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84 साल में एक भी नोबेलिस्ट नहीं बना सके विश्वविद्यालय

Mon, 01 Sep 2014 11:20 PM IST
Updated Mon, 01 Sep 2014 11:20 PM IST
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president pranab mukherjee in jammu university 14th convocation

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी उच्च शिक्षा की हालत पर बेहद चिंतित हैं। जम्मू विश्वविद्यालय के 14वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा के सामने आज बड़ी चुनौतियां हैं। देश में 723 विश्वविद्यालय हैं। लेकिन, दुनिया के टाप 200 विश्वविद्यालयों में देश का एक भी विश्वविद्यालय नहीं है।

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1930 में कोलकाता विश्वविद्यालय में भौतिकी के शोध पर सीवी रमन को नोबेल पुरस्कार मिला था। उसके बाद किसी भी भारतीय विश्वविद्यालय को यह गौरव हासिल नहीं हो सका।
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84 साल में हम एक नोबेलिस्ट नहीं बना पाए। बाद के दिनों में जिन भारतीय मूल के लोगों को नोबेल पुरस्कार मिले, उनके ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन भले ही भारत में हुए हों, लेकिन, उन्हें सम्मान  विदेशों में किए गए शोध के लिए हासिल हुए।

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'रिसर्च और इनोवेशन पर जोर दिया जाए'

president pranab mukherjee in jammu university 14th convocation

राष्ट्रपति ने कहा कि आज जरूरत है कि विश्वविद्यालय नई खोज (इनोवेशन) के ड्राइवर बनें। उद्योग जगत और सरकार से उनका रिश्ता सहभागिता भरा होना चाहिए। विश्वविद्यालयों में उद्यमी गतिविधियों के कई रूप हो सकते हैं।

यह कानट्रैक्ट रिसर्च, कंसल्टेंसी, पेटेंटिंग, लाइसेंसिंग, स्पिन आउटस, स्टार्ट अप, इनक्यूबेटिंग कंपनीज के रूप में सामने आ सकता है। यह जरूरी है कि विश्वविद्यालय छात्रों और शिक्षाविदों में उद्यमिता का विकास करें। उन्होंने कहा कि 2010 से 2020 की इनोवेशन दशक के रूप में घोषणा हुई है।

देश की एसटीआई (साइंस, टेक्नालाजी और इनोवेशन) नीति में रिसर्च और विकास के जरिए इनोवेशन पर जोर दिया गया है। इसमें निजी क्षेत्र की सहभागिता, अधिक से अधिक रिसर्च पेपर का प्रकाशन और वैश्विक सहयोग हासिल करने की बात शामिल है।

'1800 साल तक दुनिया का नेता रहा भारत'

president pranab mukherjee in jammu university 14th convocation

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत छठी शताब्दी से 1800 साल तक दुनिया में उच्च शिक्षा क्षेत्र में सबका नेता रहा है। तक्षशिला के दौर से लेकर नालंदा और विक्रमशिला तक हमने दुनिया को उच्च शिक्षा में महारत हासिल करने में मदद की। लेकिन, अब क्या हो गया? क्या हमारे शिक्षकों और छात्रों के स्तर में गिरावट आई है?

भारतीय मूल के अमर्त्य सेन, हर गोविन्द खुराना, चंद्रशेखर और सुब्रहमण्यम को नोबेल पुरस्कार मिले, लेकिन, वह विदेशों में किए गए शोध पर आधारित थे। हमारे यहां प्रतिभा की कमी नहीं है। सही माहौल बनाने की जरूरत है।

हालांकि, अब मुंबई, दिल्ली और मद्रास के आईआईटी ने दुनिया के 15 टाप संस्थानों में स्थान पाया है लेकिन यह सेक्टर में हासिल की गई उपलब्धि है। दीक्षांत समारोह को गवर्नर और चांसलर एनएन वोहरा, प्रो वाइस चांसलर और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और कुलपति एम एल इस्सर ने भी संबोधित किया।

विकास को गति देने के लिहाज से हों रिसर्च

president pranab mukherjee in jammu university 14th convocation

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि विश्वविद्यालयों को ऐसे रिसर्च पर जोर देना चाहिए जो विकास को गति देने के साथ समस्याओं का समाधान खोज सकें। जम्मू विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि 12वीं योजना में उच्च शिक्षा को प्राथमिकता दी गई है। यह विकास के महत्वपूर्ण माध्यम बन सकता है। इसमें विस्तार, एक्सलेंस और इक्विटी पर जोर है।

उच्च शिक्षा की 96 प्रतिशत क्षमता राज्य स्तरीय संस्थानों में निहित है इसलिए इनमें गुणात्मक सुधार जरूरी है। राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान इस मामले में अच्छी पहल है। उन्होंने कहा कि मेटा यूनिवर्सिटी एक महत्वपूर्ण कदम है जो उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बदलाव के क्षेत्र में ध्यान खींच रहा है। छात्रों को पूरी फेलेक्सबिलिटी दी जानी चाहिए, साथ ही विशेषज्ञता और इंफ्रास्ट्रक्चर की सुविधा भी जरूरी है। जम्मू विश्वविद्यालय के मैनेजमेंट प्रोग्राम में नामांकन के बाद छात्रों को माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय कटड़ा में फिलास्फी में कोर्स करने की सुविधा मिलनी चाहिए।

इस तरह के लचीलेपन से बेहतर माहौल बनाया जा सकेगा। इससे तकनीकी के बेहतर उपयोग में भी आसानी होगी। विश्वविद्यालयों में इस प्रकार का इंटर लिंक जरूरी है। इससे इनोवेशन को बढ़ावा मिलेगा और यह विश्वविद्यालय की तीसरी धुरी हो सकती है। पहली और दूसरी धुरी शिक्षण और रिसर्च है। पूरी दुनिया में उद्यमिता और और शिक्षा के बीच रिश्ते को जरूरी समझा गया है।

राष्ट्रपति ने की जम्मू विवि की सराहना

president pranab mukherjee in jammu university 14th convocation

जम्मू कश्मीर नालेज हब के रूप में विकसित हो रहा है। नौ विश्वविद्यालय हैं और 300 मान्यता प्राप्त कालेज। इनमें रिसर्च को बढ़ाना होगा। जम्मू विश्वविद्यालय को रिसर्च कलस्टर विकसित करना चाहिए ताकि रिसर्च का विकास हो। रिसर्च में स्थानीय और क्षेत्रीय जरुरतों को ध्यान में रखा जाना जरूरी है। उद्योगों और रिसर्च संगठनों के बीच तालमेल बनाना होगा। हार्टिकलचर, फ्लोरीकलचर, भूमि डायानामिक्स, सिमोलाजी, आर्गेनिक फार्मिंग, टूरिज्म, कीमती रत्न, हेण्डीक्राफ्ट्स के क्षेत्र में रिसर्च पर ज्यादा ध्यान देने की जरुरत है।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी उम्मीद जताई है कि आने वाले दिनों में जम्मू विश्वविद्यालय रिसर्च और इनोवेशन के क्षेत्र में विश्व स्तरीय स्थान हासिल करेगा और इसके लिए जरूरी इको सिस्टम भी विकसित करेगा। उन्होंने महात्मा गांधी के कथन को दोहराते हुए कहा कि सार्वजनिक जीवन में प्रवेस करने वाले छात्रों में जिम्मेदारी का बोध होना चाहिए। राष्ट्रपति ने कहा कि जम्मू विश्वविद्यालय ने हाल के दिनों में कई उल्लेखनीय कार्य किए हैं। साइंस कांग्रेस का आयोजन हुआ। विश्वविद्यालय विश्व स्तरीय रिसर्च में शामिल है जो जेनेवा के यूरोपियन काउंसिल फार न्यूक्लीयर रिसर्च में हो रहा है।

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