पीएमओ से सीधे बाढ़ पीड़ितों के एकाउंट में राहत राशि
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राहत राशि सीधे बाढ़ पीड़ितों के एकाउंट में भेजने का फैसला लिया है। पीएमओ ने इस बाबत रियासत सरकार से पीड़ितों की ताजा सूची तलब की है। चुनाव आयोग ने राहत कार्यों को आचार संहिता से अलग रखा है इसलिए पीड़ितों को राहत राशि देने की राह की अड़चनें समाप्त हो गई है।
मोदी ने श्रीनगर दौरे के क्रम में पीड़ितों के मकान के लिए 570 करोड़ रुपये का ऐलान किया था। यह राशि अब सीधे संबंधित लोगों के एकाउंट में आएगी। जम्मू संभाग के पीड़ितों की सूची राजस्व विभाग के सचिव को सौंप दी गई है जबकि कश्मीर संभाग अभी एकाउंट नम्बर जुटा रहा है। पीएमओ ने शीघ्र सूची मांगी है और यहां तक कि जिन लोगों के एकाउंट नम्बर उपलब्ध हैं उन्हें तुंरत भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जब बाढ़ पीड़ितों के साथ दिवाली मनाने श्रीनगर आए थे तब कई प्रतिनिधिमंडलों ने उनसे केंद्रीय सहायता सीधे पीड़ितों के एकाउंट में भेजने की अपील की थी। रियासत सरकार द्वारा राहत वितरण में की स्थानों पर गड़बड़ियां उजागर हुईं थीं। पीएम द्वारा इस मांग को स्वीकार लिए जाने के बाद अब पीएमओ ने इस बाबत कार्रवाई शुरू कर दी है।
जम्मू संभाग के डिविजनल कमिश्नर शांतमनु ने कहा कि कई पीड़ितों के एकाउंट नम्बर उपलब्ध नहीं थे लेकिन निर्देश आया कि जिनके नम्बर मौजूद हैं उन्हें पहले भेज दें ताकि तुरंत राशि भेजी जा सके। इसलिए सूची राजस्व सचिव को सौंप दी गई है। कश्मीर से इस सूची का पीएमओ को इंतजार है।
उमर ने मांगी था 44 हजार करोड़ का राहत पैकेज
इस बीच चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद बाढ़ पीड़ितों के बीच राहत कार्य लगभग ठप हो गया है। रियासत सरकार ने 44 हजार करोड़ रुपये के पैकेज की मांग केंद्र सरकार से की थी। इस मांग के बाद केंद्र सरकार की दो टीमें धरातल का आकलन कर दिल्ली लौटीं। लेकिन राहत पैकेज पर केंद्र की ओर से अभी तक कोई फैसला नहीं हो पाया है।
रियासत सरकार को इस पैकेज का इंतजार है जबकि सूत्रों के मुताबिक इसके चुनाव नतीजों के बाद ही मिलने की उम्मीद है। जिन पीड़ितों के मकान ध्वस्त हुए हैं उनमें से लगभग एक लाख लोगों तक अबतक कोई राहत नहीं पहुंची है।
बाढ़ ने दो लाख चालीस हजार लोगों को बेघर किया था। रियासत सरकार ने अपने संसाधनों और केंद्रीय पैकेज में से अबतक डेढ़ लाख पीड़ितों तक राहत पहुंचाने का दावा किया है।
राहत मद में खर्च हुए 138 करोड़
बाढ़ से जिन लोगों के मकान ध्वस्त हुए उनके बीच अबतक 138 करोड़ रुपये मदद के रूप में वितरित कि गए हैं। जिनते मकान पूरी तरह ध्वस्त हुए वैसे 16 हजार लोगों को प्रति परिवार 75 हजार, आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकानों के लिए 3800 रुपये और पशु रखने की जगह के क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में 1500 रुपये दिए गए हैं लेकिन इस सुविधा से लगभग एक लाख लोग अबतक वंचित हैं। पीएम की सहायता इस मदद से अलग होगी।
मिशन 44 प्लस के लिए कश्मीर में पैठ
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की पहल से विधानसभा चुनाव में भाजपा के मिशन 44 प्लस को भी फायदे की उम्मीद है। बाढ़ पीड़ितों ने कई बार रियासत सरकार की जगह मोदी पर ज्यादा भरोसा जताया है। राहत राशि सीधे बाढ़ पीड़ितों के एकाउंट में आने से कश्मीरियों में पैठ बनाना आसान हो सकता है। चूंकि चुनाव आयोग ने राहत कार्य को आचार संहिता के दायरे से अलग रखा है इसलिए इसमें कोई कानूनी अड़चन भी नहीं है।