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मृतकों के परिजनों ने हाईवे जाम कर मांगा इंसाफ
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जम्मू। प्रशासन की अव्यवस्था के कारण सिदड़ा में संक्रमित मृतक का संस्कार करते मरने वाले भतीजों के परिवारवालों ने शनिवार को गंग्याल में रोष प्रदर्शन किया। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के साथ इंसाफ मांगा। प्रदर्शनकारियों ने गंग्याल राष्ट्रीय राजमार्ग पर धरना लगाकर प्रशासन और पुलिस के खिलाफ नारेबाजी की। आरोप लगाया कि मौत के लिए जिला प्रशासन जिम्मेदार है। छोेटी बेटियों के साथ पहुंची एक मृतक की पत्नी ने आरोप लगाया कि उसके पति की प्रशासन ने हत्या की है।
इस दौरान कश्मीरी पंडित समुदाय के सदस्यों ने कहा कि परिजनों को शनिवार सुबह तक शव भी सौंपे नहीं गए थे। सिदड़ा में संस्कार के लिए गए दोनों लोगों को पीपीई किट डाली गई थी। वहां रेत में एंबुलेंस फंसने पर उन्हें भीषण गर्मी में गाड़ी को धक्का मारने के लिए कहा गया। एंबुलेंस में एसी तक नहीं था। पीपीई किट पहने लोगों के बैकअप के लिए कोई ऑक्सीजन या पानी की व्यवस्था नहीं थी, जिससे ऐसे हालात बनने पर उन्हें बचाया नहीं जा सका।
परिवारवालों ने एडीसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते कहा कि वे संस्कार प्रक्रिया को देख रहे थे तो उन्होंने तत्काल उचित इंतजाम क्यों नहीं किए। शव को छोड़कर दोनों लोगों को अस्पताल तुरंत पहुंचाने की व्यवस्था क्यों नहीं की गई। यह सीधे लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने मांग की कि दोनों मृतकों के परिवारवालों को 25-25 लाख और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
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आरोप : जिस एडीसी के सामने घटना हुई, उसी को सौंप दिया जांच का जिम्मा
परिवारवालों का आरोप है कि यह पूरी घटना एडीसी जम्मू की देखरेख में हुई और उन्हीं को जांच का जिम्मा सौंपा गया है। प्रशासन आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रहा है। इस पूरी घटना की सीबीआई जांच करवाई जाए। मृतकों की बेटियों और परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। घरवालों ने कहा कि भीषण गर्मी में दोनों को छह घंटे तक तड़पने के लिए तवी में छोड़ दिया गया, जिससे उनकी जान चली गई।
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इस दौरान कश्मीरी पंडित समुदाय के सदस्यों ने कहा कि परिजनों को शनिवार सुबह तक शव भी सौंपे नहीं गए थे। सिदड़ा में संस्कार के लिए गए दोनों लोगों को पीपीई किट डाली गई थी। वहां रेत में एंबुलेंस फंसने पर उन्हें भीषण गर्मी में गाड़ी को धक्का मारने के लिए कहा गया। एंबुलेंस में एसी तक नहीं था। पीपीई किट पहने लोगों के बैकअप के लिए कोई ऑक्सीजन या पानी की व्यवस्था नहीं थी, जिससे ऐसे हालात बनने पर उन्हें बचाया नहीं जा सका।
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परिवारवालों ने एडीसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते कहा कि वे संस्कार प्रक्रिया को देख रहे थे तो उन्होंने तत्काल उचित इंतजाम क्यों नहीं किए। शव को छोड़कर दोनों लोगों को अस्पताल तुरंत पहुंचाने की व्यवस्था क्यों नहीं की गई। यह सीधे लापरवाही को दर्शाता है। उन्होंने मांग की कि दोनों मृतकों के परिवारवालों को 25-25 लाख और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
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आरोप : जिस एडीसी के सामने घटना हुई, उसी को सौंप दिया जांच का जिम्मा
परिवारवालों का आरोप है कि यह पूरी घटना एडीसी जम्मू की देखरेख में हुई और उन्हीं को जांच का जिम्मा सौंपा गया है। प्रशासन आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रहा है। इस पूरी घटना की सीबीआई जांच करवाई जाए। मृतकों की बेटियों और परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। घरवालों ने कहा कि भीषण गर्मी में दोनों को छह घंटे तक तड़पने के लिए तवी में छोड़ दिया गया, जिससे उनकी जान चली गई।