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डीडीसी चुनाव के परिणामों को लेकर अटकलों का जोर
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आरएस पुरा। डीडीसी चुनाव के लिए हुए मतदान के बाद अब एक दिन बाद मतों की गिनती से स्पष्ट हो जाएगा कि कौन कामयाब रहा। आरएस पुरा कभी कांग्रेस का गढ़ रहा है, लेकिन कई वर्ष से भाजपा के विधायक निर्वाचित होते रहे हैं। डीडीसी चुनाव में कांग्रेस ने भी इस पर पूरी ताकत लगाकर प्रत्याशी मैदान में उतारे थे, लेकिन पार्टी नेताओं में गुटबाजी होने पर मतदाताओं को अपनी ओर नहीं कर सके। जैसा पार्टी हाईकमान चाहती थी।
दूसरी ओर उपजिले में भाजपा नेताओं में हुई गुटबाजी के चलते इस बार डीडीसी चुनाव में भाजपा नेता निर्दलीय चुनाव में उतरे। यही प्रत्याशी भाजपा की जीत-हार के प्रतिशत में कितना अंतर डालते हैं यह मतों की गिनती के बाद ही पता चलेगा। भाजपा व कांग्रेस की ओर से पार्टी के कई पदाधिकारियों को पार्टी से बाहर निकाल दिया गया है। जिन्होंने अपनी पार्टी की लाइन के साथ चलने के बजाय पार्टी के खिलाफ उतरे प्रत्याशियों का समर्थन किया। भाजपा व कांग्रेस के बागी नेता अब इन प्रत्याशियों की हार-जीत पर ही भविष्य निर्भर है। इस बार भाजपा का कांग्रेस व निर्दलीय के के साथ तिकोना मुकाबला है। मतों की गिनती के बाद ही पता चलेगा कि क्या कांग्रेस ने फिर एक बार अपना खोया सम्मान प्राप्त कर लिया है। या भाजपा को ही फिर से लोगों ने समर्थन दिया है। इन दिनों कस्बे और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों में चुनाव में उतरे प्रत्याशियों की हार-जीत को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन जिस प्रकार मीरां साहिब व आरएस पुरा में मतदान का प्रतिशत कम रहा उससे लगता है कि परिणाम पर इसका जरूर प्रभाव पड़ेगा। हालांकि सुचेतगढ़ क्षेत्र में 70 से अधिक प्रतिशत तक मतदान हुआ है। किस पार्टी की जीत होगी, इसके बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।
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दूसरी ओर उपजिले में भाजपा नेताओं में हुई गुटबाजी के चलते इस बार डीडीसी चुनाव में भाजपा नेता निर्दलीय चुनाव में उतरे। यही प्रत्याशी भाजपा की जीत-हार के प्रतिशत में कितना अंतर डालते हैं यह मतों की गिनती के बाद ही पता चलेगा। भाजपा व कांग्रेस की ओर से पार्टी के कई पदाधिकारियों को पार्टी से बाहर निकाल दिया गया है। जिन्होंने अपनी पार्टी की लाइन के साथ चलने के बजाय पार्टी के खिलाफ उतरे प्रत्याशियों का समर्थन किया। भाजपा व कांग्रेस के बागी नेता अब इन प्रत्याशियों की हार-जीत पर ही भविष्य निर्भर है। इस बार भाजपा का कांग्रेस व निर्दलीय के के साथ तिकोना मुकाबला है। मतों की गिनती के बाद ही पता चलेगा कि क्या कांग्रेस ने फिर एक बार अपना खोया सम्मान प्राप्त कर लिया है। या भाजपा को ही फिर से लोगों ने समर्थन दिया है। इन दिनों कस्बे और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों में चुनाव में उतरे प्रत्याशियों की हार-जीत को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन जिस प्रकार मीरां साहिब व आरएस पुरा में मतदान का प्रतिशत कम रहा उससे लगता है कि परिणाम पर इसका जरूर प्रभाव पड़ेगा। हालांकि सुचेतगढ़ क्षेत्र में 70 से अधिक प्रतिशत तक मतदान हुआ है। किस पार्टी की जीत होगी, इसके बारे में अभी कुछ नहीं कहा जा सकता।
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