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रेलवे प्रबंधक को नहीं पता कब ठीक होगी बाटल क्रशर मशीन
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जम्मू। शहर के रेलवे स्टेशन पर लाखों रुपये खर्च कर लगाई बाटल क्रशर मशीन कब ठीक होगी, यह रेलवे प्रबंधक को भी पता नहीं है। सितंबर 2018 में बाटल क्रशर मशीन को स्टेशन पर लगाया गया था। मशीन लगाने के करीब तीन महीने बाद खराब हो गई। तकनीकी खामी को दूर करने के लिए मशीन को चंडीगढ़ भेजा गया था, लेकिन पांच महीने से भी अधिक समय बीत जाने के बाद मशीन ठीक नहीं हो पाई है। स्टेशन पर मशीन को लगाने का उद्देश्य प्लास्टिक की बोतलों का निस्तारण करना था।
स्टेशन पर बाटल क्रशर मशीन नहीं होने से कूडे़दान और परिसर में प्लास्टिक की खाली बोतलें मिलती है। रेलवे प्रबंधक की सुस्त कार्यप्रणाली के चलते मशीन लंबे समय से ठीक नहीं हो पाई है। बाटल क्रशर मशीन पानी और कोल ड्रिंक की बाटल को पूरी तरह नष्ट करती है और उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में कर देती है, जिससे प्लास्टिक की बाटल पूरी तरह नष्ट हो जाती है। रेलवे स्टेशन पर निकाले वाले कचारे में प्लास्टिक के कचरे का बड़ा हिस्सा होता है, जो आसानी से नष्ट नहीं हो पाता है। प्लास्टिक के कचरें कोे कुछ हद तक कम करने के लिए मशीन को लगाया गया था, लेकिन रेलवे के सुस्त रवैए के चलते है मशीन लंबे समय से ठीक नहीं हो पाई है।
इस संबंध में जानकारी नहीं थी। मशीन को लेकर संबंधित अधिकारियों से पूछा जाएगा। इसके बाद उसकी स्थिति का पता चल पाएगा।
- चेतन तनेजा, डीटीएम, जम्मू रेलवे स्टेशन
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स्टेशन पर बाटल क्रशर मशीन नहीं होने से कूडे़दान और परिसर में प्लास्टिक की खाली बोतलें मिलती है। रेलवे प्रबंधक की सुस्त कार्यप्रणाली के चलते मशीन लंबे समय से ठीक नहीं हो पाई है। बाटल क्रशर मशीन पानी और कोल ड्रिंक की बाटल को पूरी तरह नष्ट करती है और उसे छोटे-छोटे टुकड़ों में कर देती है, जिससे प्लास्टिक की बाटल पूरी तरह नष्ट हो जाती है। रेलवे स्टेशन पर निकाले वाले कचारे में प्लास्टिक के कचरे का बड़ा हिस्सा होता है, जो आसानी से नष्ट नहीं हो पाता है। प्लास्टिक के कचरें कोे कुछ हद तक कम करने के लिए मशीन को लगाया गया था, लेकिन रेलवे के सुस्त रवैए के चलते है मशीन लंबे समय से ठीक नहीं हो पाई है।
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इस संबंध में जानकारी नहीं थी। मशीन को लेकर संबंधित अधिकारियों से पूछा जाएगा। इसके बाद उसकी स्थिति का पता चल पाएगा।
- चेतन तनेजा, डीटीएम, जम्मू रेलवे स्टेशन