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खंडहर बन गया पुलिस थाना
ब्यूरो/अमर उजाला, कठुआ
Updated Sun, 22 Mar 2015 10:50 AM IST
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इमारत तो वही थी, लेकिन राजबाग पुलिस थाने का हुलिया खंडहर के समान हो चुका था। आतंकी हमले के दौरान भीषण गोलाबारी का गवाह बना पुलिस थाना घटना के दूसरे दिन अपनी व्यवस्था को पटरी पर लाने की कोशिश में था।
शुक्रवार सुबह से लेकर दोपहर तक जो हुआ उसे भूलना तो मुमकिन नहीं, लेकिन पुलिस थाने के मुख्य गेट पर चौकसी बरतता संतरी हो या फिर थाने के भीतर का कामकाज करते पुलिसकर्मी।
त्रासदी से उबरने का प्रयास करती राजबाग पुलिस थाने की दिनचर्या असहज करने वाली थी। अमर उजाला ने आतंकी हमले के दूसरे दिन शनिवार को जब पुलिस थाने का दौरा किया, तो वहां पर तैनात पुलिसकर्मियों के चेहरों पर गम और गुस्से के भाव साफ दिखाई दे रहे थे।
थाने की इमारत के प्रवेश द्वार की दीवार का प्लस्तर लगभग पूरी तरह से उखड़ा हुआ। दूसरी मंजिल को जाने वाली सीढ़ियों की टाइलें बुरी तरह से टूटी हुईं।
इस बीच अपनी रूटीन के कामकाज में व्यस्त पुलिसकर्मी ड्यूटी के जीवट को व्यक्त कर रहे थे, लेकिन गोलियों से छिदी दीवारें सन्नाटे के बीच शुक्रवार की गोलीबारी की अनुगूंज को महसूस करवा रही थीं।
शनिवार को थाना परिसर में जो भी दाखिल होता उसे बड़े ही गौर से देखा जा रहा था। पहले कमरे के सामने स्थित थाना प्रभारी के कक्ष को कुछ संभालने की कोशिश की गई थी।
बावजूद इसके खिड़की दरवाजों की टूटी फूटी हालत आतंकी हमले के हालात को बयान कर रहे थे। पहले माले पर सीआरपीएफ कैप में जाने के लिए बनी सीढ़ियों की शुरुआत में ग्रेनेड से हुआ गड्ढा और सीढ़ियां चढ़ने के साथ ही धमाकों से हुए नुकसान का अंदाजा साफ लगाया जा सकता था।
थाना परिसर में खड़े पुलिसकर्मी भी बीते दिन हुए हादसे पर चर्चा करते रहे। वहीं, पुलिस क्वार्टर के बाहर बंकर तैयार किया जा रहा था। एक-एक कर बंकर तैयार करते हुए पुलिस वालों के हौसले बुलंद थे, लेकिन साथी को खोने का गम भी देखा जा सकता था।
थाना परिसर में दिनभर पुलिस अधिकारी डेरा जमाए रहे। शायद यह तैनात पुलिसकर्मियों का हौसला बढ़ाने की कवायद थी, लेकिन हीरानगर थाने के बाद राजबाग थाने पर हुए हमले से अब सीमावर्ती इलाके से सटे पुलिस प्रतिष्ठान महफूज नहीं रहे हैं।