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जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में पेंडिंग मामलों का अंबार: लाखों केस लंबित, फरार आरोपी और गवाह बने देरी की मुख्य वजह

Mon, 12 Oct 2026 05:00 AM IST
Digvijay Singh प्रवेश कुमारी, अमर उजाला, जम्मू
प्रवेश कुमारी, अमर उजाला, जम्मू Published by: Digvijay Singh Updated Mon, 12 Oct 2026 05:00 AM IST
सार

हाईकोर्ट में कुल 3,65,687 लंबित मामलों में से 2,40,872 आपराधिक, जबकि 1,24,815 केस सिविल के हैं। नेशनल ज्यूडिशियल डाटा ग्रिड (एनजेडीजी) के आंकड़े यह तस्वीर दिखाते हैं। देरी की वजहों पर जाएं तो श्रीनगर में अभियुक्त फरार होने की वजह से 3,096 मामले लंबित हैं।

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Pile of pending cases in Jammu and Kashmir High Court Lakhs of cases pending absconding accused and witnesses
जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

तारीख-पे-तारीख...। ये एक फिल्म का मशहूर डायलॉग है, लेकिन अदालतों पर मुकदमों के बोझ की सच्चाई भी। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में इस वक्त 3.65 लाख से अधिक मामले लंबित हैं, जिनमें देरी की सबसे बड़ी वजह स्टे है। प्रदेश के आठ जिलों में आरोपियों के फरारी और गवाही इंसाफ का इंतजार बढ़ा रहे हैं। इनमें चार जम्मू और चार कश्मीर के जिले शामिल हैं।

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हाईकोर्ट में कुल 3,65,687 लंबित मामलों में से 2,40,872 आपराधिक, जबकि 1,24,815 केस सिविल के हैं। नेशनल ज्यूडिशियल डाटा ग्रिड (एनजेडीजी) के आंकड़े यह तस्वीर दिखाते हैं। देरी की वजहों पर जाएं तो श्रीनगर में अभियुक्त फरार होने की वजह से 3,096 मामले लंबित हैं, वहीं सांबा में अभियुक्तों के फरार होने की वजह से 18 मामले अटके हैं। बडगाम में 1,080 मुकदमों में गवाहों की वजह से कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पा रही।
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शोपियां में 322, जबकि गांदरबल में 282 में गवाह मुकदमों में कार्रवाई में देरी का सबब बने हैं। रामबन में ऐसे 53 और किश्तवाड़ में 43 ऐसे मामले हैं। इसके लिए गवाह के पेश न होने, गवाही पूरी न हो पाने, गवाहों की जांच में देरी जैसे कारण जिम्मेदार हैं। डोडा में 88 मुकदमों में कार्रवाई रिकॉर्ड अनुपलब्ध होने की वजह से नहीं बढ़ पा रही है।
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जम्मू-कश्मीर में लंबित मामले
जम्मू                  76,306
कठुआ               13,918
उधमपुर             13,612
बारामुला             26,274
अनंतनाग            25,821
श्रीनगर               67,211
पुलवामा             14,694
गांदरबल             8,042
बडगाम              16,983
रियासी                6,876
शोपियां               8,179
कुपवाड़ा             18,024
पुंछ                    8,458
राजोरी                13,212
रामबन                7,606
डोडा                   8,207
बांदीपोरा             7,416
कुलगाम             12,543
सांबा                  8,253
किश्तवाड़           4,052

दूर-दराज के इलाके भी बनते हैं मुश्किल
गवाह के मामले में दूर-दराज के इलाके भी मुश्किल पैदा करते हैं। जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट यंग लॉयर्स एसोसिएशन के पूर्व पदाधिकारी एडवोकेट गगनदीप सिंह लकी के अनुसार कई बार कोर्ट की ओर से नोटिस निकाला जाता है, लेकिन पता आधा-अधूरा होने की वजह से गवाह ट्रैप नहीं हो पाता। पुलिस भी कई इलाकों में जाने से बचती है। लिखवा लिया जाता है कि गवाह नहीं मिला। इस तरह के कई कारण होते हैं।

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