टनल बन जाने के बाद भी जम्मू-श्रीनगर हाइवे के सफर में बरकरार हैं मुश्किलें
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चिनैनी-नाशरी टनल के उद्घाटन के बावजूद शहर से करीब पांच किलोमीटर दूर राष्ट्रीय राजमार्ग पर उधमपुर से चिनैनी तक चार स्थानों पर पहाड़ों से गिरने वाली पस्सियां और मलबे वाहनों की आवाजाही के लिए चुनौती बनी हुई है। विशेष तौर पर खैरी का इलाका।
यहां तेज बारिश होने पर हजारों टन मलबा राजमार्ग पर गिरता है। राजमार्ग बंद हो जाता है। जब तक इसका समाधान नहीं निकाला जाता है, तब तक राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही सुचारु रूप से नहीं चल सकेगी।
शहर से करीब पांच किलोमीटर दूर खैरी इलाका है। जहां पर करीब दो वर्ष से लगातार पहाड़ से मलबा राजमार्ग पर गिर रहा है। विशेष तौर पर बारिश के दौरान। जब भी तेज बारिश होती है तो खैरी में हजारों टनल मलबा राष्ट्रीय राजमार्ग पर गिरता है और फिर इसको खोलने में कई दिन लग जाते हैं। विशेष तौर पर बरसात के मौसम में खैरी में कई बार राजमार्ग बंद होता है।
बारिश से कई बार बंद हो जाता है हाइवे
इसके अलावा मोड़, का-मोड़ और समरोली में भी कई बार पहाड़ों से पस्सियां गिरने के बाद राजमार्ग बंद होता है। वर्तमान समय में इन स्थानों पर फोर राष्ट्रीय राजमार्ग तैयार करने का काम चल रहा है, लेकिन इनका समाधान निकाले बिना राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही सुचारु रूप से चलाना मुमकिन नहीं होगा।
इन स्थानों के बाद ही चिनैनी-नाशरी टनल है। तेज बारिश में चिनैनी-नाशरी टनल के जरिए चिनैनी से रामबन तो आसानी से पहुंचा जा सकेगा, लेकिन यात्री व वाहन चालकों के लिए टनल तक पहुंचना मुश्किल होगा। इन स्थानों पर गिरने वाले मलबे का समाधान निकालने पर ही यात्री हर मौसम में घाटी से जम्मू और जम्मू से घाटी के लिए आवाजाही कर सकेंगे।