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जम्मू से आरएस पुरा तक मिनी ट्रेन चलाने के फैसले का विरोध

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protest against the decision to run a mini train from Jammu to RS Pura
आरएस पुरा/मीरां साहिब। जम्मू के बिक्रम चौक से आरएस पुरा तक पुराने रूट पर मिनी ट्रेन चलाने के फैसले का आरएस पुरा और मीरां साहिब के लोगों ने विरोध शुरू कर दिया है। बीते शुक्रवार को उप राज्यपाल के सलाहकार बशीर अहमद खान ने बिक्रम चौक का दौरा कर पुराने रेल मार्ग पर मिनी ट्रेन चलाने के लिए अधिकारियों को डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
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शनिवार को इसके विरोध में मीरां साहिब कस्बे में ओम प्रकाश खजूरिया की अध्यक्षता में पुरानी रेलवे पटरी पर बसे लोगों ने सरकार के इस प्रोजेक्ट के खिलाफ प्रदर्शन किया। खजूरिया ने कहा कि भारत-पाकिस्तान विभाजन होने पर पीओके विस्थापितों को यहां रहने के लिए कहा गया था और अब प्रभावित परिवार इसी पुराने रेलवे ट्रैक पर बस गए हैं। लेकिन बीते 73 वर्षों से विस्थापितों को तत्कालीन सरकार द्वारा मुहैया करवाई जमीन का मालिकाना हक नहीं मिला है। इस समय पीओके विस्थापितों की चौथी पीढ़ी यहां पर मकान बनाकर जीवन-यापन कर रही है और अब सरकार बिक्रम चौक से आरएस पुरा तक मिनी ट्रेन चलाने की योजना बना रही है, यह अन्याय है। कुंदन लाल शर्मा सहित अन्य प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जिस प्रकार सरकार की ओर से रिंग रोड नई भूमि पर बनाया जा रहा है, उसी तरह मिनी ट्रेन के लिए भी नया रास्ता चुना जाए, ताकि बड़ी संख्या में परिवार बेघर होने से बच जाएं।
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उधर, आरएस पुरा कस्बेे में पार्षद अंजू वाला, देवेंद्र शर्मा, मनमोहन चौधरी सहित अन्य लोगों ने इस फैसले के विरोध में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि सरकार द्वारा कोई भी कदम उठाए जाने के पहले यहां पर रहने वाले परिवारों को दूसरे स्थान पर मकान बनाकर मुहैया करवाएं जाएं, ताकि 72 साल से यहां मकान बनाकर जीवन यापन कर रहे लोग बेघर होने से बच जाएं।
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आजादी के पहले जम्मू से सियालकोट तक चलती थी रेलगाड़ी
आजादी से पहले जम्मू से सियालकोट तक रेलगाड़ी चलती थी। कई लोग सियालकोट से आरएस पुरा और जम्मू तक आते-जाते थे। आजादी के बाद इस रेल मार्ग को बंद कर दिया गया। अब आरएस पुरा-जम्मू तक रेलवे ट्रैक के स्थान पर बस सेवा बहाल कर दी गई है। रेलवे के इस 42 किलो मीटर ट्रैक पर अब कई स्थानों पर आबादी बस चुकी है। साथ ही सेना के अधीन भी जमीन है। आज भी रेलवे के कई पुराने पुल हैं, लेकिन अधिकतर पुल जर्जर हो चुके हैं। आरएस पुरा के बुजुर्ग ओमप्रकाश का कहना है कि उन्होंने भी बचपन में पिता के साथ सियालकोट तक कई बार सफर किया है। अब कई स्थानों पर पुराने रेलवे ट्रैक के आरएस पुरा में स्टेशन के अवशेष जरूर हैं, लेकिन अब हालत ऐसी नहीं है कि इसी रूट पर ट्रेन चल सके। उन्होंने कहा कि सरकार को अगर रेलमार्ग स्थापित करना है तो इसके लिए कोई और रूट बनाए, ताकि लोग बेघर न हों।
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