जम्मू-कश्मीर में गेहूं की फसल पर बड़ा संकट, किसानों को हो सकता है नुकसान
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जम्मू कश्मीर के अरनिया में पिछले एक हफ्ते से लगातार धूप निकलने से तापमान में भी बढ़ोत्तरी हुई है। इससे किसानों के चेहरों चिंता की लकीरें खिंचना शुरू हो गई हैं। इसकी एक बड़ी वजह येलोरस्ट का खतरा है, जो अब गेहूं की फसल पर मंडरा रहा है। कई इलाकों में येलोरस्ट ने गेहूं को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है।
अब तक अरनिया क्षेत्र में तकरीबन 40 प्रतिशत फसल इस बीमारी की चपेट में आ चुकी है। क्षेत्र के किसान बैसाखी राम, रमेश लाल, मदन शर्मा, जीतराज, सुभाष चंद्र, शामलाल आदि का कहना था कि गेहूं बिजाई के शुरुआती दौर में ही हमें गेहूं की फसल को लेकर सूखे का सामना करना पड़ा। बाद में इंद्र भगवान ने किसानों की सुनी और बारिश हुई।
लगातार बारिश होने से गेहूं की फसल पर येलोरस्ट का खतरा मंडराने लगा। कुछ दिन पहले तक किसान गेहूं की बंपर पैदावार की संभावना से बहुत खुश नहर आ रहे थे, लेकिन अब ज्यादातर सीमावर्ती किसानों के चेहरों पर अपनी फसल को लेकर चिंता स्पष्ट देखी जा सकती है।
जिन खेतों में पानी की निकासी नहीं, वहां खतरा ज्यादा
आजकल लगातार तेज धूप निकलने से गेहूं की फसल पीली पड़ने लगी है। किसानों का कहना था कि इस बीमारी की रोकथाम के लिए दवा भी बहुत कम मिल रही है। कृषि विभाग का बार-बार चक्कर चक्कर लगाने के बाद भी किसानों को दवा नहीं मिल रही है। उनका कहना था कि यदि समय रहते इस बीमारी को नहीं रोका गया, तो किसानों की पूरी मेहनत चौपट हो जाएगी।
किसानों का कहना था कि आमतौर जिन किसानों के गेहूं के खेतों में बारिश के पानी की निकासी नहीं है, वहां येलोरस्ट का खतरा ज्यादा है। गौरतलब है कि गेहूं की फसल बहुत ही नाजुक होती है, जो न तो एक दो हफ्ते तक सूखा सहन कर सकती है और न ही बारिश के बाद तेज धूप ही सहन नहीं कर सकती है।