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Jammu News: पेंशन दान नहीं बल्कि सेवानिवृत्ति के बाद का मौलिक अधिकार
Thu, 20 Nov 2025 12:51 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Thu, 20 Nov 2025 12:51 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू और कश्मीर पेंशनर्स ऑर्गनाइजेशन फोरम (जेकेपीओएफ) के अध्यक्ष अब्दुल कयूम वानी ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार पेंशनभोगियों के मौलिक अधिकारों पर अंकुश लगा रही है। उन्होंने बताया कि फोरम ने एक दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया जिसमें आठवें वेतन आयोग की कार्य शर्तों और वित्त विधेयक 2025 के प्रावधानों पर चिंता व्यक्त की गई जिनके अनुसार इन प्रावधानों ने पूरे भारत के पेंशनभोगियों में गंभीर आशंकाएं पैदा कर दी हैं।
उन्होंने कहा कि सम्मेलन ने अधिकारियों को डी.एस. नाकारा मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की याद दिलाई जिसमें कहा गया था कि पेंशन कोई दान नहीं बल्कि सेवानिवृत्ति के बाद का एक मौलिक अधिकार है। फोरम ने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को संबोधित एक ज्ञापन भी पारित किया जिसमें पेंशनभोगियों की शिकायतों और मांगों पर प्रकाश डाला गया।
वानी ने कहा, ''''वित्त विधेयक 2025 में पारित संदर्भ शर्तों और प्रावधानों ने देश भर के पेंशनभोगियों में गहरी चिंता पैदा कर दी है क्योंकि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार पेंशनभोगियों के मौलिक अधिकारों को सीमित करने की कोशिश कर रही है। यह याद दिलाया गया कि सर्वोच्च न्यायालय ने डी.एस. नाकारा मामले में स्पष्ट रूप से कहा है कि पेंशन कोई दान नहीं बल्कि नौकरी के बाद दिया जाने वाला एक मौलिक अधिकार है। इस संदर्भ में प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को संबोधित एक ज्ञापन को भी मंजूरी दी गई जिसमें देश भर के पेंशनभोगियों की चिंताओं और आपत्तियों को उजागर किया गया है।''''
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श्रीनगर। जम्मू और कश्मीर पेंशनर्स ऑर्गनाइजेशन फोरम (जेकेपीओएफ) के अध्यक्ष अब्दुल कयूम वानी ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार पेंशनभोगियों के मौलिक अधिकारों पर अंकुश लगा रही है। उन्होंने बताया कि फोरम ने एक दिवसीय सम्मेलन आयोजित किया जिसमें आठवें वेतन आयोग की कार्य शर्तों और वित्त विधेयक 2025 के प्रावधानों पर चिंता व्यक्त की गई जिनके अनुसार इन प्रावधानों ने पूरे भारत के पेंशनभोगियों में गंभीर आशंकाएं पैदा कर दी हैं।
उन्होंने कहा कि सम्मेलन ने अधिकारियों को डी.एस. नाकारा मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की याद दिलाई जिसमें कहा गया था कि पेंशन कोई दान नहीं बल्कि सेवानिवृत्ति के बाद का एक मौलिक अधिकार है। फोरम ने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को संबोधित एक ज्ञापन भी पारित किया जिसमें पेंशनभोगियों की शिकायतों और मांगों पर प्रकाश डाला गया।
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वानी ने कहा, ''''वित्त विधेयक 2025 में पारित संदर्भ शर्तों और प्रावधानों ने देश भर के पेंशनभोगियों में गहरी चिंता पैदा कर दी है क्योंकि ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार पेंशनभोगियों के मौलिक अधिकारों को सीमित करने की कोशिश कर रही है। यह याद दिलाया गया कि सर्वोच्च न्यायालय ने डी.एस. नाकारा मामले में स्पष्ट रूप से कहा है कि पेंशन कोई दान नहीं बल्कि नौकरी के बाद दिया जाने वाला एक मौलिक अधिकार है। इस संदर्भ में प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को संबोधित एक ज्ञापन को भी मंजूरी दी गई जिसमें देश भर के पेंशनभोगियों की चिंताओं और आपत्तियों को उजागर किया गया है।''''
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