जम्मू-कश्मीर: राष्ट्रपति ने लेह में सिंधु तट पर की सिंधु दर्शन पूजा, द्रास में जवानों के साथ मनाएंगे दशहरा
सिंधु तट पहुंचने पर परंपरागत संगीत के माध्यम से राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को लद्दाखी सम्मान दिया गया। सिंधु दर्शन पूजा से पहले उप-राज्यपाल आरके माथुर ने उनके साथ केंद्र शासित प्रदेश के विकास कार्यों पर चर्चा की। बताया कि लद्दाख में कई केंद्रीय परियोजनाएं चल रही हैं।
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राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने गुरुवार को लेह के सिंधु घाट पर सिंधु दर्शन पूजा की। इस दौरान पूरे विश्व में शांति, समृद्धि की कामना की गई। साथ ही लोगों के बेहतर स्वास्थ्य की भी प्रार्थना की। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के दो दिवसीय दौरे पर सुबह लेह हवाई अड्डे पहुंचने पर राष्ट्रपति का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। उनके साथ उनकी पुत्री स्वाति कोविंद भी हैं।
सिंधु घाट पहुंचने पर परंपरागत संगीत के माध्यम से उन्हें लद्दाखी सम्मान दिया गया। सीईसी ताशी ग्यालसोन ने उन्हें पारंपरिक खतक तथा उप-राज्यपाल ने स्मृति चिह्न प्रदान किया। स्कूली छात्रों की ओर से प्रस्तुत राष्ट्रभक्ति पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम से अभिभूत हो उन्हें उन्हें राष्ट्रपति भवन आने का न्योता दिया।
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सिंधु दर्शन पूजा से पहले उप-राज्यपाल आरके माथुर ने उनके साथ केंद्र शासित प्रदेश के विकास कार्यों पर चर्चा की। बताया कि लद्दाख में कई केंद्रीय परियोजनाएं चल रही हैं। समय से काम को पूरा करने की दिशा में काम चल रहा है। लेह एयरपोर्ट पर उप राज्यपाल, सीईसी के साथ सांसद टी शेरिंग नामग्याल, उत्तरी कमान प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी, फायर एंड फ्यूरी कोर के जीओसी लेफ्टिनेंट जनरल पीकेजी मेनन, उप वायु सेना प्रमुख तेजिंदर सिंह, लेह एयर स्टेशन के एयर कमाडोर सुब्रतो कुंडू, लद्दाख एडीजीपी एसएस खंदारे समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। लेह में सिंधु दर्शन कार्यक्रम में शामिल होने के बाद राष्ट्रपति उधमपुर स्थित उत्तरी कमान मुख्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने जवानों के साथ मिलकर उनका हौसला बढ़ाया।
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राष्ट्रपति ने लद्दाख के उप-राज्यपाल को केंद्र शासित प्रदेश में अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक वन निवासियों को (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम, 2006 के तहत शक्तियों और निर्वहन कार्यों का प्रयोग करने का अधिकार दिया है।
द्रास में जवानों के साथ दशहरा मनाएंगे, करेंगे शस्त्र पूजा
राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद शुक्रवार को दशहरा पर्व लद्दाख के द्रास में सैन्य जवानों के साथ मनाएंगे। विजयदशमी पर आयोजित शस्त्र पूजन में भी हिस्सा लेंगे। साथ ही जवानों के साथ संवाद स्थापित कर उनका हौसला बढ़ाएंगे। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की ओर से उन्हें कारगिल युद्ध के बारेम में जानकारी दी जाएगी। राष्ट्रपति आम तौर पर नई दिल्ली में ही दशहरा समारोह में हिस्सा लेते रहे हैं, लेकिन इस बार द्रास में सैन्य जवानों के साथ दशहरा मनाकर उनका मनोबल बढ़ाने का फैसला लिया है।