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रियासती झंडे का केस श्रीनगर स्थानांतरित करने से इंकार
जेएनएफ/जम्मू
Updated Fri, 12 Feb 2016 11:01 PM IST
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रियासती झंडा फहराने और राज्यपाल के स्थान पर सदर-ए-रियासत पद करने के संबंध में रिट कोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका को हाईकोर्ट ने श्रीनगर स्थानांतरित करने से इंकार कर दिया है।
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पूर्व आईजीपी और भाजपा के जनरल सेक्रेटरी फारूक खान की ओर से रिट कोर्ट के खिलाफ दायर याचिका पर अब्दुल क्यूम ने स्थानांतरण आवेदन कर अदालत से केस की सुनवाई श्रीनगर स्थानांतरित करने की अपील की थी।
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मुख्य न्यायाधीश एन पाल वसंथाकुमार ने स्थानांतरण आवेदन दायर करने वाले शख्स की दलील सुनी और आवेदन को खारिज कर दिया।
सुनवाई के दौरान स्थानांतरण आवेदन में मुख्य न्यायाधीश ने पाया कि एलपीए हाईकोर्ट के श्रीनगर विंग में दायर की गई। आवेदक का कहना है कि इसलिए एलपीए को श्रीनगर स्थानांतरित कर उसकी सुनवाई की जानी चाहिए, क्योंकि आवेदक श्रीनगर का रहने वाला है और उसके लिए जम्मू में आकर केस लड़ना संभव नहीं होगा।
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साथ ही इस मामले में व्यवहारिक रूप से उचित कानूनी सेवा पाना असंभव होगा। आवेदक स्थानांतरण अपील दायर करने के लिए स्वयं अदालत में उपस्थित हुआ और खुद ही अपना तर्क भी रखा। अपील में कहा गया कि मामले की सुनवाई के लिए जम्मू में वैसा वातावरण नहीं है और इस अदालत के समक्ष कोई प्रमाण भी नहीं रखे गए हैं।
अदालत ने कहा कि यह आशंका काल्पनिक है। इसके अलावा याचिकाकर्ता को मदद के लिए बड़ी संख्या में वकील चाहिए, जो जम्मू में उपलब्ध हैं। रिट कोर्ट के खिलाफ अपील जम्मू के निवासी ने दायर की है।
यदि याचिकाकर्ता के स्थानांतरण आवेदन को स्वीकार किया जाता है तो यह अपील दायर करने वाले के अधिकार पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। अपील को पहले ही जम्मू में दायर करने की अनुमति दे दी गई है और इसकी सुनवाई हाईकोर्ट की जम्मू विंग की खंडपीठ कर रही है।
याचिकाकर्ता ने बड़े अच्छे तरीके से हाईकोर्ट की जम्मू विंग में एलपीए दायर की है। तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए मुख्य न्यायाधीश ने स्थानांतरण आवेदन को खारिज कर दिया।