बाढ़ पीड़ितों की राहत सामग्री भी खा गए मंत्रियों के चहेते
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उधर पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने आरोप लगाया है कि राहत सामग्रियों की बंदरबांट में नेकां और कांग्रेस दोनों दलों के मंत्री शामिल रहे हैं। जिसकी लाठी, उसकी भैंस वाली स्थिति बन गई है।
रियासत सरकार ने पीड़ितों के बीच 50 किलोग्राम अनाज देने का वादा किया था लेकिन धरातल पर यह वितरण नजर नहीं आ रहा है। मंत्री अपने इलाकों में चहेतों के बीच राहत पहुंचा रहे हैं।
लोकसभा चुनाव के बाद से ही नेकां के कार्यकर्ता हताश हैं। अब राहत सामग्रियों के बहाने उनमें ऊर्जा भरने की कोशिश हो रही है। सिर्फ श्रीनगर ही नहीं कुलगाम, पुलवामा और अनंतनाग में भी राहत सामग्रियों के वितरण में धांधली हो रही है।
'गड़बड़ियों के पर्दाफाश का ऐलान'
बाढ़ पीड़ितों के बीच राहत सामग्रियों के वितरण में बंदरबांट के मामले के तूल पकड़ लिया है। विपक्षी दलों ने मंत्रियों पर अपने इलाकों में चहेतों को अधिक फायदा देने और जरुरतमंदों की उपेक्षा का आरोप लगाया है।
रियासत सरकार ऐसे आरोपों को सिरे से खारिज कर रही है। उधर हुर्रियत ने आम लोगों की शिकायतों के मद्देनजर विशेष सेल का गठन कर गड़बड़ियों के पर्दाफाश का ऐलान किया है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित पैनल की प्रारंभिक जांच में कुछ इलाकों में गड़बड़ियों की पुष्टि के बाद रियासत सरकार बचाव की मुद्रा में आ गई है। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला राहत कार्यो की समीक्षा के लिए प्रतिदिन दो बैठकें कर रहे हैं।
अंतरिम रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी गई
गौरतलब है कि बाढ़ का पानी उतरने के बाद से ही पीड़ित राहत समाग्री नहीं मिलने की शिकायतें कर रहे हैं। इस बाबत सुप्रीम कोर्ट ने चार सदस्यीय पैनल गठित कर धरातल पर स्थिति का अध्ययन कराया है। सूत्रों के मुताबिक इस पैनल ने अंतरिम रिपोर्ट में भेदभाव बरते जाने की पुष्टि की है।
उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल सुरेश कुमार की अध्यक्षता वाले इस पैनल में रियासत के राजस्व, राहत और पुनर्वास सचिव भी सदस्य हैं।
रियासत सरकार चाहती थी कि इस पैनल द्वारा रिपोर्ट पेश किए जाने से पूर्व कुछ और इलाकों में भी जांच की जाए लेकिन पैनल के चेयरमैन ने इससे इनकार कर दिया। इससे पैदा हुई जिच के बाद राहत और पुनर्वास सचिव के हस्ताक्षर के बगैर ही अंतरिम रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी गई है।
मुफ्त राशन देने के संकल्प पर कायम सरकार
हालात की गंभीरता के मद्देनजर मुख्यमंत्री के आदेश पर ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री अली मोहम्मद सागर ने रविवार को श्रीनगर के बाढ़ पीड़ित इलाकों का दौरा कर राहत कार्यों का जायजा लिया।
शिवपुरा, इंदिरानगर, राजबाग इलाकों में राहत सामग्रियों की बंदरबांट के आरोप थे। मंत्री ने कहा कि बाढ़ पीड़ितों को तीन माह तक मुफ्त राशन देने के संकल्प पर सरकार कायम है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग राहत के नाम पर राजनीति कर रहे हैं।
चुनाव के मद्देनजर सियासत हो रही है। सरकार सभी पीड़ितों के बीच समान तरीके से सुविधाएं पहुंचाने की व्यवस्था कर रही है और मुख्यमंत्री इसकी निगरानी कर रहे हैं।