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शिकारा की रिलीज रुकवाने के लिए जेएंडके हाईकोर्ट में याचिका, याचिकाकर्ताओं का ये है तर्क
Wed, 05 Feb 2020 12:14 AM IST
Pranjal Dixit
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: Pranjal Dixit
Updated Wed, 05 Feb 2020 12:14 AM IST
सार
- याचिकाकर्ताओं ने दिया तर्क, ट्रेलर में एक समुदाय को जिम्मेदार बताया गया, इससे कश्मीर का माहौल खराब होगा
- कश्मीरी पंडितों के घाटी से पलायन पर आधारित है फिल्म
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शिकारा फिल्म पोस्टर
- फोटो : social media
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विस्तार
1990 के दशक में घाटी से कश्मीरी पंडितों के पलायन पर आधारित फिल्म शिकारा रिलीज से पहले ही विवाद में घिरती जा रही है। फिल्म की रिलीज रोकने के लिए कश्मीर के तीन लोगों ने जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय में एक याचिका दाखिल की है। याचिका में कहा गया है कि फिल्म में जो तथ्य दिखाए गए हैं, हकीकत से उनका दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषक मिसगर इफ्तिखार, कश्मीरी पत्रकार माजिद हैदरी और एक स्थानीय वकील इरफान हफीज लोन की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि फिल्म का ट्रेलर देखने से पता चलता है कि इसमें कश्मीरी पंडितों के घाटी से पलायन के लिए कश्मीरी मुसलमानों को जिम्मेदार बताया गया है। सच्चाई यह नहीं है। इस फिल्म के जरिये दो समुदायों में नफरत फैलाने की कोशिश हो रही है।
मिसगर इफ्तिखार का कहना है कि हमने कई बार इस फिल्म के ट्रेलर देखे और और पाया कि उसमे दिखाए गए कंटेंट आपत्तिजनक हैं। फिल्म रिलीज करने का समय भी सही नहीं है।
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दरअसल, अनुच्छेद 370 और 35ए हटने के बाद सरकार द्वारा हालात बिगड़ने से रोकने के लिए मोबाइल इंटरनेट पर पाबंदियों के साथ साथ अन्य कई तरह के प्रयास किए गए हैं। इस समय पूरे मुल्क में सीएए और एनआरसी का मसला चल रहा है। ऐसे में इस फिल्म की रिलीज से माहौल खराब होगा।
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राजनीतिक विश्लेषक मिसगर इफ्तिखार, कश्मीरी पत्रकार माजिद हैदरी और एक स्थानीय वकील इरफान हफीज लोन की ओर से दायर याचिका में कहा गया है कि फिल्म का ट्रेलर देखने से पता चलता है कि इसमें कश्मीरी पंडितों के घाटी से पलायन के लिए कश्मीरी मुसलमानों को जिम्मेदार बताया गया है। सच्चाई यह नहीं है। इस फिल्म के जरिये दो समुदायों में नफरत फैलाने की कोशिश हो रही है।
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मिसगर इफ्तिखार का कहना है कि हमने कई बार इस फिल्म के ट्रेलर देखे और और पाया कि उसमे दिखाए गए कंटेंट आपत्तिजनक हैं। फिल्म रिलीज करने का समय भी सही नहीं है।
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दरअसल, अनुच्छेद 370 और 35ए हटने के बाद सरकार द्वारा हालात बिगड़ने से रोकने के लिए मोबाइल इंटरनेट पर पाबंदियों के साथ साथ अन्य कई तरह के प्रयास किए गए हैं। इस समय पूरे मुल्क में सीएए और एनआरसी का मसला चल रहा है। ऐसे में इस फिल्म की रिलीज से माहौल खराब होगा।
आतंकवाद ने सभी को प्रभावित किया
उनका कहना है आतंकवाद ने कश्मीरी मुसलमान, सिख, हिंदू, बौद्ध और ईसाइयों, सबको प्रभावित किया है। दूसरी ओर फिल्म के ट्रेलर से लगता है कि केवल कश्मीरी मुसलमान इसके लिए जिम्मेदार हैं। इफ्तिखार ने कहा कि हम नहीं चाहते कि किसी कौम के बीच दरार पैदा हो। अभी तक बहुत कुछ देख चुके हैं और आगे नहीं देखना चाहते। बोले-कश्मीरी पंडित हमारे भाई हैं, हम चाहते हैं कि वापस अपने घरों में आएं। हम उनके साथ हैं।
सात मई को रिलीज होगी फिल्म
मालूम हो कि फिल्मकार विधु विनोद चोपड़ा द्वारा निर्देशित यह फिल्म देश भर में सात फरवरी को रिलीज हो रही है।
उनका कहना है आतंकवाद ने कश्मीरी मुसलमान, सिख, हिंदू, बौद्ध और ईसाइयों, सबको प्रभावित किया है। दूसरी ओर फिल्म के ट्रेलर से लगता है कि केवल कश्मीरी मुसलमान इसके लिए जिम्मेदार हैं। इफ्तिखार ने कहा कि हम नहीं चाहते कि किसी कौम के बीच दरार पैदा हो। अभी तक बहुत कुछ देख चुके हैं और आगे नहीं देखना चाहते। बोले-कश्मीरी पंडित हमारे भाई हैं, हम चाहते हैं कि वापस अपने घरों में आएं। हम उनके साथ हैं।
सात मई को रिलीज होगी फिल्म
मालूम हो कि फिल्मकार विधु विनोद चोपड़ा द्वारा निर्देशित यह फिल्म देश भर में सात फरवरी को रिलीज हो रही है।