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कर्मचारियों की हड़ताल से मरीज रहे बेहाल, समय पर नहीं मिल पाया इलाज
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जम्मू। जम्मू संभाग के दस जिलों में सोमवार को चिकित्सा कर्मचारियों की हड़ताल से मरीज बेहाल रहे। स्वास्थ्य विभाग के अस्पतालों में पहुंचकर भी हजारों मरीजों को उपचार नसीब नहीं हुआ है। दैनिक ऑपरेशन नहीं होने से मरीजों का दर्द भी बढ़ गया। डॉक्टर को दिखाने के लिए घंटों मरीज ओपीडी परिसर में बैठे रहे, लेकिन हड़ताल के कारण पर्ची ही नहीं मिल पाई। इससे मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ा।
गांधीनगर अस्पताल की ओपीडी परिसर में मायूस होकर बैठी कठुआ के चढ़वाल निवासी बुजुर्ग कांता देवी ने बताया कि वह आंख और दिमाग का इलाज करवा रही है और सोमवार को जांच करवानी थी। लेकिन अस्पताल पहुंचने पर बताया गया कि ओपीडी बंद है। कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इतनी दूर से आने के बावजूद इलाज से महरूम रहना पड़ा है। सरकार को हड़ताल के दौरान मरीजों के लिए उचित वैकल्पिक व्यवस्थाएं करनी चाहिए थीं।
खुदवाल, चट्ठा निवासी रजनी बच्ची को दिखाने आई थी, लेकिन पर्ची नहीं मिलने पर परेशान दिखाई दी। अस्पताल प्रशासन की ओर से बस हड़ताल की जानकारी दी जा रही थी। उसने बताया कि बच्ची को डाक्टर को दिखाने के बिना लौटना पड़ रहा है। डिग्याना से अस्पताल में अपनी मां को दिखाने आए सुखदेव ने बताया कि उन्हें किसी तरह से अस्पताल लेकर आए थे, लेकिन डॉक्टर की सुविधा नहीं मिली है। हड़ताल के बारे में जानकारी नहीं थी। सांबा निवासी रमेश कुमार को निजी अस्पताल में पेट से पाइप निकालने के लिए ऑपरेशन से पहले रैपिड कोविड टेस्ट की जरूरत थी, लेकिन हड़ताल के कारण टेस्ट नहीं हुआ। हो पाया। उसने बताया कि वह सांबा से टेस्ट करवाने के लिए आया था, लेकिन भीषण गर्मी में काफी निराशा मिली है। त्रिकुटा नगर निवासी पूजा बच्चे को दिखाने आई थी, लेकिन इलाज नहीं पर निराश हुईं। गर्भवती कोमल भी इलाज न मिलने से परेशान रहीं। ओपीडी परिसर के बाहर तेज धूप में बैठकर वह पर्ची मिलने का इंतजार करती रहीं, लेकिन हड़ताल के कारण निराश होकर लौटना पड़ा। हालांकि गंभीर मरीजों को इमरजेंसी में देखा गया।
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गांधीनगर अस्पताल की ओपीडी परिसर में मायूस होकर बैठी कठुआ के चढ़वाल निवासी बुजुर्ग कांता देवी ने बताया कि वह आंख और दिमाग का इलाज करवा रही है और सोमवार को जांच करवानी थी। लेकिन अस्पताल पहुंचने पर बताया गया कि ओपीडी बंद है। कर्मचारी हड़ताल पर हैं। इतनी दूर से आने के बावजूद इलाज से महरूम रहना पड़ा है। सरकार को हड़ताल के दौरान मरीजों के लिए उचित वैकल्पिक व्यवस्थाएं करनी चाहिए थीं।
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खुदवाल, चट्ठा निवासी रजनी बच्ची को दिखाने आई थी, लेकिन पर्ची नहीं मिलने पर परेशान दिखाई दी। अस्पताल प्रशासन की ओर से बस हड़ताल की जानकारी दी जा रही थी। उसने बताया कि बच्ची को डाक्टर को दिखाने के बिना लौटना पड़ रहा है। डिग्याना से अस्पताल में अपनी मां को दिखाने आए सुखदेव ने बताया कि उन्हें किसी तरह से अस्पताल लेकर आए थे, लेकिन डॉक्टर की सुविधा नहीं मिली है। हड़ताल के बारे में जानकारी नहीं थी। सांबा निवासी रमेश कुमार को निजी अस्पताल में पेट से पाइप निकालने के लिए ऑपरेशन से पहले रैपिड कोविड टेस्ट की जरूरत थी, लेकिन हड़ताल के कारण टेस्ट नहीं हुआ। हो पाया। उसने बताया कि वह सांबा से टेस्ट करवाने के लिए आया था, लेकिन भीषण गर्मी में काफी निराशा मिली है। त्रिकुटा नगर निवासी पूजा बच्चे को दिखाने आई थी, लेकिन इलाज नहीं पर निराश हुईं। गर्भवती कोमल भी इलाज न मिलने से परेशान रहीं। ओपीडी परिसर के बाहर तेज धूप में बैठकर वह पर्ची मिलने का इंतजार करती रहीं, लेकिन हड़ताल के कारण निराश होकर लौटना पड़ा। हालांकि गंभीर मरीजों को इमरजेंसी में देखा गया।
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