{"_id":"6690850b00364fecbb0fb647","slug":"political-news-jammu-news-c-10-jmu1040-398181-2024-07-12","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब्दुल्ला परिवार भारत में पाकिस्तान के राजदूत : चुघ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब्दुल्ला परिवार भारत में पाकिस्तान के राजदूत : चुघ
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- कहा - अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर में विकास और शांति के नए युग की शुरुआत
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं जम्मू-कश्मीर मामलों के प्रभारी तरुण चुघ ने कहा कि पाकिस्तान की भाषा बोलने वाले डाॅ. फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला को भारत में पाकिस्तान का राजदूत घोषित किया जाना चाहिए। दोनों केवल पाकिस्तान आईएसआई की भावनाओं को दोहरा रहे हैं, जबकि उन्हें यह एहसास नहीं है कि जम्मू-कश्मीर में कितना विकास हुआ है।
चुघ ने कहा, नेकां के शीर्ष नेतृत्व को सशस्त्र बलों की कोई परवाह नहीं, जो पाकिस्तान आईएसआई के मंसूबों को नाकाम करने के लिए चौबीसों घंटे अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। लेकिन जैसे ही आईएसआई प्रायोजित आतंकवादियों की ओर से कोई हमला होता है, अब्दुल्ला परिवार तुरंत आतंकवादियों को बचाने के लिए आगे आता है और मोदी सरकार को बदनाम करने की कोशिश करता है। अनुच्छेद 370 हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर में विकास का नया युग शुरू हुआ है। अब कश्मीर में पत्थरबाजी या हड़ताल नहीं होती, बल्कि शांति है। चुघ ने कहा कि मूल रूप से अब्दुल्ला समझ गए हैं कि वे जम्मू-कश्मीर में तेजी से अपनी जमीन खो रहे हैं, क्योंकि लोगों ने उनके नापाक इरादों को समझ लिया है। लोग उच्च शिक्षा और रोजगार चाहते हैं, जो मोदी सरकार ने उन्हें दिया है और आगे भी देती रहेगी। मुफ्ती और अब्दुल्ला परिवारों ने जम्मू-कश्मीर को इतने सालों तक अंधेरे में रखा और आज उन्हें जम्मू कश्मीर का विकास भा नहीं रहा है। पाकिस्तानी आईएसआई के इरादों को उनका गुप्त समर्थन न केवल निंदनीय है, बल्कि एक राष्ट्र-विरोधी रुख है।
विज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं जम्मू-कश्मीर मामलों के प्रभारी तरुण चुघ ने कहा कि पाकिस्तान की भाषा बोलने वाले डाॅ. फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला को भारत में पाकिस्तान का राजदूत घोषित किया जाना चाहिए। दोनों केवल पाकिस्तान आईएसआई की भावनाओं को दोहरा रहे हैं, जबकि उन्हें यह एहसास नहीं है कि जम्मू-कश्मीर में कितना विकास हुआ है।
चुघ ने कहा, नेकां के शीर्ष नेतृत्व को सशस्त्र बलों की कोई परवाह नहीं, जो पाकिस्तान आईएसआई के मंसूबों को नाकाम करने के लिए चौबीसों घंटे अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। लेकिन जैसे ही आईएसआई प्रायोजित आतंकवादियों की ओर से कोई हमला होता है, अब्दुल्ला परिवार तुरंत आतंकवादियों को बचाने के लिए आगे आता है और मोदी सरकार को बदनाम करने की कोशिश करता है। अनुच्छेद 370 हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर में विकास का नया युग शुरू हुआ है। अब कश्मीर में पत्थरबाजी या हड़ताल नहीं होती, बल्कि शांति है। चुघ ने कहा कि मूल रूप से अब्दुल्ला समझ गए हैं कि वे जम्मू-कश्मीर में तेजी से अपनी जमीन खो रहे हैं, क्योंकि लोगों ने उनके नापाक इरादों को समझ लिया है। लोग उच्च शिक्षा और रोजगार चाहते हैं, जो मोदी सरकार ने उन्हें दिया है और आगे भी देती रहेगी। मुफ्ती और अब्दुल्ला परिवारों ने जम्मू-कश्मीर को इतने सालों तक अंधेरे में रखा और आज उन्हें जम्मू कश्मीर का विकास भा नहीं रहा है। पाकिस्तानी आईएसआई के इरादों को उनका गुप्त समर्थन न केवल निंदनीय है, बल्कि एक राष्ट्र-विरोधी रुख है।
विज्ञापन