ओलों ने तोड़ी सेब बागवानों की कमर: पेड़ों से झड़े फल, तुड़ाई से ऐन पहले बरसी आफत; खेतों में बिछ गया धान
बुधवार रात हुई ओलावृष्टि से सेब के बागों को भारी नुकसान हुआ। तैयार फसल टूटकर गिर गई, जिससे बागवानों की चिंता बढ़ गई है। इस सीजन में मौसम की मार से उत्पादक पहले भी प्रभावित हुए हैं।
विस्तार
अपर राजवार में वीरवार की सुबह सेब के बागों में पहुंचते ही तबाही का मंजर दिखा। पेड़ों के नीचे जगह-जगह टूटकर गिरे सेब बिखरे पड़े थे। कई शाखाएं बीच से टूटकर नीचे लटक रही थीं। पेड़ों पर बचे सेबों पर ओलों की चोट के गहरे निशान थे। कुछ फल जमीन पर गिरकर दब चुके थे। बागवान एक-एक पेड़ के नीचे खड़े होकर नुकसान का जायजा ले रहे थे। बची फसल को देखकर भी उनके चेहरे पर राहत नहीं, चिंता थी। जमीन पर बिखरी अपनी महीनों की मेहनत को देख आंख भर आ रही थी। तुड़ाई शुरू होने में कुछ ही दिन बाकी थे, लेकिन बुधवार रात हुई ओलावृष्टि ने तैयार फसल को बाजार तक पहुंचने से पहले ही तबाह कर दिया।
यहां के निचहामा, बहनीपोरा, लच्छमपोरा और बुडशुगी में तेज आंधी के साथ ओले गिरे। कुछ ही देर में बागों का रंग बदल गया। पेड़ों से सेब टूटकर नीचे गिरते गए, कई शाखाएं टूट गईं और बचे फलों पर भी ओलों के निशान पड़ गए। बागवानों के मुताबिक अब पेड़ पर बची फसल की गुणवत्ता और उसकी मंडी कीमत दोनों को लेकर चिंता है।
निचहामा के बागवान गुलाम मोहम्मद जमीन से उठाकर गिरे सेब दिखाते हुए कहते हैं...सालभर इसी फसल के सहारे रहते हैं। तुड़ाई शुरू होने वाली थी। एक ओलावृष्टि ने सब बदल दिया। जो फल बचे हैं, उन पर भी चोट के निशान हैं।
इस सीजन में बार-बार बदलते मौसम से पहले ही सेब उत्पादक नुकसान झेल चुके हैं। अब इस बारिश ने बागान मालिकों की चिंता और बढ़ा दी है। ऊंचाई वाले इलाकों में तुड़ाई शुरू होने वाली है। ऐसे में तेज हवा से पेड़ से तैयार फल गिरने, ओलावृष्टि से चोट के निशान पड़ने और लगातार नमी से गुणवत्ता प्रभावित होने का खतरा बढ़ गया है। अगस्त में शोपियां और कुलगाम में ओलावृष्टि, बारिश और तेज हवाओं से बड़े पैमाने पर फल गिरे थे। प्रभावित इलाकों के उत्पादकों ने 90 प्रतिशत से अधिक नुकसान का दावा किया था। हालांकि उद्यान विभाग ने नुकसान का आधिकारिक डेटा जारी नहीं किया है।
इस सीजन में बार-बार मौसम की मार
मई से ही घाटी में ओलावृष्टि और तेज हवाओं से बाग प्रभावित होते रहे। जून में दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग, त्राल और कुलगाम में ओलावृष्टि से सेब को नुकसान हुआ। अगस्त में फिर शोपियां-कुलगाम में बड़ा झटका लगा। सितंबर में तुड़ाई से ठीक पहले शोपियां और अनंतनाग में ओलावृष्टि ने उत्पादकों की चिंता बढ़ा दी है।
बारिश सिर्फ फल नहीं, गुणवत्ता भी प्रभावित करती है
लगातार बारिश से बागों में नमी बढ़ने पर फंगस और स्कैब का खतरा बढ़ गया है। अगस्त में दक्षिण कश्मीर के उत्पादकों ने लंबे बारिश के दौर के बाद सेकेंडरी एप्पल स्कैब, जलभराव और फल की गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई थी।
कितना नुकसान हुआ?
हालिया एक अध्ययन में 2025-26 के दौरान कई जिलों में ओलावृष्टि से 50 से 90 प्रतिशत तक फसल क्षति और करीब छह हजार करोड़ के आर्थिक नुकसान का अनुमान लगाया गया है। वहीं, सुकास्ट की मार्केट इंटेलिजेंस सेल ने 2026 के मौसम से जुड़े नुकसान का अनुमान 300 से 400 करोड़ बताया है।
बागान मालिकों की मांग: बीमा और नुकसान का वास्तविक आकलन
मौसम की मार झेल रहे बागवान लंबे समय से फसल बीमा और नुकसान के आधार पर राहत की मांग कर रहे हैं। 24 सितंबर को विधानसभा में कृषि मंत्री जावेद अहमद डार ने कहा कि सेब को मौसम आधारित फसल बीमा योजना (डब्ल्यूबीसीआईएस) के दायरे में लाने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। केंद्र की संशोधित गाइडलाइन का इंतजार है।
सेब की खासियत और कश्मीर की पहचान
कश्मीर का सेब, घाटी की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की प्रमुख फसल है। शोपियां, पुलवामा, कुलगाम, अनंतनाग, बारामुला और सोपोर से देश की मंडियों तक इसकी आपूर्ति होती है। यहां की ठंडी जलवायु, ऊंचाई और परिस्थितियां सेब की अलग-अलग किस्मों के उत्पादन के लिए अनुकूल हैं। इस समय बाजार में शुरुआती किस्मों के साथ मुख्य डेलिशियस भी पहुंच रही है।
बाजार पर भी असर
मौसम से नुकसान सिर्फ बागान तक सीमित नहीं है। फल गिरने पर किसान उसे सामान्य बाजार भाव पर नहीं बेच पाते। हालांकि इस साल गिरान सेब की खरीद पिछले साल की तुलना में बेहतर रही है। घाटी में कोल्ड स्टोरेज भी पहले ही बुक हो चुके हैं।
इस बार सेब की तीन बड़ी चुनौती
-तुड़ाई के बीच तेज हवा और ओलावृष्टि
-लगातार नमी से गुणवत्ता और फंगस का खतरा
-मौसमजनित नुकसान के लिए प्रभावी फसल बीमा की प्रतीक्षा
कश्मीर की प्रमुख सेब मंडियां
-सोपोर, अगलर, परिंपोरा और दक्षिण कश्मीर की बटिंगू मंडियां सबसे महत्वपूर्ण हैं।
यहां जाता है सेब
दिल्ली की आजादपुर मंडी, पंजाब के लुधियाना, जालंधर, अमृतसर, हरियाणा और चंडीगढ़, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात।
विदेश में कश्मीरी सेब
यूएई, सऊदी अरब, भूटान, बहरीन, कतर, मालदीव, कुवैत और ब्रिटेन कश्मीरी सेब के बाजार हैं।
खेतों में बिछी धान की पकी फसल
ओलावृष्टि का असर सिर्फ बागों तक नहीं रहा। बहनीपोरा समेत आसपास के इलाकों में धान की पकी फसल खेतों में बिछ गई। मौसम में आए बदलाव से जिन खेतों में कुछ दिन पहले तक बालियां हवा के साथ लहरा रही थीं, वहां अब पौधे जमीन पर गिरे दिखे। बहनीपोरा के किसान अब्दुल राशिद कहते हैं...धान कटाई के लिए तैयार था। अब पूरी फसल जमीन पर है। इसे काटने में ज्यादा मेहनत लगेगी और कितना अनाज बच पाएगा, यह भी पता नहीं। किसानों और बागवानों का कहना है कि नुकसान का सही अंदाजा खेतों और बागों में सर्वे के बाद ही सामने आएगा। बागवानी विभाग के अनुसार नुकसान का आकलन करने के लिए जल्द टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजा जाएगा।