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नशा मुक्ति केंद्र में दवा न मिलने पर भड़के पीड़ित
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जम्मू। साइकाइटरी अस्पताल जम्मू के नशा मुक्त केंद्र में शनिवार को दवा न मिलने पर पीड़ितों से अस्पताल परिसर में प्रदर्शन किया। नशा पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें दवा नहीं दी जा रही। वे आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण बाजार से भी दवा नहीं खरीद सकते हैं। केंद्र में 845 मरीज पंजीकृत हैं। यहां रोजाना 300 से ऊपर मरीज आते हैं। इनमें 50-60 नए मरीज होते हैं और बाकी रूटीन में दवा लेते हैं। इन्हें डॉक्टर प्रतिदिन की डोज के मुताबिक बीमारी के हिसाब से टेबलेट की डोज दी जाती है।
शनिवार को अस्पताल के गेट पर प्रदर्शन कर रहे पीड़ितों ने कहा कि उन्हें शुक्रवार को अगले दिन सुबह नौ बजे अस्पताल में पहुंचने के लिए कहा गया था। लेकिन जब वे अस्पताल पहुंचे तो उन्हें गेट के भीतर ही नहीं जाने दिया और दवा खत्म होने की बात कही गई। दवा के लिए सोमवार तक बोला जा रहा है, लेकिन वे दो दिन दवा के बिना कैसे रह पाएंगे। दवा न लेने पर उन्हें शारीरिक और मानसिक समस्याएं होती हैं। भूख नहीं लगती। पीड़ितों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन की ओर से उन्हें दवा लिखकर बाहर से लेने के लिए कहा जाता है, जिसे वे खरीदने में सक्षम नहीं हैं। अस्पताल पहुंचने पर उन्हें भीतर नहीं जाने दिया जा रहा। इस दौरान पीड़ितों की अस्पताल के निजी सुरक्षा कमियों और पुलिस कर्मियों से बहस भी हुई। सुरक्षा कर्मियों ने बताया कि थोड़े-थोड़े मरीजों को भीतर भेजने के लिए कहा गया है।
नशा मुक्त केंद्र जम्मू-कश्मीर एड्स कंट्रोल सोसायटी के अधीन चलाया जा रहा है और नैको के माध्यम से दवाई उपलब्ध करवाई जाती है। दवाई की पीछे से कमी है और जल्द आने की उम्मीद है। दवा की अनुपलब्धता के लिए मरीजों को पहले ही जानकारी दी गई थी। फिलहाल मरीजों को कुछ दिन के लिए बाहर से दवाई लिखकर दी जा रही है।
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डॉ. कीर्ति भूषण, अधीक्षक, साइकाइटरी अस्पताल, जम्मू
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शनिवार को अस्पताल के गेट पर प्रदर्शन कर रहे पीड़ितों ने कहा कि उन्हें शुक्रवार को अगले दिन सुबह नौ बजे अस्पताल में पहुंचने के लिए कहा गया था। लेकिन जब वे अस्पताल पहुंचे तो उन्हें गेट के भीतर ही नहीं जाने दिया और दवा खत्म होने की बात कही गई। दवा के लिए सोमवार तक बोला जा रहा है, लेकिन वे दो दिन दवा के बिना कैसे रह पाएंगे। दवा न लेने पर उन्हें शारीरिक और मानसिक समस्याएं होती हैं। भूख नहीं लगती। पीड़ितों का आरोप है कि अस्पताल प्रशासन की ओर से उन्हें दवा लिखकर बाहर से लेने के लिए कहा जाता है, जिसे वे खरीदने में सक्षम नहीं हैं। अस्पताल पहुंचने पर उन्हें भीतर नहीं जाने दिया जा रहा। इस दौरान पीड़ितों की अस्पताल के निजी सुरक्षा कमियों और पुलिस कर्मियों से बहस भी हुई। सुरक्षा कर्मियों ने बताया कि थोड़े-थोड़े मरीजों को भीतर भेजने के लिए कहा गया है।
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नशा मुक्त केंद्र जम्मू-कश्मीर एड्स कंट्रोल सोसायटी के अधीन चलाया जा रहा है और नैको के माध्यम से दवाई उपलब्ध करवाई जाती है। दवाई की पीछे से कमी है और जल्द आने की उम्मीद है। दवा की अनुपलब्धता के लिए मरीजों को पहले ही जानकारी दी गई थी। फिलहाल मरीजों को कुछ दिन के लिए बाहर से दवाई लिखकर दी जा रही है।
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डॉ. कीर्ति भूषण, अधीक्षक, साइकाइटरी अस्पताल, जम्मू