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बिश्नाह में फल व सब्जी 20 साल बाद भी विकसित नहीं
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विशनह मंडी परिसर में बना फड
- फोटो : RSPURA
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बिश्नाह। कस्बे के बाईपास मार्ग पर हॉर्टिकल्चर प्लानिंग एंड मार्केटिंग विभाग की तरफ से 20 साल से फल व सब्जी मंडी का निर्माण कार्य चल रहा है। यह मंडी अभी तक विकसित नहीं हो पाई है। नतीजतन किसानों को अपनी उपज का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है।
मंडी के लिए वर्ष 1997 से विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई। इसके निर्माण के लिए 2005 को विभाग द्वारा इसके लिए जमीन की निशानदेही की गई। इसके मालिकों को मालिकाना हक दिया गया और राजस्व विभाग की मंजूरी के बाद 20 कनाल 6 मरले जमीन हॉर्टिकल्चर विभाग को दे दी गई। विभाग द्वारा 2008 को इस जमीन की फेंसिंग की गई और 2010 में इस पर ऑक्शन प्लेटफार्म फड़ का निर्माण कराया गया। 2014 को 55 दुकानें विभाग द्वारा अलाट की गईं। यह पहले फेज की अलॉटमेंट विभाग द्वारा की गई। दूसरे फेज में 10 दुकानें अलाट की गईं। कुछ किसानों को दुकानें हॉर्टिकल्चर विभाग द्वारा अलाट न करने पर उन्होंने अदालत का रुख किया और उनको अदालत के आदेश के बाद दुकानें अलाट हो गईं। जिनकी संख्या-21 के करीब थी। वर्ष 2021 को यह मामला निपटा, जिसके बाद अगस्त 2021 को जिन लोगों की भी दुकानें अलाट हुई थीं उन्हें विभाग की तरफ से दुकानें बनाए जाने के लिए जगह आवंटित की गई। विभाग की तरफ से जो दुकानदारों को जगह आवंटित की गई, उस पर दुकानदार द्वारा व्यक्तिगत रूप से ही दुकानों का निर्माण कराना था। मौजूदा समय में 86 दुकानें अलाट हुई हैं। मौजूदा समय पर इस मंडी में 55 दुकानों का निर्माण कार्य चल रहा है।
कुछ लोगों ने डबल स्टोरी दुकानें बनवाई हैं। वहीं 27 जुलाई 2020 को उस समय के गवर्नर गिरीश चंद्र मुर्मू द्वारा मंडी का शुभारंभ कर दिया गया। हॉर्टिकल्चर एंड प्लानिंग मार्केटिंग विभाग का यहां कार्यालय भी है। जहां पर मौजूदा समय में छोटी मंडी चल रही है। विभाग की तरफ से मंडी परिसर में बाथरूम और अपने कार्यालय के साथ मंडी की लोहे की ग्रिल के साथ चारों तरफ से फेंसिंग की गई है। जो दुकानों के निर्माण होने के बाद बेकार हो गई है। अभी तक इस फ्रूट एंड वेजिटेबल मार्केट में आने के लिए हॉर्टिकल्चर विभाग द्वारा न तो मुख्य गेट लगाया गया है, न ही गेट के आगे किसी पुल का निर्माण हो पाया है।
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खुद को लुटा महसूस कर रहे
जिन लोगों की दुकानों का निर्माण चल रहा है उनमें से बलबीर गुप्ता, राजेश्वर शर्मा, सरदार कमलजीत सिंह, सरदार इंद्रजीत सिंह, सतपाल सिंह चाढ़क, अंचल सिंह चाढ़क, रंजीत सिंह, रामपाल शर्मा, मोहन सिंह, मुल्क राज भगत, बाबा राम मोटन, देशराज शर्मा, रूपलाल, रघुनंदन खजूरिया, देवीदास का कहना है कि सरकार द्वारा जो प्रोजेक्ट बनाया गया प्रशासन उस पर काम कर रहा है। परंतु अभी तक इस मंडी को विकसित नहीं कर पाए। मंडी में आने के लिए न तो गेट न ही पुल का निर्माण हो पाया है। किसान इस जगह अपने वाहन से आ नहीं पाता। अगर कोई बाहर से फल सब्जी या अन्य चीज लाना चाहे तो ला नहीं सकता। जिन लोगों ने दुकानों का निर्माण कराया वह अपने आपको लुटा हुआ महसूस कर रहे हैं। क्योंकि विभाग की तरफ से मंडी विकसित करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया।
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चौकीदार की भी व्यवस्था नहीं
विभाग की तरफ से मंडी में चौकीदार की व्यवस्था थी वह भी नहीं मिल पाया, जिस बाथरूम का मंडी परिसर में निर्माण कार्य करवाया गया, उसमें पानी की व्यवस्था नहीं है। बाथरूम पर ताले लटके हैं। किसान जिन्हें दुकानें तो अलाट हुईं और लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद उन्होंने अपनी दुकानों पर निर्माण शुरू करा दिया, परंतु विभाग खुद ही विकसित नहीं होने देना चाहता।
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मंडी के लिए वर्ष 1997 से विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई। इसके निर्माण के लिए 2005 को विभाग द्वारा इसके लिए जमीन की निशानदेही की गई। इसके मालिकों को मालिकाना हक दिया गया और राजस्व विभाग की मंजूरी के बाद 20 कनाल 6 मरले जमीन हॉर्टिकल्चर विभाग को दे दी गई। विभाग द्वारा 2008 को इस जमीन की फेंसिंग की गई और 2010 में इस पर ऑक्शन प्लेटफार्म फड़ का निर्माण कराया गया। 2014 को 55 दुकानें विभाग द्वारा अलाट की गईं। यह पहले फेज की अलॉटमेंट विभाग द्वारा की गई। दूसरे फेज में 10 दुकानें अलाट की गईं। कुछ किसानों को दुकानें हॉर्टिकल्चर विभाग द्वारा अलाट न करने पर उन्होंने अदालत का रुख किया और उनको अदालत के आदेश के बाद दुकानें अलाट हो गईं। जिनकी संख्या-21 के करीब थी। वर्ष 2021 को यह मामला निपटा, जिसके बाद अगस्त 2021 को जिन लोगों की भी दुकानें अलाट हुई थीं उन्हें विभाग की तरफ से दुकानें बनाए जाने के लिए जगह आवंटित की गई। विभाग की तरफ से जो दुकानदारों को जगह आवंटित की गई, उस पर दुकानदार द्वारा व्यक्तिगत रूप से ही दुकानों का निर्माण कराना था। मौजूदा समय में 86 दुकानें अलाट हुई हैं। मौजूदा समय पर इस मंडी में 55 दुकानों का निर्माण कार्य चल रहा है।
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कुछ लोगों ने डबल स्टोरी दुकानें बनवाई हैं। वहीं 27 जुलाई 2020 को उस समय के गवर्नर गिरीश चंद्र मुर्मू द्वारा मंडी का शुभारंभ कर दिया गया। हॉर्टिकल्चर एंड प्लानिंग मार्केटिंग विभाग का यहां कार्यालय भी है। जहां पर मौजूदा समय में छोटी मंडी चल रही है। विभाग की तरफ से मंडी परिसर में बाथरूम और अपने कार्यालय के साथ मंडी की लोहे की ग्रिल के साथ चारों तरफ से फेंसिंग की गई है। जो दुकानों के निर्माण होने के बाद बेकार हो गई है। अभी तक इस फ्रूट एंड वेजिटेबल मार्केट में आने के लिए हॉर्टिकल्चर विभाग द्वारा न तो मुख्य गेट लगाया गया है, न ही गेट के आगे किसी पुल का निर्माण हो पाया है।
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खुद को लुटा महसूस कर रहे
जिन लोगों की दुकानों का निर्माण चल रहा है उनमें से बलबीर गुप्ता, राजेश्वर शर्मा, सरदार कमलजीत सिंह, सरदार इंद्रजीत सिंह, सतपाल सिंह चाढ़क, अंचल सिंह चाढ़क, रंजीत सिंह, रामपाल शर्मा, मोहन सिंह, मुल्क राज भगत, बाबा राम मोटन, देशराज शर्मा, रूपलाल, रघुनंदन खजूरिया, देवीदास का कहना है कि सरकार द्वारा जो प्रोजेक्ट बनाया गया प्रशासन उस पर काम कर रहा है। परंतु अभी तक इस मंडी को विकसित नहीं कर पाए। मंडी में आने के लिए न तो गेट न ही पुल का निर्माण हो पाया है। किसान इस जगह अपने वाहन से आ नहीं पाता। अगर कोई बाहर से फल सब्जी या अन्य चीज लाना चाहे तो ला नहीं सकता। जिन लोगों ने दुकानों का निर्माण कराया वह अपने आपको लुटा हुआ महसूस कर रहे हैं। क्योंकि विभाग की तरफ से मंडी विकसित करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया।
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चौकीदार की भी व्यवस्था नहीं
विभाग की तरफ से मंडी में चौकीदार की व्यवस्था थी वह भी नहीं मिल पाया, जिस बाथरूम का मंडी परिसर में निर्माण कार्य करवाया गया, उसमें पानी की व्यवस्था नहीं है। बाथरूम पर ताले लटके हैं। किसान जिन्हें दुकानें तो अलाट हुईं और लंबी कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद उन्होंने अपनी दुकानों पर निर्माण शुरू करा दिया, परंतु विभाग खुद ही विकसित नहीं होने देना चाहता।