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सांसदों की सुरक्षा गृहमंत्री की जिम्मेदारी : डॉ. अब्दुल्ला
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लखनपुर। कठुआ के लखनपुर पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि संसद की सुरक्षा में हुई चूक गृह मंत्रालय की कार्यप्रणाली पर सवाल हैं। सब (सांसदों) की सुरक्षा गृह मंत्री की जिम्मेदारी है और हमने सिर्फ यही सवाल किया था। हमें बाहर कर दिया गया जो कि बहुत गलत है।
पूर्व मुख्यमंत्री दिल्ली से लौटते वक्त लखनपुर में अपने समर्थकों से मिलने के लिए रुके। यहां उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि आज संसद में कई जरूरी बिल पास हो रहे हैं लेकिन विपक्ष के सांसद बाहर हैं। ऐसे में विपक्ष के साथ क्या किया जा रहा है, वह देश के सामने है। संसद में सुरक्षा चूक पर उन्होंने कहा कि जब वे लोग अंदर आए, उनके पास बम भी हो सकते थे। भगवान की कृपा से सब ठीक है लेकिन गृहमंत्री को इसका जवाब देना चाहिए। वहीं, सुप्रीम कोर्ट द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. अब्दुल्ला ने कहा कि जो फैसला आया है, वह जम्मू-कश्मीर की लोगों के हित में नहीं है। इस पर पुनर्विचार याचिका दायर करने पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर को इसी वक्त राज्य का दर्जा देना चाहिए था और चुनाव करवाए जाने चाहिए थे लेकिन सरकार के दबाव में उन्हें समय दिया गया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता इसका जवाब जरूर देगी। डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने बताया कि 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी लेकिन उन्हें खेद है कि उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया है कि जब भी जम्मू-कश्मीर में चुनाव होंगे, तब नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार होगी और लोगों के जितने भी मसले उलझे हुए हैं, उन्हें सुलझाया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार जम्मू कश्मीर में आतंकवाद को खत्म नहीं कर पाई। आज भी निहत्थे लोगों को मारा जा रहा है। सुरक्षाबलों को निशाना बनाया जा रहा है, जो कि बेहद दुखद है। करीब आधा घंटा लखनपुर में रुकने के बाद वह जम्मू की ओर रवाना हो गए।
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पूर्व मुख्यमंत्री दिल्ली से लौटते वक्त लखनपुर में अपने समर्थकों से मिलने के लिए रुके। यहां उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि आज संसद में कई जरूरी बिल पास हो रहे हैं लेकिन विपक्ष के सांसद बाहर हैं। ऐसे में विपक्ष के साथ क्या किया जा रहा है, वह देश के सामने है। संसद में सुरक्षा चूक पर उन्होंने कहा कि जब वे लोग अंदर आए, उनके पास बम भी हो सकते थे। भगवान की कृपा से सब ठीक है लेकिन गृहमंत्री को इसका जवाब देना चाहिए। वहीं, सुप्रीम कोर्ट द्वारा जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए डॉ. अब्दुल्ला ने कहा कि जो फैसला आया है, वह जम्मू-कश्मीर की लोगों के हित में नहीं है। इस पर पुनर्विचार याचिका दायर करने पर विचार-विमर्श किया जा रहा है। जम्मू-कश्मीर को इसी वक्त राज्य का दर्जा देना चाहिए था और चुनाव करवाए जाने चाहिए थे लेकिन सरकार के दबाव में उन्हें समय दिया गया। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता इसका जवाब जरूर देगी। डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने बताया कि 22 जनवरी को अयोध्या में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी लेकिन उन्हें खेद है कि उन्हें आमंत्रित नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया है कि जब भी जम्मू-कश्मीर में चुनाव होंगे, तब नेशनल कॉन्फ्रेंस की सरकार होगी और लोगों के जितने भी मसले उलझे हुए हैं, उन्हें सुलझाया जाएगा। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार जम्मू कश्मीर में आतंकवाद को खत्म नहीं कर पाई। आज भी निहत्थे लोगों को मारा जा रहा है। सुरक्षाबलों को निशाना बनाया जा रहा है, जो कि बेहद दुखद है। करीब आधा घंटा लखनपुर में रुकने के बाद वह जम्मू की ओर रवाना हो गए।
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