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Jammu News: 35 साल बाद फिर निकली हरिश्वर महादेव यात्रा, गूंजा हर हर महादेव
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- रक्षाबंधन पर 250 श्रद्धालुओं ने दुर्गम पहाड़ी रास्ते से पहुंचकर किए दर्शन, प्राचीन तीर्थ को मिली पहचान
संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू/श्रीनगर। रक्षाबंधन और श्रावण पूर्णिमा पर करीब 35 वर्षों से बंद पड़ी प्राचीन हरिश्वर महादेव यात्रा एक बार फिर शुरू हुई। खोनमोह से करीब 14 किलोमीटर दूर पहाड़ी पर स्थित हरिशोर गुफा तक जम्मू-कश्मीर और देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे 200 से 250 श्रद्धालुओं ने करीब आठ से नौ किलोमीटर की कठिन चढ़ाई कर भगवान शिव के दर्शन किए।
कश्मीरी हिंदू और पंडित समाज में इस प्राकृतिक शिव गुफा का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व माना जाता है। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर परिवार और समाज की सुख-शांति की कामना की। दुर्गम रास्ते के बावजूद श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला। यात्रा के पुनरुद्धार में रमेश राजदान की अहम भूमिका रही। उन्होंने 10 से 12 श्रमिकों की टीम के साथ करीब 12 दिन तक मार्ग की सफाई, संकेतक लगाने और रास्ते को सुरक्षित बनाने का काम कराया। हरिश्वर महादेव यात्रा वेलफेयर सोसायटी की ओर से श्रद्धालुओं के लिए लंगर की व्यवस्था भी की गई। आयोजकों ने बताया कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार के समक्ष स्थायी और सुरक्षित ट्रैक बनाने का प्रस्ताव रखा जाएगा ताकि यह प्राचीन यात्रा नियमित रूप से आयोजित हो सके।
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संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू/श्रीनगर। रक्षाबंधन और श्रावण पूर्णिमा पर करीब 35 वर्षों से बंद पड़ी प्राचीन हरिश्वर महादेव यात्रा एक बार फिर शुरू हुई। खोनमोह से करीब 14 किलोमीटर दूर पहाड़ी पर स्थित हरिशोर गुफा तक जम्मू-कश्मीर और देश के विभिन्न हिस्सों से पहुंचे 200 से 250 श्रद्धालुओं ने करीब आठ से नौ किलोमीटर की कठिन चढ़ाई कर भगवान शिव के दर्शन किए।
कश्मीरी हिंदू और पंडित समाज में इस प्राकृतिक शिव गुफा का विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व माना जाता है। यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर परिवार और समाज की सुख-शांति की कामना की। दुर्गम रास्ते के बावजूद श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला। यात्रा के पुनरुद्धार में रमेश राजदान की अहम भूमिका रही। उन्होंने 10 से 12 श्रमिकों की टीम के साथ करीब 12 दिन तक मार्ग की सफाई, संकेतक लगाने और रास्ते को सुरक्षित बनाने का काम कराया। हरिश्वर महादेव यात्रा वेलफेयर सोसायटी की ओर से श्रद्धालुओं के लिए लंगर की व्यवस्था भी की गई। आयोजकों ने बताया कि श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार के समक्ष स्थायी और सुरक्षित ट्रैक बनाने का प्रस्ताव रखा जाएगा ताकि यह प्राचीन यात्रा नियमित रूप से आयोजित हो सके।
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