिल्कुल एक जैसे हो। किसे तीर मारु समझ नहीं पाया, इसलिए सुग्रीव को प्रभु फूलों की माला पहनाते हैं और फिर बाली को युद्ध के लिए ललकारने हैं। इस बार बाली को पहचानते हुए राम जी तीर मार देते हैं और यहीं से पर्दा नीचे आ जाता है। राम विनय शर्मा, लक्ष्मण साहिल गुप्ता, बाली राजेश कुमार और सुग्रीव का शिव कुमार ने निभाया।
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