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राष्ट्रपति ने कहा: हिंसा कभी 'कश्मीरियत' का हिस्सा नहीं रही, कवयित्री लल्लेश्वरी की कृतियों का किया जिक्र
Tue, 27 Jul 2021 02:37 PM IST
प्रशांत कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Tue, 27 Jul 2021 02:37 PM IST
सार
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दीक्षांत समारोह में युवा पीढ़ी से समृद्ध विरासत से सीखने का आग्रह किया। राष्ट्रपति ने कहा कि कश्मीर सांप्रदायिक सद्भाव और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का खाका कैसे पेश करता इसके लिए युवाओं को साहित्य से रूबरू होना चाहिए। कश्मीर देश का गौरव है। देश आशा भरी नजरों से यहां के युवाओं की ओर देख रहा है। यहां के युवाओं के सपने शीघ्र सच होंगे।
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
कश्मीर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने मंगलवार को कहा कि हिंसा कभी भी 'कश्मीरियत' का हिस्सा नहीं रही। यह दुर्भाग्यपूर्ण था कि शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की इस उत्कृष्ट परंपरा को तोड़ा गया। हिंसा एक वायरस की तरह है, जो शरीर पर हमला करता है। मेरा दृढ़ विश्वास है कि लोकतंत्र में सभी मतभेदों को समेटने की क्षमता है। कश्मीर खुशी से पहले से ही इस दृष्टिकोण को साकार कर रहा है।
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कश्मीर की खोई हुई महिमा को पुनः प्राप्त करने के लिए एक नई शुरुआत और दृढ़ प्रयास है। कश्मीर विभिन्न संस्कृतियों का मिलन स्थल है। राष्ट्रपति ने कहा कि कश्मीर में सभी धर्मों ने कश्मीरियत की अनूठी विशेषता को अपनाया। समुदायों के बीच सहिष्णुता और आपसी स्वीकृति को प्रोत्साहित किया।
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मैं इस अवसर पर कश्मीर की युवा पीढ़ी से उनकी समृद्ध विरासत से सीखने का आग्रह करता हूं। उनके पास यह जानने का हर कारण है कि कश्मीर हमेशा शेष भारत के लिए आशा की किरण रहा है। इसके आध्यात्मिक और सांस्कृतिक प्रभाव की छाप पूरे देश में है।
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कश्मीर की कवयित्री का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा कि लल्लेश्वरी की कृतियों में आप देख सकते हैं कि कैसे कश्मीर सांप्रदायिक सद्भाव और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व का खाका पेश करता है।
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