नई व्यवस्था: जम्मू-कश्मीर में अब डाकिया घर-घर पहुंचाएंगे बिजली का बिल, उपभोक्ता ऑनलाइन कर सकेंगे भुगतान
अधिकारियों के मुताबिक कोई उपभोक्ता डाकिए को बिल नहीं देना चाहता है तो वह क्यूआर कोड को स्कैन करके भुगतान कर सकेगा। जम्मू कश्मीर में 22 से 25 लाख बिजली कनेक्शन हैं।
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जम्मू कश्मीर में अब बिजली बिल मीटर रीडर लेकर नहीं आएगा। डाक विभाग के जरिए डाकिया बिल लेकर आएगा और डाकिए के पास बिल भी जमा करा सकेंगे। यहीं नहीं, बिल पर क्यूआर कोड भी होगा। जिसको स्कैन करके भी भुगतान किया जा सकेगा। अगले महीने से यह सुविधा जम्मू शहर से शुरू हो जाएगी।
इसके बाद धीरे-धीरे पूरे प्रदेश में यह सेवा शुरू होगी। इसके लिए अगले चार से पांच महीने लग सकते हैं। इस सुविधा से बिजली विभाग के 1400 से 1500 मुलाजिम भी बिजली बिल बांटने से मुक्त हो जाएंगे और इनका इस्तेमाल विभाग बिजली ढांचे की मरम्मत में कर सकेंगे।
मौजूदा समय में बिजली बिलों के भुगतान जम्मू कश्मीर बैंक के माध्यम से होते हैं। लोगों को पास की शाखाओं में जाकर बिल जमा कराना पड़ता है। लेकिन अब उनके घर पर डाकिया बिल लेकर आएगा और उसके पास ही भुगतान का विकल्प रहेगा।
अगर कोई डाकिए के पास बिल नहीं देना चाहता तो उसके पास बिल पर दिए गए क्यूआर कोड का विकल्प भी होगा। वह कोड को स्कैन करके भुगतान कर सकेगा। जानकारी के अनुसार जम्मू कश्मीर में 22 से 25 लाख बिजली कनेक्शन हैं।
न बिल देर से मिलने का बहाना, न छेड़छाड़
अकसर लोगों की शिकायत रहती है कि बिजली के बिल समय पर नहीं मिलते। इस सेवा से बिल समय पर मिलेंगे और उनके पास समय पर बिल मिलने के साथ समय पर भुगतान करने का अवसर भी होगा। जबकि मीटर से कोई छेड़छाड़ भी नहीं कर सकेगा।
जितनी बिजली का इस्तेमाल किया होगा। उसके हिसाब से कंप्यूटर से बिल बनेगा और डाक विभाग के पास पहुंचेगा। यहां से विभाग अपने डाकियों के जरिए उपभोक्ताओं के घर पहुंचा सकेगा। बिजली विभाग की यह पहल लाेगों के लिए बड़ी राहत दे सकती है।
जम्मू में एक महीने में शुरू कर देंगे सुविधा
इस योजना का खाका तैयार कर लिया गया है। अब तक यह सेवा शुरू हो जानी थी। डाक विभाग के स्तर पर कुछ देरी हुई है। लेकिन अब तमाम बंदोबस्त हो गए हैं। एक महीने के भीतर पहले जम्मू शहर में इस सुविधा को शुरू करेंगे। इसके बाद धीरे धीरे चार से पांच महीनों के भीतर पूरे प्रदेश में इसी तरह से बिजली बिल जाएंगे। इससे हमारे बिल बांंटने वाले 1400 से 1500 मुलाजिम भी फ्री हो जाएंगे और उनका इस्तेमाल हम बिजली ढांचे की मरम्मत और मैंटेनेंस में कर सकेंगे। -अनंत तयाल, एमडी, जेपीडीसीएल