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Jammu News: वित्त वर्ष 2025-26 में 1770 नई कंपनियां खुलीं, सक्रिय कंपनियों की संख्या 10 हजार पार
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जम्मू। पहलगाम आतंकी हमले के बाद प्रदेश में कुछ समय के लिए कारोबारी गतिविधियां धीमी पड़ गई थीं। लगातार दो महीने तक बिजनेस रजिस्ट्रेशन घटते रहे लेकिन जुलाई से बाजार फिर संभलने लगा। पहलगाम हमला और ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी बीते वर्षों की अपेक्षा ज्यादा कंपनियां पंजीकृत हुईं।
कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 1,770 नई कंपनियां रजिस्टर हुईं जो पिछले साल के मुकाबले 28 फीसदी ज्यादा हैं। मई और जून 2025 में नए बिजनेस रजिस्ट्रेशन में 22 फीसदी गिरावट आई थी। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज सैयद हामिद बुखारी के अनुसार उस दौरान पर्यटन, होटल, ट्रैवल और ट्रांसपोर्ट जैसे सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। अनिश्चितता के माहौल के चलते कई लोगों ने नए कारोबार शुरू करने और निवेश से जुड़े फैसले कुछ समय के लिए टाल दिए थे। जुलाई से कारोबारी गतिविधियां बढ़ने लगीं। छोटे कारोबार, ऑनलाइन सेवाओं, खाने-पीने के कारोबार और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में हलचल तेज हुई। मार्च 2026 तक प्रदेश में कंपनियों की संख्या बढ़कर लगभग 10 हजार पहुंच गई जबकि एक साल पहले आंकड़ा 8,168 था। एक साल में 21 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज हुई।
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स्टार्टअप बढ़े, निवेश में भी रिकॉर्ड तेजी
स्टार्टअप और छोटे कारोबारों की तरफ युवाओं का रुझान बढ़ रहा है। स्टार्टअप नीति और सरकारी रियायतों का असर जमीन पर दिखने लगा है। जनवरी तक 1,446 स्टार्टअप पंजीकृत हो चुके हैं। प्रदेश में निवेश के आंकड़ों में भी तेजी दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में 5,824 करोड़ रुपये का निवेश आया जो पिछले वर्षों के मुकाबले ज्यादा है।
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झटकों के बावजूद बाजार में बना है भरोसा
अर्थशास्त्री फालेन्द्र सूदन के मुताबिक यह संकेत है कि सुरक्षा से जुड़े झटकों के बावजूद बाजार में लंबी अवधि का भरोसा बना है। अगर हालात स्थिर रहे तो आने वाले समय में उद्योग और रोजगार में और बढ़ोतरी हो सकती है। बैंकिंग और सरकारी प्रक्रियाएं आसान हुईं तो जम्मू-कश्मीर में कारोबारी गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। हालांकि चुनौतियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। बढ़ती ट्रांसपोर्ट लागत, सीमित बाजार और फंडिंग की दिक्कतें छोटे कारोबारियों के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।
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कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 1,770 नई कंपनियां रजिस्टर हुईं जो पिछले साल के मुकाबले 28 फीसदी ज्यादा हैं। मई और जून 2025 में नए बिजनेस रजिस्ट्रेशन में 22 फीसदी गिरावट आई थी। रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज सैयद हामिद बुखारी के अनुसार उस दौरान पर्यटन, होटल, ट्रैवल और ट्रांसपोर्ट जैसे सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित रहे। अनिश्चितता के माहौल के चलते कई लोगों ने नए कारोबार शुरू करने और निवेश से जुड़े फैसले कुछ समय के लिए टाल दिए थे। जुलाई से कारोबारी गतिविधियां बढ़ने लगीं। छोटे कारोबार, ऑनलाइन सेवाओं, खाने-पीने के कारोबार और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में हलचल तेज हुई। मार्च 2026 तक प्रदेश में कंपनियों की संख्या बढ़कर लगभग 10 हजार पहुंच गई जबकि एक साल पहले आंकड़ा 8,168 था। एक साल में 21 फीसदी बढ़ोतरी दर्ज हुई।
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स्टार्टअप बढ़े, निवेश में भी रिकॉर्ड तेजी
स्टार्टअप और छोटे कारोबारों की तरफ युवाओं का रुझान बढ़ रहा है। स्टार्टअप नीति और सरकारी रियायतों का असर जमीन पर दिखने लगा है। जनवरी तक 1,446 स्टार्टअप पंजीकृत हो चुके हैं। प्रदेश में निवेश के आंकड़ों में भी तेजी दर्ज की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में 5,824 करोड़ रुपये का निवेश आया जो पिछले वर्षों के मुकाबले ज्यादा है।
झटकों के बावजूद बाजार में बना है भरोसा
अर्थशास्त्री फालेन्द्र सूदन के मुताबिक यह संकेत है कि सुरक्षा से जुड़े झटकों के बावजूद बाजार में लंबी अवधि का भरोसा बना है। अगर हालात स्थिर रहे तो आने वाले समय में उद्योग और रोजगार में और बढ़ोतरी हो सकती है। बैंकिंग और सरकारी प्रक्रियाएं आसान हुईं तो जम्मू-कश्मीर में कारोबारी गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। हालांकि चुनौतियां पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। बढ़ती ट्रांसपोर्ट लागत, सीमित बाजार और फंडिंग की दिक्कतें छोटे कारोबारियों के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई हैं।