बढ़ती ठंड के साथ बढ़ी बिजली संकट के गहराने की आशंका
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सर्द मौसम में पानी की कमी के कारण बिजली बनाना फिर मुश्किल हो गया है। दिसंबर में पारा शून्य से लगातार नीचे रहने से जल स्रोत जमने लगे हैं। इसका सीधा असर बिजली उत्पादन पर पड़ रहा है। रियासत में ज्यादातर पनबिजली परियोजनाएं हांफने लगी हैं।
रोजाना बिजली तैयार करने की औसत में तेजी से गिरावट आ रही है। प्रचंड सर्दी के दो महीनों में यह आंकड़ा एक तिहाई तक सिमटता है जिसकी वजह से इस साल भी बिजली संकट का खड़ा होना तय है।
सर्द मौसम का असर न सिर्फ रियासत की बिजली खपत बल्कि उन बाहरी राज्यों पर पड़ना शुरू हो गया है, जहां पर रियासत से बिजली सप्लाई की जाती है। राज्य में बिजली उत्पादन के क्षेत्र में नेशनल हाईड्रो इलेक्ट्रिक पॉवर कारपोरेशन (एनएचपीसी) अग्रणी एजेंसी हैं।
बिजली उत्पादन की 18 में से 7 परियोजना जम्मू कश्मीर में
एनएचपीसी की देश में कुल 18 परियोजनाएं चल रही हैं जिनमें से 7 परियोजनाएं जम्मू-कश्मीर में हैं। इसी तरह से जम्मू-कश्मीर स्टेट पॉवर डेवलपमेंट कारपोरेशन (जेकेएसपीडीसी) के अधीन कई परियोजनाएं चल रही हैं। गरमी के सीजन में रियासत से रोजाना 3.5 करोड़ यूनिट बिजली तैयार होती है।
यह आंकड़ा वर्तमान में तेजी से गिर रहा है। एनएचपीसी के एक वरिष्ठ अफसर ने बताया कि 35 मिलियन यूनिट तैयार करने की क्षमता 12 से 13 मिलियन तक सिमट रही है। दिसंबर और जनवरी महीने में चूंकि सर्दी अपने चरम पर होती है, इससे नदियों में पानी का स्तर कम हो जाता है।
नतीजतन बिजली परियोजनाओं की सभी टरबाइनें चलाना मुमकिन नहीं हो पाता है। हालांकि, दो महीने बाद हालात अपने सामान्य ढर्रे पर आ जाते हैं। जेकेएसपीडीसी के एक अधिकारी ने बताया कि हर साल यह हालात बनते हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए थर्मल पॉवर प्रोजेक्ट विचाराधीन है।
लद्दाख में अंडर करंट से ही चल रहा काम
हालांकि परियोजनाओं की क्षमता 89 मेगावाट है। ट्रांस्मिशन लाइन की सुविधा नहीं होने की वजह से केवल स्थानीय मांग के अनुसार ही बिजली तैयार होती है। वर्तमान में नदियों की सतह पूरी तरह से जम चुकी है लेकिन बर्फ की मोटी सतह के नीचे चलने वाले पानी के अंडर करंट से बिजली तैयार हो रही है।
एनएचपीसी की सात परियोजनाओं से तैयार होने वाली कुल 2009 मेगावाट बिजली का 40 फीसदी हिस्सा राज्य में सप्लाई होता है और शेष राजस्थान, हिमाचल, दिल्ली सहित सात राज्यों में इसकी सप्लाई की जाती है। उत्पादन में गिरावट से रियासत के साथ ही अन्य राज्यों की आपूर्ति भी प्रभावित होती है।