जम्मू: अलगावादियों की एकता रैली विफल
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वर्ष 1947 में जम्मू में नरसंहार के दौरान मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए अलगाववादियों द्वारा आयोजित एकता रैली को पुलिस ने विफल बना दिया। इसके लिए श्रीनगर में शुक्रवार को सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए थे।
इस दौरान सभी दुकानें, कारोबारी इदारे, स्कूल-कालेज आदि बंद रहे। यातायात भी सड़कों पर नहीं के बराबर रहा सरकारी दफ्तरों में हाजिरी भी कम रही।
शाम के समय जब सख्ती हटी तो सफाकदल और नौहट्टा में जमकर पत्थरबाजी हुई। उसे नियंत्रण में करने के लिए पुलिस को हवाई फायरिंग करनी पड़ी। इससे हालात तनावपूर्ण बन गए।
संवेदनशील इलाकों में सुरक्षाकर्मियों की भारी तैनाती की गई
पुराने शहर के सफाकदल, एमआर गंज, खान्यार, नौहट्टा और रैनावारी के साथ-साथ लाल चौक से सटे माइसुमा इलाके में कर्फ्यू जैसी सख्त पाबंदियां रखी गई थी। सभी संवेदनशील इलाकों में सुरक्षाकर्मियों की भारी तैनाती की गई थी।
पाबंदियों के चलते नौहट्टा के जामिया मस्जिद में जुमे की नमाज पढ़ने के लिए भी लोग नहीं पहुंच सके। बारामुला में नमाज के बाद गिलानी समर्थकों ने मिलियन मार्च के समर्थन में जुलूस निकाला और आजादी के हक में नारेबाजी की।
मिलियन मार्च में शामिल होने के लिए दक्षिणी कश्मीर के मीरवाइज काजी यासिर भी कुछ समर्थकों के साथ श्रीनगर की ओर आ रहे थे। लेकिन, उन्हें अवंतीपोरा के पास हिरासत में ले लिया गया।