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सदन में बेअंदाजी, नियमों का उल्लंघन करने की इजाजत किसी को नहीं : राथर
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विधानसभा अध्यक्ष ने सत्र से पहले याद दिलाए नियम
महबूबा मुफ्ती के मार्शल लाॅ वाले बयान पर कहा-उन्हें कोई गलत सलाह दे रहा
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले इसके सुचारू संचालन की कवायद में जुटे अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने इस बात पर चिंता जताई है कि कुछ लोग इसकी अहमियत नहीं समझ पाते और कार्यवाही को बाधित करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने मंगलवार को मीडिया कर्मियों के साथ बातचीत में कहा कि सदन में बेअंदाजी और नियमों का उल्लंघन करने की इजाजत किसी को नहीं।
अध्यक्ष ने कहा कि इतने लंबे वक्त के बाद सदन होने जा रहा है। जरूरी है कि आवाम से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो, न कि सदन की कार्यवाही में बाधा डालकर जनता के मुद्दों को नजरअंदाज किया जाए। सदन को हंगामे की भेंट चढ़ने नहीं दे सकते हैं।
उन्होंने ये भी कहा कि इन दिनों एक बहस छिड़ी है। पीडीपी प्रमुख ने यहां तक कह दिया कि मैं मार्शल ला की हिमायत कर रहा हूं। मुझे दुख है कि महबूबा मुफ्ती एसा कह रही हैं। उन्हें गलत सलाह दी जा रही है। नोटिस के प्रचार को लेकर मैंने जो कुछ कहा है, वो नियमों के तहत कहा है। मैं फिर से यह दोहराता हूं कि सदन के नियमों और परंपराओं के अनुसार किसी भी सदस्य या अन्य व्यक्ति द्वारा नोटिस को तब तक प्रचारित नहीं किया जाएगा जब तक कि उसे स्वीकार न कर लिया जाए। राथर मंगलवार को अपने कार्यालय में मीडिया कर्मियों से मुखातिब थे। उन्होंने आगामी सदन की कार्यवाही को लेकर कहा कि किसी भी कीमत पर किसी की बेअंदाजी नहीं चलेगी।
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कार्य संचालन के नियम 368 और 334-ए को समझाया
अध्यक्ष ने कहा कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियमों के नियम 368 में प्रावधान है कि किसी भी सदस्य या अन्य व्यक्ति द्वारा नोटिस को तब तक प्रचारित नहीं किया जाएगा जब तक कि उसे अध्यक्ष स्वीकार न कर ले। इसी तरह किसी प्रश्न के नोटिस को तब तक पब्लिक में नहीं लाया जा सकता है, जब तक कि सदन में उस प्रश्न का उत्तर न दे दिया जाए। अध्यक्ष ने नियम 334-ए का भी हवाला दिया। कहा कि किसी भी सदस्य या अन्य व्यक्ति द्वारा नोटिस का तब तक प्रचार नहीं किया जाएगा, जब तक कि अध्यक्ष उसे स्वीकार न कर लें। यदि ऐसा होता है, तो अध्यक्ष इसके खिलाफ जिम्मेदार व्यक्ति के प्रति फैसला लेने के अधिकृत है। अध्यक्ष ने कुछ ऐसी अनियमितताओं और परंपराओं के उल्लंघन के उदाहरण भी दिए। कहा कि यदि सदस्य नियम नहीं मानेंगे तो मुझे नियमों के अनुसार उनके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी। बैठक में सत्र के दौरान की जा रही व्यवस्थाओं, खासकर मीडिया के लिए किए जा रहे प्रबंध की भी जानकारी दी गई। इस दौरान सूचना निदेशक नितीश राजौरा, सचिव विधानसभा मनोज पंडिता, एसएसपी ट्रैफिक फैजल कुरैशी समेत अन्य मौजूद रहे।
महबूबा मुफ्ती ने यह कहा था
पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने रविवार को कहा कि विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका विधायिका के सदस्यों के अधिकारों की रक्षा करना है न कि सेंसर के रूप में कार्य करना। उन्होंने कहा कि पहले विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने विधायकों से बजट सत्र से पहले सदन के बिजनेस नोटिसों का प्रचार-प्रसार नहीं करने को कहा था। अध्यक्ष ने सदस्यों से विशेषाधिकार हनन से दूर रहने को कहा। रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा ने विधानसभा अध्यक्ष राथर पर संवैधानिक पद पर रहते हुए मार्शल लॉ लागू करने का आरोप लगाया।
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महबूबा मुफ्ती के मार्शल लाॅ वाले बयान पर कहा-उन्हें कोई गलत सलाह दे रहा
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। विधानसभा सत्र शुरू होने से पहले इसके सुचारू संचालन की कवायद में जुटे अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने इस बात पर चिंता जताई है कि कुछ लोग इसकी अहमियत नहीं समझ पाते और कार्यवाही को बाधित करने की कोशिश करते हैं। उन्होंने मंगलवार को मीडिया कर्मियों के साथ बातचीत में कहा कि सदन में बेअंदाजी और नियमों का उल्लंघन करने की इजाजत किसी को नहीं।
अध्यक्ष ने कहा कि इतने लंबे वक्त के बाद सदन होने जा रहा है। जरूरी है कि आवाम से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो, न कि सदन की कार्यवाही में बाधा डालकर जनता के मुद्दों को नजरअंदाज किया जाए। सदन को हंगामे की भेंट चढ़ने नहीं दे सकते हैं।
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उन्होंने ये भी कहा कि इन दिनों एक बहस छिड़ी है। पीडीपी प्रमुख ने यहां तक कह दिया कि मैं मार्शल ला की हिमायत कर रहा हूं। मुझे दुख है कि महबूबा मुफ्ती एसा कह रही हैं। उन्हें गलत सलाह दी जा रही है। नोटिस के प्रचार को लेकर मैंने जो कुछ कहा है, वो नियमों के तहत कहा है। मैं फिर से यह दोहराता हूं कि सदन के नियमों और परंपराओं के अनुसार किसी भी सदस्य या अन्य व्यक्ति द्वारा नोटिस को तब तक प्रचारित नहीं किया जाएगा जब तक कि उसे स्वीकार न कर लिया जाए। राथर मंगलवार को अपने कार्यालय में मीडिया कर्मियों से मुखातिब थे। उन्होंने आगामी सदन की कार्यवाही को लेकर कहा कि किसी भी कीमत पर किसी की बेअंदाजी नहीं चलेगी।
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कार्य संचालन के नियम 368 और 334-ए को समझाया
अध्यक्ष ने कहा कि जम्मू-कश्मीर विधानसभा में प्रक्रिया और कार्य संचालन के नियमों के नियम 368 में प्रावधान है कि किसी भी सदस्य या अन्य व्यक्ति द्वारा नोटिस को तब तक प्रचारित नहीं किया जाएगा जब तक कि उसे अध्यक्ष स्वीकार न कर ले। इसी तरह किसी प्रश्न के नोटिस को तब तक पब्लिक में नहीं लाया जा सकता है, जब तक कि सदन में उस प्रश्न का उत्तर न दे दिया जाए। अध्यक्ष ने नियम 334-ए का भी हवाला दिया। कहा कि किसी भी सदस्य या अन्य व्यक्ति द्वारा नोटिस का तब तक प्रचार नहीं किया जाएगा, जब तक कि अध्यक्ष उसे स्वीकार न कर लें। यदि ऐसा होता है, तो अध्यक्ष इसके खिलाफ जिम्मेदार व्यक्ति के प्रति फैसला लेने के अधिकृत है। अध्यक्ष ने कुछ ऐसी अनियमितताओं और परंपराओं के उल्लंघन के उदाहरण भी दिए। कहा कि यदि सदस्य नियम नहीं मानेंगे तो मुझे नियमों के अनुसार उनके खिलाफ कार्रवाई करनी होगी। बैठक में सत्र के दौरान की जा रही व्यवस्थाओं, खासकर मीडिया के लिए किए जा रहे प्रबंध की भी जानकारी दी गई। इस दौरान सूचना निदेशक नितीश राजौरा, सचिव विधानसभा मनोज पंडिता, एसएसपी ट्रैफिक फैजल कुरैशी समेत अन्य मौजूद रहे।
महबूबा मुफ्ती ने यह कहा था
पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्ती ने रविवार को कहा कि विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका विधायिका के सदस्यों के अधिकारों की रक्षा करना है न कि सेंसर के रूप में कार्य करना। उन्होंने कहा कि पहले विधानसभा अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने विधायकों से बजट सत्र से पहले सदन के बिजनेस नोटिसों का प्रचार-प्रसार नहीं करने को कहा था। अध्यक्ष ने सदस्यों से विशेषाधिकार हनन से दूर रहने को कहा। रविवार को पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा ने विधानसभा अध्यक्ष राथर पर संवैधानिक पद पर रहते हुए मार्शल लॉ लागू करने का आरोप लगाया।