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Jammu News: पंजाबी को आधिकारिक दर्जे के लिए जाट सभाओं की हाईवे जाम करने की चेतावनी
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पंजाबी मोर्चे को जाट सभाएं, सिख यूथ एसोसिएशन, यूएसएसएफ, लबाना समाज समेत विभिन्न संगठनों ने समर
- नौवें दिन भी जारी रहा पंजाबी भाषा मोर्चा, कई सामाजिक व धार्मिक संगठनों ने भी बुलंद की आवाजा
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में पंजाबी भाषा को आधिकारिक दर्जा दिलाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुक्रवार को नौवें दिन भी जारी रहा। मोर्चे को विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और युवा संगठनों का समर्थन मिलने से आंदोलन को नई मजबूती मिली। जाट संगठनों ने मांग की अनदेखी होने पर नेशनल हाईवे जाम करने की चेतावनी दी है।
ऑल जम्मू-कश्मीर जाट सभा के मनजीत सिंह और ऑल इंडिया जाट महासभा के अध्यक्ष मनमोहन चौधरी ने कहा कि यदि सरकार ने पंजाबी भाषा की मांग पर गंभीरता नहीं दिखाई तो संगठन अपनी ताकत दिखाने के लिए नेशनल हाईवे अवरुद्ध करने पर विचार कर सकते हैं। सिख यूथ एसोसिएशन जेएंडके ट्रस्ट, यूनाइटेड सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन (यूएसएसएफ), ऑल जेएंडके लबाना समाज सुधार सभा और जिला गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीजीपीसी) राजोरी ने भी मोर्चे को समर्थन दिया। इसके अलावा गुरुद्वारा सिंह सभा कडयाल और गुरुद्वारा तेग बहादुर साहिब आरएस पुरा ने पंजाबी भाषा की रक्षा और प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया।
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नेशनल कॉन्फ्रेंस नेताओं की चुप्पी पर सवाल
डीजीपीसी राजोरी के उपाध्यक्ष बलविंदर सिंह और महासचिव सुरजीत सिंह ने पंजाबी भाषा के मुद्दे पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के स्थानीय नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि मोर्चे के नौवें दिन तक पार्टी के प्रांतीय अध्यक्ष और पूर्व मंत्रियों ने मांग के समर्थन में सार्वजनिक रूप से आवाज क्यों नहीं उठाई। गुरुद्वारा रानी तालाब, डिग्याना के चेयरमैन तरनजीत सिंह टोनी ने सभी समर्थक संगठनों का आभार जताते हुए कहा कि पंजाबी की मान्यता का मुद्दा किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर की साझा भाषाई और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा है। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार से विधानसभा में पंजाबी भाषा विधेयक पेश करने की अपील की।
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बारिश में भी धरना जारी, गुरुद्वारों और स्थानीय लोगों का भी मिला साथ
जम्मू। पंजाबी भाषा को आधिकारिक दर्जा देने की मांग को लेकर जारी धरने को मजबूती देने में गुरुद्वारों, स्थानीय लोगों और स्वयंसेवकों की अहम भूमिका सामने आ रही है। वीरवार को रात में बारिश के बीच भी धरना जारी रहा। प्रदर्शनकारियों के खाने-पीने की व्यवस्था गुरुद्वारों की ओर से की जा रही है। स्थानीय लोग भी इसमें सहयोग दे रहे हैं। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, फिलहाल 20 अक्तूबर तक के भोजन का इंतजाम है। शुक्रवार को गुरुद्वारा कलगीधर साहिब, रिहाड़ी, बीसी रोड की ओर से डीजीपीसी के वरिष्ठ सदस्य करण सिंह की अगुवाई में लंगर लगाया गया। धरने में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, जो मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। धरना स्थल पर सफाई बनाए रखने के लिए स्वयंसेवक तैनात हैं। बारिश से बचने के लिए तिरपाल लगाए गए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अभी तक सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। दलविंदर कौर ने कहा कि पंजाबी को आधिकारिक दर्जा मिलने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। राजिंदर सिंह ने भी जम्मू में पंजाबी भाषा के व्यापक इस्तेमाल का हवाला देते हुए मांग का समर्थन किया। संवाद
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मोर्चे की मुख्य मांगें
- पंजाबी को जम्मू-कश्मीर की आधिकारिक भाषाओं में शामिल किया जाए।
- विधानसभा में पंजाबी भाषा विधेयक पेश किया जाए।
- भाषा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में पंजाबी भाषा को आधिकारिक दर्जा दिलाने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरना शुक्रवार को नौवें दिन भी जारी रहा। मोर्चे को विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और युवा संगठनों का समर्थन मिलने से आंदोलन को नई मजबूती मिली। जाट संगठनों ने मांग की अनदेखी होने पर नेशनल हाईवे जाम करने की चेतावनी दी है।
ऑल जम्मू-कश्मीर जाट सभा के मनजीत सिंह और ऑल इंडिया जाट महासभा के अध्यक्ष मनमोहन चौधरी ने कहा कि यदि सरकार ने पंजाबी भाषा की मांग पर गंभीरता नहीं दिखाई तो संगठन अपनी ताकत दिखाने के लिए नेशनल हाईवे अवरुद्ध करने पर विचार कर सकते हैं। सिख यूथ एसोसिएशन जेएंडके ट्रस्ट, यूनाइटेड सिख स्टूडेंट्स फेडरेशन (यूएसएसएफ), ऑल जेएंडके लबाना समाज सुधार सभा और जिला गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (डीजीपीसी) राजोरी ने भी मोर्चे को समर्थन दिया। इसके अलावा गुरुद्वारा सिंह सभा कडयाल और गुरुद्वारा तेग बहादुर साहिब आरएस पुरा ने पंजाबी भाषा की रक्षा और प्रचार-प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया।
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नेशनल कॉन्फ्रेंस नेताओं की चुप्पी पर सवाल
डीजीपीसी राजोरी के उपाध्यक्ष बलविंदर सिंह और महासचिव सुरजीत सिंह ने पंजाबी भाषा के मुद्दे पर नेशनल कॉन्फ्रेंस के स्थानीय नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि मोर्चे के नौवें दिन तक पार्टी के प्रांतीय अध्यक्ष और पूर्व मंत्रियों ने मांग के समर्थन में सार्वजनिक रूप से आवाज क्यों नहीं उठाई। गुरुद्वारा रानी तालाब, डिग्याना के चेयरमैन तरनजीत सिंह टोनी ने सभी समर्थक संगठनों का आभार जताते हुए कहा कि पंजाबी की मान्यता का मुद्दा किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर की साझा भाषाई और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा है। उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार से विधानसभा में पंजाबी भाषा विधेयक पेश करने की अपील की।
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बारिश में भी धरना जारी, गुरुद्वारों और स्थानीय लोगों का भी मिला साथ
जम्मू। पंजाबी भाषा को आधिकारिक दर्जा देने की मांग को लेकर जारी धरने को मजबूती देने में गुरुद्वारों, स्थानीय लोगों और स्वयंसेवकों की अहम भूमिका सामने आ रही है। वीरवार को रात में बारिश के बीच भी धरना जारी रहा। प्रदर्शनकारियों के खाने-पीने की व्यवस्था गुरुद्वारों की ओर से की जा रही है। स्थानीय लोग भी इसमें सहयोग दे रहे हैं। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, फिलहाल 20 अक्तूबर तक के भोजन का इंतजाम है। शुक्रवार को गुरुद्वारा कलगीधर साहिब, रिहाड़ी, बीसी रोड की ओर से डीजीपीसी के वरिष्ठ सदस्य करण सिंह की अगुवाई में लंगर लगाया गया। धरने में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, जो मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की बात कह रहे हैं। धरना स्थल पर सफाई बनाए रखने के लिए स्वयंसेवक तैनात हैं। बारिश से बचने के लिए तिरपाल लगाए गए हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अभी तक सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। दलविंदर कौर ने कहा कि पंजाबी को आधिकारिक दर्जा मिलने तक उनका संघर्ष जारी रहेगा। राजिंदर सिंह ने भी जम्मू में पंजाबी भाषा के व्यापक इस्तेमाल का हवाला देते हुए मांग का समर्थन किया। संवाद
मोर्चे की मुख्य मांगें
- पंजाबी को जम्मू-कश्मीर की आधिकारिक भाषाओं में शामिल किया जाए।
- विधानसभा में पंजाबी भाषा विधेयक पेश किया जाए।
- भाषा और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।