कश्मीरी पंडितों की घर वापसी को लगा 'ग्रहण'
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पनुन कश्मीर ने झेलम के उत्तर और पूर्व क्षेत्र में कश्मीरी पंडितों के लिए होमलैंड स्थापित करने की मांग की है। संगठन के प्रमुख अश्विनी कुमार चरंगू का कहना है कि 25 साल पहले इसका प्रस्ताव पास किया गया था। सेटेलाइट टाउनशिप कश्मीरी पंडितों की सांकेतिक वापसी होगी।
अलगाववादी कश्मीरी पंडितों की वापसी का इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि उन्हें घाटी में इस्लामीकरण को चुनौती का खतरा उत्पन्न होता नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि एक आयोग का गठन किया जाना चाहिए जिसमें कश्मीरी पंडित समुदाय के भी प्रतिनिधि हों।
यह था सीएमपी का मुद्दा
सीएमपी में कहा गया है कि कश्मीरी विस्थापितों को अपने घर पूरे सम्मान के साथ भेजने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे। इसके साथ ही 1947, 1965 और 1971 के पीओके रिफ्यूजियों के वन टाइम सेटलमेंट की दिशा में भी कदम उठाए जाएंगे।
पहले भी किरकिरी झेल चुकी है भाजपा
कश्मीरी
पंडितों की घर वापसी पर उठा बवंडर आसानी से थमता नहीं दिखता। मुख्यमंत्री
मुफ्ती मोहम्मद सईद बार-बार दोहरा रहे हैं कि इनके लिए अलग टाउनशिप नहीं
बनेगी। इस बीच, घाटी में हिंसक प्रदर्शन भी शुरू हो गए। भाजपा-पीडीपी
गठबंधन सरकार के न्यूनतम साझा कार्यक्रम (सीएमपी) में कश्मीरी पंडितों की
ससम्मान वापसी और पीओके रिफ्यूजियों का सेटलमेंट प्रमुख मुद्दा रहा।
अब
सीएमपी से अलग मुफ्ती के रवैये से भाजपा हतप्रभ है। दोनों दलों में तनातनी
बढ़ने के आसार हैं। अलगाववादी और घाटी आधारित पार्टियां टाउनशिप के विरोध
में हैं तो भाजपा खम ठोंककर खड़ी है। कांग्रेस चुप है। अलगाववादी मसर्रत
आलम की रिहाई पर किरकिरी झेल चुकी भाजपा को फिर ऐसे ही हालात पैदा होते नजर
आ रहे हैं।
पार्टी के कई नेताओं का मानना है कि यदि सेटेलाइट
टाउनशिप नहीं बनती है तो पार्टी को इसका खामियाजा भुगतना होगा। कश्मीरी
पंडितों का मानना है कि सियासत शुरू हो जाने से उनके पुनर्वास पर ग्रहण लग
सकता है।