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घराना वेटलैंड की भूमि अधिग्रहण को पहुंची टीम का ग्रामीणों ने किया विरोध

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घराना पंचायत के सरपंच व ग्रामीणो को दस्तावेज दिखाते अधिकारी - फोटो : RSPURA
आरएस पुरा। भारत-पाकिस्तान सीमा से सटे घराना वेटलैंड के विस्तार के लिए बुधवार को एडीसी जम्मू घनश्याम सिंह की अध्यक्षता में तारबंदी करने आई टीम का ग्रामीणों ने घेराव किया। लोगों ने सुचेतगढ़ के डीडीसी सदस्य सरदार तनजीत सिंह टोनी के नेतृत्व में नारेबाजी की। मामला बिगड़ता देख पुलिस ने तरनजीत टोनी और सरपंच गुरदयाल सिंह सहित 16 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज उन्हें हिरासत में ले लिया। कार्रवाई के लिए प्रशासनिक अधिकारी पूरे दलबल के साथ पहुंचे थे।
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प्रशासन की ओर से गांव घराना में 408 कनाल 17 मरले जमीन पर तारबंदी की जा रही है। इसके विरोध में ग्रामीणों ने प्रदर्शन कर टीम का घेराव किया। डीडीसी सदस्य ने कहा कि पुलिस व प्रशासन गांव के लोगों के साथ गलत कर रहे हैं। वेटलैंड को लेकर मामला कोर्ट में चल रहा है। बावजूद इसके प्रशासन ने किसानों की कृषि भूमि पर तारबंदी कर दी, जो कोर्ट के आदेश की अवमानना है। टोनी ने कहा कि पुलिस की मदद से लोगों की आवाज को दबाया जा रहा है। इसके खिलाफ आंदोलन शुरू किया जाएगा और जब तक लोगों की भूूमि से तारबंदी को हटाया नहीं जाता, संघर्ष जारी रहेगा। गिरफ्तारी के बाद गुस्साए स्थानीय लोग ट्रैक्टर-ट्रालियों में बैठकर आरएस पुरा पुलिस थाने के बाहर पहुंच गए और नारेबाजी की।
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प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए किया हल्का बल प्रयोग
प्रदर्शनकारियों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। गुस्साए लोगों ने कसबे के दलजीत चौक पर धरना लगा दिया, जिससे कई घंटे यातायात बाधित रहा। किसानों ने कहा कि उनके साथ गलत किया जा रहा है। आरोप लगाया कि एक ओर उनकी जमीनों पर प्रशासन ने जबरन कब्जा कर लिया। अब उन्हें हिरासत में लिया जा रहा है। सरपंच गुरुदयाल सिंह और गांववासी निवासी मित्तल चौधरी ने बताया कि सरकार की ओर से गांव के किसानों की जबरन जमीन हड़पने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार किसानों को उजाड़कर पक्षियों को बसेरा बनाने में लगी है। इस जमीन से उनकी रोजीरोटी चलती है। धरनास्थल पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों ने लोगों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं हटे। लोगों को हटाने के लिए पुलिस ने हल्का बल प्रयोग भी किया, जिसके बाद यातायात बहाल किया गया।
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जमीन के बदले किसानों को
मुआवजा देगी सरकार : एडीसी
एडीसी घनश्याम सिंह ने कहा कि कुछ वर्ष पहले भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हुई थी और प्रशासन द्वारा वन विभाग के सहयोग से भूमि पर तारबंदी की है। उन्होंने साफ किया कि जिन किसानों की भूमि ली जाएगी, उन्हें सरकार की तरफ से मुआवजा भी दिया जाएगा। पर्यटक स्थल के लिए घराना वेटलैंड काफी महत्वपूर्ण है और इसके विस्तार के लिए काफी देर पहले नोटिफिकेशन जारी की गई थी। जिला प्रशासन की ओर से भूमि को संबंधित विभाग के हवाले किया जा रहा है। विभाग के डीएफओ के अनुसार सरकार के निर्देश पर भूमि पर तारबंदी की जा रही है और जिन किसानों की भूमि विभाग द्वारा ली जाएगी उन्हें मुआवजा भी दिया जाएगा। समाचार लिखने तक किसान आरएस पुरा पुलिस थाने के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे।
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पूर्व मंत्री शाम लाल और आरएस चिब
ने सरकार के फैसले का किया विरोध
आरएस पुरा। कई राजनीतिक पार्टियों ने घराना वेटलैंड में किसानों की कृषि भूमि पर तारबंदी करने के सरकार के फैसले का विरोध किया। पूर्व मंत्री चौधरी शाम लाल ने कहा कि प्रशासन को किसानों को किसी दूूसरे स्थान पर भूमि मुहैया करवानी चाहिए। बिना किसी जानकारी के प्रशासन ने कार्रवाई की, जो ठीक नहीं। कहा कि आजादी के पहले इस भूमि पर किसान खेतीबाड़ी करते आ रहे हैं, जिसे छीना जा रहा है।
पूर्व मंत्री आरएस चिब ने कहा कि प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई उचित नहीं। किसानों से बातचीत की जानी चाहिए, ताकि उन्हें, इंसाफ मिल सके। प्रशासन गलत दस्तावेज बनाकर किसानों की कृषि भूमि पर वेटलैंड बना रहा है। कोर्ट में लंबित फैसले का इंतजार किया जाना चाहिए। पूर्व मंत्री ने आरएस पुरा थाने में पहुंचे और किसानों से बात कर प्रशासनिक अधिकारियों को समाधान के लिए कहा।

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खेतीबाड़ी पर ही निर्भर घराना के किसान : टोनी
सुचेतगढ़ के डीडीसी सदस्य तरनजीत टोनी ने कहा कि देश में दिन व दिन कृषि भूमि कम हो रही है। ऐसे में 408 कनाल भूमि पर वेटलैंड तैयार करना सही नहीं। मौजूदा समय में दो कनाल भूमि पर तालाब है और यहां पर ही प्रवासी पक्षी सर्दियों में चार-पांच माह रहते हैं। किसानों के पास रोजीरोटी का साधन खेतीबाड़ी पर ही निर्भर है। अगर जमीन नहीं रहेगी तो इन परिवारों का क्या होगा। सरकार को कोई भी फैसला करने से पहले किसानों के बारे में भी सोचना चाहिए।
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