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Jammu News: पूर्व सैनिक चाहें मान-सम्मान<bha>;</bha> सैन्य सलाहकार की नियुक्ति, शिकायतें सुनने के लिए आयोग का गठन

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''अमर उजाला'' कार्यालय में चुनावी मुद्दे पर चर्चा में पूर्व सैनिकों ने नई सरकार से लगाई उम्मीदें
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। केंद्र शासित प्रदेश में पूर्व सैनिक सरकारी कार्यालयों में आदर-सत्कार, मान-सम्मान और विशेष दर्जा चाहते हैं। एक आयोग गठित किया जाए, जो पूर्व सैनिकों की शिकायतें सुने और उसके आधार पर नीतियां बनाई जाएं। आतंकवाद को खत्म करने के लिए सरकार में एक सैन्य सलाहकार नियुक्त किया जाए, जिन्हें सैन्य ऑपरेशन की जानकारी हो।
सेवानिवृत सैनिकों ने ये उम्मीदें मंगलवार को उमर उजाला के जम्मू कार्यालय में चुनावी मुद्दे पर चर्चा के दौरान प्रदेश में चुनी जाने वाली नई सरकार से लगाई हैं। हालांकि इनके दिल में टीस है कि पिछली सरकारों ने उनकी अनदेखी की। वे एलजी प्रशासन से खुश नहीं हैं। शिकायत है कि एक बार भी उन्होंने बुलाकर नहीं पूछा कि पूर्व सैनिकों की दिक्कतें क्या हैं।
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पूर्व सैनिकों के अनुसार, पुलिस जिला स्तर पर रिटायर सैन्य अधिकारियों की मदद ले। वीडीजी हैंडल करने की जिम्मेदारी रिटायर सैन्य अफसर को मिले। महिलाओं के लिए निशुल्क सफर की सुविधा हो। कश्मीर में सैनिक कॉलोनी, जिला स्तर पर बेसहारा सैन्य परिवारों के लिए होस्टल, कश्मीर में सैन्य कर्मियों के लिए वार मेमोरियल स्थापित किया जाए। दूसरे राज्यों की तर्ज पर बलिदान होने पर अनुग्रह राशि, बलिदानियों के परिवारों को टोल टैक्स में छूट मिले। एक ही जगह पर सैनिकों के लिए अस्पताल, कैंटीन, इसीएच आदि की सुविधा, पुलिस और प्रशासन में कार्य कराने जाते वक्त सम्मान और प्राथमिकता दी जाए। सेना की वर्दी का आम नागरिकों द्वारा इस्तेमाल बंद किया जाए। रोहिंग्याओं को जम्मू-कश्मीर से बाहर निकाला जाना चाहिए।
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जम्मू-कश्मीर में 2019 से उप राज्यपाल प्रशासन है। अफसोस है कि आज तक हमें कभी एलजी की तरफ से एक बार भी बुलाकर नहीं पूछा गया कि हमारी दिक्कतें क्या हैं। कश्मीर की सियासत पर तो हमें पहले भी भरोसा नहीं था, क्योंकि 1990 में मेरे सामने लोगों को भगा दिया, जबकि तीन लाख सैनिक थे। हमने कहा कि इमारतों को खाली करवाकर उनमें लोगों को ठहराओ। हम सुरक्षा करेंगे, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। हमारी परेशानियां इतनी हैं कि इन्हें सुनने और हल करने के लिए आयोग की दरकार है।
- गोवर्धन सिंह जमवाल, सेवानिवृत मेजर जनरल
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पिछले दस वर्ष से गन लाइसेंस रिन्यू नहीं हुआ। न ही नया लाइसेंस जारी हो रहा है। डीसी कार्यालय में गए, तो कहा गया कि एक हफ्ते में लाइसेंस बन जाएगा। आज तक ऐसा नहीं हुआ। इतना जरूर है कि हमें हथियार जमा कराने के लिए कहते हैं। जिन्होंने पूरा जीवन देश की रक्षा के लिए दिया, उनसे इनको खतरा है। प्रशासन में हमारा कोई सम्मान नहीं करता। कोई घायल या दिव्यांग सैनिक किसी कार्यालय में जाता है तो उसको इंतजार करना पड़ता है।
- वीके साही, रिटायर कर्नल
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कई नौजवान महिलाएं युवा अवस्था में विधवा हो जाती हैं, जिनके पति देश के लिए बलिदान होते हैं। ग्रामीण और दूर-दराज इलाकों में रहने वाली वीर नारियों को सरकारी कार्यालयों में काम करवाने के लिए जम्मू आना पड़ता है। इनके लिए अपने क्षेत्र में ही व्यवस्था हो। दिल्ली व पंजाब की तरह प्रदेश में महिलाओं को बस में निशुल्क सफर, अग्निवीरों को प्रदेश में नौकरी में प्रथमिकता, सैनिक कॉलोनी में बिजली-पानी और अनुग्रह राशि दूसरे राज्यों की तरह मिले।
- सुनीता कपूर, रिटायर मेजर जनरल
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एलजी के आदेश के बाद भी तीन-तीन साल से फौजियों की शिकायतें हल नहीं होती हैं। सैनिक वेलफेयर बोर्ड में पंजीकरण कराने की सुविधा ऑनलाइन होनी चाहिए। वेतन आयोग में पूर्व सैन्य अफसर हों। पुलिस अफसरों को सैनिकों का सम्मान करने के निर्देश दें। नौकरियों व शिक्षा में आरक्षण, सैन्य कैंटीनों में पूर्व सैनिकों की नौकरी दी जाएग। सोशल मीडिया पर सेना के नाम पर बनाए जाने वाले वीडियो बंद हों। ईसीएसएच, सीएसडी, सैन्य अस्पताल व पॉलीक्लीनिक एक जगह हों। हर जिले में फौजी परिवारों के लिए एक होस्टल हो।
- शिव चौधरी, रिटायर कर्नल
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एक सैनिक जब रिटायर होता है। घर आने पर उसे अपने परिवार से कहीं और भी शिफ्ट होना होता है, लेकिन राशनकार्ड से लेकर अन्य दस्तावेजों तक में पता बदलने को लेकर महीनों लग जाते हैं। पता ही नहीं चलता कि किस जगह से काम होगा। इसके लिए कोई आसान व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि पूर्व सैन्य कर्मियों को दरबदर न होना पड़े।
- किशोर उप्पल, रिटायर कर्नल
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पंजाब और अन्य राज्यों में पूर्व सैनिकों के लिए ओल्ड एज होम होना चाहिए। इसकी शुरूआत जम्मू और श्रीनगर से करें। इसके बाद धीरे-धीरे हर जिले में यह व्यवस्था हो। हर जिले में पूर्व सैनिक कॉलोनी होनी चाहिए। सेना और अन्य बलों का अंतर तय हो। सेना की वर्दी और हथियार दूसरी फोर्स भी इस्तेमाल कर रही है, जोकि नहीं होना चाहिए। कश्मीर के टट्टू ग्राउंड में कश्मीरी पंडितों और सैनिक कॉलोनी दोनों एक साथ बनाई जाएं।

- जसपाल सिंह, पूर्व कर्नल
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वर्ष 2019 में अनुच्छेद 370 हटा। जम्मू के लोग बहुत खुश हुए। हम भी खुश थे, लेकिन इसके बाद बदला कुछ नहीं। बस इतना हुआ कि कश्मीर से की जा रही हुकुमत से छुटकारा मिला। कश्मीर में उद्योग लगने थे, लेकिन वहां नहीं लग पाए। इसका असर जम्मू पर पड़ा। केंद्र कश्मीर समस्या में उलझा है। प्रदेश की सुरक्षा के लिए सेना के पूर्व सैनिकों की मदद ली जाए। वीडीजी की कमान सेना के रिटायर अफसर को दें, जिन्हें एलओसी से लेकर आंतरिक सुरक्षा तक की जानकारी है।
- विजय सागर, रिटायर बिग्रेडियर
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ये भी प्रमुख मुद्दे
- सरकारी तंत्र में पूर्व सैनिकों को सम्मान मिले, कार्य कराने में प्राथमिकता मिले

- नए वेतन आयोग में पूर्व सैन्य अफसर को शामिल किया जाए
- पुलिस की ट्रेनिंग सैन्य स्कूल से कराएं।
- फौजियाें की समय पर शिकायत हल करने के लिए सेल गठित हो।

- कश्मीर में वार मेमोरियल बने
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