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आतंकवाद से निपटने के लिए जम्मू कश्मीर सरकार को साथ लेकर काम करे केंद्र : कांग्रेस

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कांग्रेस पार्टी मुख्यालय जम्मू में शनिवार को पत्रकार वार्ता करते वरिष्ठ नेता।  
राज्य का दर्जा देने में लगातार देरी भाजपा की विफलता
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। प्रदेश कांग्रेस ने जम्मू कश्मीर में राज्य का दर्जा देने में देरी के लिए भाजपा को आड़े हाथ लिया है। पार्टी ने जम्मू कश्मीर में यकायक बढ़े आतंकी हमलों पर चिंता जताते हुए आतंकवाद को हराने के लिए केंद्र सरकार को नवनिर्वाचित जम्मू कश्मीर सरकार को साथ लेकर चलने पर जोर दिया है।
पार्टी मुख्यालय में शनिवार को पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने पत्रकारों से रूबरू होते हुए कहा कि भाजपा ने डोगरा राज्य का दर्जा घटाकर इसे केंद्र शासित प्रदेश में बदलने और 5 साल से अधिक समय के बाद राज्य को बहाल न करके महाराजा और डोगरा शासकों का अपमान किया है। मीडिया में बार-बार प्रतिबद्धताओं और विज्ञापनों के बावजूद राज्य का दर्जा देने की घोषणा में देरी के लिए भाजपा और केंद्र सरकार को उचित जवाब देना चाहिए। महाराजा हरि सिंह को सच्ची श्रद्धांजलि के लिए शीघ्र पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल किया जाए। यदि मांग जल्द पूरी नहीं हुई तो कांग्रेस जनांदोलन का रास्ता अपनाएगी।
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सरकार को आतंकवाद से समग्र दृष्टिकोण के साथ निपटना चाहिए। केंद्र को आतंकवाद का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने की रणनीति पर काम करना चाहिए। आतंकवाद एक चुनौती है और आतंकवादियों ने पिछले कुछ समय से कश्मीर घाटी और जम्मू क्षेत्र में चुनिंदा लक्षित हमलों का तरीका अपनाया है। पार्टी नेताओं ने पीड़ितों के परिवारों के साथ सहानुभूति व्यक्त की। इस दौरान कार्यकारी अध्यक्ष रमन भल्ला, मूला राम (पूर्व मंत्री, रवींद्र शर्मा (मुख्य प्रवक्ता), पूर्व अध्यक्ष विधान परिषद जहांगीर मीर, पूर्व मंत्री योगेश साहनी, वेद महाजन (पूर्व एमएलसी), टीएस टोनी, भूषण डोगरा (पूर्व एमओएस), दीना नाथ भगत (पूर्व विधायक) मौजूद रहे।
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----शशि अबरोल के आवास पर पहुंचे प्रदेशाध्यक्ष
पीसीसी अध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने शनिवार को जम्मू में आतंकी हमले में मारे गए शशि अबरोल के आवास पर पहुंचकर परिवारवालों के प्रति सांत्वना जताई। उन्होंने कहा कि इस दुख की घड़ी में पार्टी परिवारवालों के साथ खड़ी है।
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तथ्य जांच समिति आज से जिले के दौरों पर
विधानसभा चुनाव में हार के कारणों के लिए प्रदेश कांग्रेस की तथ्य जांच समिति ने शनिवार भी जम्मू शहरी से नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ चर्चा कर फीडबैक लिया। प्रदेशाध्यक्ष तारिक हमीद कर्रा ने भी नेताओं और कार्यकर्ताओं से बात की। समिति के अध्यक्ष रवींद्र शर्मा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी नियमित रूप से पार्टी की हार के दृष्टिकोण का आत्मनिरीक्षण कर रही है। इस संबंध में कार्यकर्ताओं और आम जनता से प्रतिक्रिया ली जा रही है। अन्य कारणों के अलावा जमीनी स्तर से फीडबैक का महत्वपूर्ण पहलू चुनावों के दौरान सत्तापक्ष दल द्वारा अवैध ढंग से राशन, शराब के वितरण और धन के उपयोग की शिकायतें मिली हैं। इसमें प्रतिद्वंद्वी दल को स्थानीय प्रशासन के सहयोग पर भी सवाल उठ रहे हैं। अधिकांश निर्वाचन क्षेत्रों में जहां कांग्रेस पार्टी जीत रही थी या कड़े मुकाबले में थी, वहां जीत का बड़ा अंतर जमीनी कार्यकर्ताओं के अलावा आम जनता की राय के विपरीत है और ऐसे सभी कारणों की पहचान करने के लिए पार्टी स्तर पर गहन जांच चल रही है। कांग्रेस नेताओं ने यह भी कहा कि पार्टी और गठबंधन सरकार की प्राथमिकताएं राज्य का दर्जा, रिकॉर्ड बेरोजगारी और दरबार मूव की बहाली के अलावा पीड़ित वर्गों और आम लोगों को राहत देने के लिए अन्य कल्याणकारी उपाय हैं, जो छह साल के नौकरशाही शासन के बाद निर्वाचित सरकार से जनहितैषी पहल की उम्मीद कर रहे हैं। केंद्र सरकार को नवनिर्वाचित सरकार द्वारा कल्याणकारी उपायों और जनहितैषी पहलों का पूरा समर्थन करने के लिए आगे आना चाहिए। इस बीच पीसीसी अध्यक्ष ने पार्टी की एक उच्च स्तरीय टीम को बाड़वान का दौरा करने और आग की घटना से प्रभावित परिवारों से मिलने के लिए नियुक्त किया है। तथ्य जांच समिति के सदस्य 27 अक्तूबर को कटड़ा, उधमपुर, 28 अक्तूबर को सांबा, कठुआ और 29 अक्तूबर को जम्मू जिला ग्रामीण के लिए पीसीसी हेडक्वार्टर में नेताओं और कार्यकर्ताओं से मिलेंगे।

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कांग्रेस ने महाराजा हरि सिंह को याद किया
जम्मू कश्मीर के विलय दिवस पर शनिवार को प्रदेश कांग्रेस के नेताओं ने महाराजा हरि सिंह की सेवाओं को याद किया। पार्टी नेताओं ने ब्रिगेडियर राजेंद्र सिंह सहित उन सभी वीरों के बलिदान को भी याद किया, जिन्होंने पाकिस्तानी हमलावरों के हमले को भारतीय सेना के यहां पहुंचने तक विफल कर दिया। हमलावरों के हमले के दौरान और जम्मू-कश्मीर के भारत में विलय के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी गई। कहा, इस दिन महात्मा गांधी और पंडित जवाहर लाल नेहरू तथा शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के नेतृत्व में जिन्ना के दो राष्ट्र सिद्धांत को खारिज करने की भूमिका को भी याद किया जाना चाहिए।
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