पीडीपी कोर ग्रुप ने मोदी के लिए बनाया एजेंडा
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पीडीपी और भाजपा ने गठबंधन का मन बना लिया है। लेकिन, कई पेच अभी अनसुलझे हैं। पीडीपी कोर ग्रुप ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुफ्ती मोहम्मद सईद की बातचीत के लिए एजेंडा बना लिया है। मोदी-मुफ्ती मुलाकात से पहले दोनों दलों में कई स्तरों पर बातचीत चल रही है।
जम्मू का सीएम और हिंदू सीएम की चर्चा अब समाप्त हो रही है। मुफ्ती मोहम्मद को भाजपा मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपने पर सहमत दिखती है। लेकिन, पीडीपी के एजेंडे में शुमार हुर्रियत नेताओं से केंद्र की बातचीत जैसे मुद्दे स्वीकारने में भाजपा को दिक्कत है।
पीडीपी अपने विजन के तहत केंद्र से शांति प्रक्रिया बहाल करने के लिए पाकिस्तान के साथ बातचीत पर भी आश्वासन चाहती है। लेकिन, भाजपा ऐसी शर्तों को स्वीकारने के मूड में नहीं है। इस बीच, सीमा पर पाकिस्तान लगातार गोलाबारी कर सरकार गठन की प्रक्रिया में खलल की कोशिश कर रहा है।
गोलाबारी के बाद पाकिस्तान से तल्ख हो रहे रिश्तों की बुनियाद पर भाजपा और केंद्र सरकार इस बाबत पीडीपी को कोई आश्वासन नहीं देना चाहती।
राजनाथ सिंह से नई सरकार की संभावनाओं पर बातचीत
चुनाव से पहले ही पीडीपी संरक्षक मुफ्ती मोहम्मद की केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह और रवि शंकर प्रसाद से नई सरकार की संभावनाओं पर बातचीत हुई थी। अमर उजाला ने मुफ्ती और राजनाथ में गोपनीय मुलाकात की खबर तीन नवंबर, 2014 के अंक में प्रकाशित की थी।
मुफ्ती ने तब भाजपा नेताओं से मुख्यमंत्री पद पर कांग्रेस जैसी उदारता दिखाने को कहा था। 2002 में 21 विधायकों वाली कांग्रेस ने 16 विधायकों की पीडीपी को पहले तीन साल के लिए सीएम का पद दिया था। भाजपा के जम्मू कश्मीर प्रभारी अविनाश राय खन्ना ने साफ किया है कि बातचीत स्थिर सरकार और जम्मू कश्मीर के विकास के संदर्भ में ही हो रही है।
मुख्यमंत्री पद के लिए चल रही खींचतान पर खन्ना ने स्पष्ट किया कि जम्मू, लेह और कश्मीर एक ही राज्य हैं। इसलिए यह कोई मुद्दा नहीं है कि सीएम जम्मू से हो या कश्मीर से। उन्होंने कहा कि सीएम जम्मू-कश्मीर का ही होगा। इससे पहले भाजपा जम्मू के सीएम पर जोर दे रही थी।
पार्टी के रुख में आया यह बदलाव
पार्टी के रुख में आया यह बदलाव मुफ्ती को सीएम के रूप में स्वीकारने की ओर पहल के रूप में देखा जा रहा है। पीडीपी प्रवक्ता नईम अख्तर ने माना कि भाजपा से बातचीत के कई चैनल खुले हुए हैं, लेकिन, टेबल पर आधिकारिक बातचीत तक पहुंचने में अभी वक्त लग सकता है।
जम्मू कश्मीर जैसे संवेदनशील राज्य में राजनीतिक अनिश्चितता ठीक नहीं है। यह सारे देश के लिए चिंतनीय मुद्दा है। भाजपा प्रभारी सांसद खन्ना का कहना है कि भाजपा को गठबंधन सरकार चलाने का अनुभव है। बातचीत का पहला दौर समाप्त होने के बाद हम न्यूनतम साझा कार्यक्रम बना सकते हैं।
सरकार चलाने का संयुक्त एजेंडा तय हो सकता है। भाजपा प्रभारी ने कहा कि नेशनल कांफ्रेंस से भी बातचीत का दरवाजा खुला रखा है। उन्होंने कहा कि जल्द स्थिति साफ हो जाएगी और जम्मू कश्मीर को ऐसी स्थिर सरकार देने की कोशिश होगी जो पूरे छह साल के कार्यकाल तक चले।