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Jammu News: छह महीने से पेंशन नहीं सिर्फ परेशानियां मिलीं, उधार लेकर जरूरतें पूरी कर रहे लाभार्थी
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अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। छह माह से पेंशन नहीं मिल पाई, जिसके चलते दवा भी नहीं ले पा रही हूं। सरकार में अब तक जो 1000 रुपये पेंशन मिल रही थी, वही दिलवा दें...इसके बाद बढ़ी हुई पेंशन जब मिलेगी तब देखा जाएगा। यह कहना है 75 वर्षीय बुजुर्ग सत्या देवी का। उन्होंने कहा कि पेंशन रुकने से जिंदगी बेसहारा हो गई है। गोरख नगर की रहने वाली बुजुर्ग को विधवा पेंशन के तहत एक हजार प्रतिमाह मिल रहे थे, लेकिन मार्च से वे इंतजार कर रही हैं। उनका कहना है कि पति कोटू सिंह की चार साल पहले मौत हो चुकी है। बेटे व बहू अलग रहते हैं। पेंशन मिलने से वह इलाज करा लेती थीं, मगर अब भटकना पड़ रहा है। ऐसी ही दिक्कतें हजारों लोग झेलने के लिए मजबूर हैं।
इसमें शामिल बाजीगर नगर की 69 वर्षीय विधवा मक्खनी देवी भी है। उका कहना है- आवेदन कर दिया है, लेकिन छह माह बीतने के बाद पेंशन नहीं आई। एक हजार रुपये से राशन आदि की व्यवस्था हो जाती थी। लोगों से उधार रुपये लेकर काम चलाना पड़ रहा है। वहीं, न्यू बस्ती के 91 साल के ओम प्रकाश को कई साल से वृद्धावस्था की पेंशन मिल रही थी, लेकिन अचानक मार्च से बंद हो गई। उनका कहना है कि एक हजार रुपये से जीवनयापन हो रहा था। वह भी सरकार ने छीन लिया। ऐसे में उन्हें दूसरों के आगे हाथ फैलाने पड़ रहे हैं। 85 साल के शंकर दास भी सरकार की उपेक्षा से आहत हैं। बताते हैं, पहली बार पेंशन रोकी गई।
मामलों के निस्तारण का मिला आश्वासन
सरकारी कार्यों में पारदर्शिता लाने और जरूरतमंदों को त्वरित लाभ देने के लिए योजनाओं को ऑनलाइन किया जा रहा है। सैकड़ों लाभार्थियों ने आवेदन तो ऑनलाइन कर दिए, मगर अभी तक खातों में पैसा नहीं आया। कई लाभार्थी डीसी कार्यालय में शिकायत देने पहुंचे। डिसेबल केयर फाउंडेशन के शाम लाल का कहना है-आश्वासन मिला है कि जल्द पेंशन के मामलों निस्तारण करा दिया जाएगा। यहां करीब 40 हजार बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांग पेंशनधारी हैं।
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जिन लाभार्थियों के ऑनलाइन आवेदन आ रहे हैं, उन्हें पड़ताल के बाद सही पाए जाने पर खातों में पेंशन भेजी जा रही है। जिन्हें पेंशन नहीं मिल रही हैं, वे जिला व तहसील दफ्तर में जाकर शिकायत बता सकते हैं।
-शीतल नंदा, सचिव, समाज कल्याण विाभाग
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जम्मू। छह माह से पेंशन नहीं मिल पाई, जिसके चलते दवा भी नहीं ले पा रही हूं। सरकार में अब तक जो 1000 रुपये पेंशन मिल रही थी, वही दिलवा दें...इसके बाद बढ़ी हुई पेंशन जब मिलेगी तब देखा जाएगा। यह कहना है 75 वर्षीय बुजुर्ग सत्या देवी का। उन्होंने कहा कि पेंशन रुकने से जिंदगी बेसहारा हो गई है। गोरख नगर की रहने वाली बुजुर्ग को विधवा पेंशन के तहत एक हजार प्रतिमाह मिल रहे थे, लेकिन मार्च से वे इंतजार कर रही हैं। उनका कहना है कि पति कोटू सिंह की चार साल पहले मौत हो चुकी है। बेटे व बहू अलग रहते हैं। पेंशन मिलने से वह इलाज करा लेती थीं, मगर अब भटकना पड़ रहा है। ऐसी ही दिक्कतें हजारों लोग झेलने के लिए मजबूर हैं।
इसमें शामिल बाजीगर नगर की 69 वर्षीय विधवा मक्खनी देवी भी है। उका कहना है- आवेदन कर दिया है, लेकिन छह माह बीतने के बाद पेंशन नहीं आई। एक हजार रुपये से राशन आदि की व्यवस्था हो जाती थी। लोगों से उधार रुपये लेकर काम चलाना पड़ रहा है। वहीं, न्यू बस्ती के 91 साल के ओम प्रकाश को कई साल से वृद्धावस्था की पेंशन मिल रही थी, लेकिन अचानक मार्च से बंद हो गई। उनका कहना है कि एक हजार रुपये से जीवनयापन हो रहा था। वह भी सरकार ने छीन लिया। ऐसे में उन्हें दूसरों के आगे हाथ फैलाने पड़ रहे हैं। 85 साल के शंकर दास भी सरकार की उपेक्षा से आहत हैं। बताते हैं, पहली बार पेंशन रोकी गई।
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मामलों के निस्तारण का मिला आश्वासन
सरकारी कार्यों में पारदर्शिता लाने और जरूरतमंदों को त्वरित लाभ देने के लिए योजनाओं को ऑनलाइन किया जा रहा है। सैकड़ों लाभार्थियों ने आवेदन तो ऑनलाइन कर दिए, मगर अभी तक खातों में पैसा नहीं आया। कई लाभार्थी डीसी कार्यालय में शिकायत देने पहुंचे। डिसेबल केयर फाउंडेशन के शाम लाल का कहना है-आश्वासन मिला है कि जल्द पेंशन के मामलों निस्तारण करा दिया जाएगा। यहां करीब 40 हजार बुजुर्ग, विधवा और दिव्यांग पेंशनधारी हैं।
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जिन लाभार्थियों के ऑनलाइन आवेदन आ रहे हैं, उन्हें पड़ताल के बाद सही पाए जाने पर खातों में पेंशन भेजी जा रही है। जिन्हें पेंशन नहीं मिल रही हैं, वे जिला व तहसील दफ्तर में जाकर शिकायत बता सकते हैं।
-शीतल नंदा, सचिव, समाज कल्याण विाभाग