Border live: IB से सटे गांवों के लोग बोले- पाक में कोई आतंकी ठिकाना है तो किया जाए ध्वस्त, गोलाबारी का डर नहीं
लोगों का कहना है कि वह अपने घरों में बने बंकरों में रातें गुजार लेंगे, लेकिन घर और गांव छोड़कर नहीं जाएंगे। अब वह शाम ढलने से पहले रोजमर्रा का काम खत्म कर बंकरों में रात गुजार रहे हैं।
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हम डरने वाले नहीं हैं, पाकिस्तान में आतंकियों के जो ठिकाने बचे हैं उन्हें भी ध्वस्त किया जाए। ताकि फिर कभी पाकिस्तान भारत की तरफ नजर उठा कर न देख पाए। यह कहना है भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांवों के लोगों का।
ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारत के पाकिस्तान पर किए गए कड़े प्रहार से लोगों का हौसला और बढ़ा है। सीमा पर तनावपूर्ण स्थिति के बावजूद लोगों के जज्बे में कोई कमी नहीं है। प्रशासन ने लोगों के लिए विस्थापित शिविर तैयार किए हैं और उनसे सुरक्षित शिविरों में शरण लेने की बात कही है।
लोगों का कहना है कि वह अपने घरों में बने बंकरों में रातें गुजार लेंगे, लेकिन घर और गांव छोड़कर नहीं जाएंगे। अब वह शाम ढलने से पहले रोजमर्रा का काम खत्म कर बंकरों में रात गुजार रहे हैं। सीमावर्ती किसान परिवार के साथ-साथ मवेशियों के चारे, पानी और सुरक्षा के लिए भी सतर्क हैं। तनावपूर्ण स्थिति में भी किसान खेतों में जाकर शाम ढलने से पहले मवेशियों के लिए चारा लाते हैं। महिलाएं बच्चे सब मिलकर शाम ढलने से पहले अपना काम खत्म कर लेते हैं और फिर रात का खाना बंकर में पूरा परिवार बैठकर खाता है।
पहले भी देख चुके हैं इस तरह के हालात
स्थानीय निवासी तरसेम सिंह ने कहा कि हमने इस तरह के हालात पहले भी देखे हैं। भले ही इस तरह का माहौल अन्य इलाकों के लोगों के लिए डराने वाला हो, लेकिन सीमावर्ती लोगों में किसी तरह का कोई डर नहीं है। उन्होंने कहा कि हम अपने गांव में ही सुरक्षा बलों के साथ डटे रहेंगे। अगर सुरक्षा बलों के साथ आगे बढ़ने का मौका मिला तो पीछे नहीं रहेंगे। सीमावर्ती लोगों के लिए पाकिस्तान एक नासूर बन चुका है और अब जब इसका इलाज होना शुरू हुआ है तो सब यही चाहते हैं कि यह बीमारी जड़ से खत्म हो।
बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित महिलाएं
सीमा पर तनावपूर्ण स्थिति के बीच सीमावर्ती महिलाओं के हौसले भी बुलंद हैं, हालांकि यह महिलाएं इस तरह के माहौल के शांत होने की प्रार्थना मंदिरों में कर रही हैं। सीमावर्ती गांव गुज्जर चक में बुजुर्ग महिलाओं ने एक मंदिर में भजन कीर्तन कर भगवान से शांति की प्रार्थना की। उन्होंने कहा हम जिएंगे और मरेंगे अपने ही गांव में लेकिन ऐसा माहौल नहीं चाहते, जिसमें किसी ओर भी बेकसूरों की जान जाए। 65 वर्षीय ब्यासो देवी ने कहा कि हमारी तो उम्र हो चुकी है, लेकिन बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित रहते हैं क्योंकि इस तरह का माहौल अच्छे भविष्य का संकेत नहीं है। यही बात गांव की अन्य बुजुर्ग महिलाएं भी सोचती है और इसलिए रोजाना हम सब मिलकर मंदिर में कुछ समय के लिए भजन-कीर्तन कर भगवान से शांति की प्रार्थना करते हैं।
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