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माइक्रो टेस्ट को बाजार जा रहे मरीज
ब्यूरो/अमर उजाला, जम्मू
Updated Thu, 31 Dec 2015 02:04 PM IST
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जीएमसी और एसएमजीएस अस्पताल में माइक्रोबायोलाजी टेस्ट के लिए मरीजों को बाजार के निजी क्लीनिकों का रुख करना पड़ रहा है। दोनों अस्पतालों में दोपहर और रात्रि में इन टेस्टों की सुविधा नहीं है।
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सर्जरी के लिए अधिकांश मामलों में माइक्रो बायोलाजी टेस्ट करवाना जरूरी होता है। इसमें एचआईवी, हेपेटाइटिस बी, सी, कल्चरल आदि टेस्ट शामिल होते हैं।
अस्पताल में प्रति टेस्ट बीस रुपये में हो जाता है, जबकि बाजार से ये टेस्ट 450-500 रुपये के बीच होता है। यानी बाजार से सामान्य कुछ टेस्ट करवाने के लिए 1300/1400 रुपये तक का खर्च आ जाता है।
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माइक्रोबायोलाजी टेस्ट की रिपोर्ट के बाद ही मरीज की सर्जरी संभव हो पाती है। अस्पताल की इमरजेंसी में सड़क हादसों या अन्य मामलों में मरीजों को माइक्रो टेस्ट की जरूरत होती है।
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हालांकि जीएमसी की पुराने इमरजेंसी ब्लाक में माइक्रोबायोलाजी लैब का निर्माण किया जा रहा है। लेकिन अभी काफी कुछ करना बाकी है। इमरजेंसी में पैथालोजी और बायो केमिस्ट्री की लैब तीनों शिफ्टों में चल रही हैं।
इसी तरह शहर के सबसे बड़े जच्चा बच्चा अस्पताल एसएमजीएस में भी दोपहर और रात्रि में माइक्रोबायोलाजी टेस्ट की सुविधा नहीं है। इस अस्पताल में रोजाना सामान्य 25-30 प्रसव के मामलों सहित अन्य सर्जरी हो रही हैं।
गर्भवती महिला को प्रसव से पहले माइक्रोबायोलाजी टेस्ट की जरूरत होती है। मरीजों की यह भी शिकायत है कि अस्पताल में रविवार शाम को बायो केमिस्ट्री की लैब प्रभावित रहती है।