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उधमपुर निर्वाचन क्षेत्र ने युवाओं को लैवेंडर का स्टार्टअप विकल्प दिया : डॉ. जितेंद्र
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। केंद्रीय राज्य मंत्री डाॅ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के उधमपुर लोकसभा क्षेत्र ने युवाओं को लैवेंडर का एक नया स्टार्टअप विकल्प दिया है। यह तेजी से कृषि स्टार्टअप हब के रूप में उभर रहा है। नई दिल्ली में हुई गणतंत्र दिवस की झांकी में भी भद्रवाह के लैवेंडर खेतों को दर्शाया गया था, जिसने जम्मू-कश्मीर को राष्ट्रीय स्तर पर बैंगनी क्रांति के रूप में उभारा है। अब इसका अनुकरण हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के साथ नगालैंड में किया जा रहा है।
जम्मू में युवा प्रतिनिधिमंडलों से रूबरू होते हुए डाॅ. सिंह ने कहा कि इस एग्री स्टार्टअप हब की नींव जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के भद्रवाह शहर में रखी गई है, जहां लैवेंडर की खेती बड़े पैमाने पर की गई है। इसकी खेती अब अन्य विधानसभा हिस्सों में भी जोर पकड़ रही है। इसमें बिलावर, रामनगर के ऊपरी इलाके शामिल हैं। प्रधानमंत्री भी मन की बात में डोडा जिले की खेती में सफलता की कहानी बयां कर चुके हैं। यह प्रयास भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए एक वैकल्पिक स्रोत प्रदान करता है। भद्रवाह के 3000 से अधिक समृद्ध लैवेंडर उद्यमियों ने भारत के युवाओं को कृषि के माध्यम से स्टार्टअप का एक नया और आकर्षक रास्ता दिखाया है।
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जम्मू। केंद्रीय राज्य मंत्री डाॅ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के उधमपुर लोकसभा क्षेत्र ने युवाओं को लैवेंडर का एक नया स्टार्टअप विकल्प दिया है। यह तेजी से कृषि स्टार्टअप हब के रूप में उभर रहा है। नई दिल्ली में हुई गणतंत्र दिवस की झांकी में भी भद्रवाह के लैवेंडर खेतों को दर्शाया गया था, जिसने जम्मू-कश्मीर को राष्ट्रीय स्तर पर बैंगनी क्रांति के रूप में उभारा है। अब इसका अनुकरण हिमालयी राज्यों में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के साथ नगालैंड में किया जा रहा है।
जम्मू में युवा प्रतिनिधिमंडलों से रूबरू होते हुए डाॅ. सिंह ने कहा कि इस एग्री स्टार्टअप हब की नींव जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले के भद्रवाह शहर में रखी गई है, जहां लैवेंडर की खेती बड़े पैमाने पर की गई है। इसकी खेती अब अन्य विधानसभा हिस्सों में भी जोर पकड़ रही है। इसमें बिलावर, रामनगर के ऊपरी इलाके शामिल हैं। प्रधानमंत्री भी मन की बात में डोडा जिले की खेती में सफलता की कहानी बयां कर चुके हैं। यह प्रयास भारत को अपनी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए एक वैकल्पिक स्रोत प्रदान करता है। भद्रवाह के 3000 से अधिक समृद्ध लैवेंडर उद्यमियों ने भारत के युवाओं को कृषि के माध्यम से स्टार्टअप का एक नया और आकर्षक रास्ता दिखाया है।
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