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Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   Panun Kashmir demands accountability regarding the dilapidated quarters of Jagti Township.

जम्मू-कश्मीर: जगती के मकानों में दरारें, सीलन और उखड़ता प्लास्टर; पनुन कश्मीर ने मांगा सेफ्टी ऑडिट

Fri, 02 Oct 2026 11:09 AM IST
Nikita Gupta अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: Nikita Gupta Updated Fri, 02 Oct 2026 11:09 AM IST
सार

जगती टॉउनशिप के जर्जर क्वार्टरों की स्थिति पर पनुन कश्मीर ने चिंता जताते हुए तत्काल स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट और असुरक्षित परिवारों को वैकल्पिक आवास देने की मांग की है। संगठन ने पिछले 10 वर्षों में रखरखाव के लिए जारी और खर्च किए गए फंड का पारदर्शी ऑडिट सार्वजनिक करने के साथ मरम्मत व मूलभूत सुविधाओं की बहाली की मांग की है।

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Panun Kashmir demands accountability regarding the dilapidated quarters of Jagti Township.
जगती में विस्थापित शिविरों के जीर्णोद्धार का चल रहा कार्य । - फोटो : विभाग

विस्तार

पनुन कश्मीर ने जगती टॉउनशिप में रिहायशी क्वार्टरों की जर्जर हालत पर चिंता जताते हुए सरकार से तत्काल स्ट्रक्चरल सेफ्टी ऑडिट करवाने की मांग की है। संगठन के डॉ. अजय चरूंगू के नेतृत्व में टीम ने हाल ही में टाउनशिप का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया। संगठन के अनुसार कई क्वार्टरों की दीवारों और छतों में दरारें हैं। सीलन, सीपेज, फंगस, उखड़ते प्लास्टर और क्षतिग्रस्त खिड़कियों के कारण भी स्थिति खराब है।

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पनुन कश्मीर ने कहा कि कुछ क्वार्टर रहने योग्य नहीं रह गए हैं और छत के स्लैब में आई दरारों से सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े होते हैं। संगठन ने असुरक्षित क्वार्टरों को चिन्हित कर परिवारों को वैकल्पिक आवास देने तथा मरम्मत योग्य भवनों की तत्काल मरम्मत और जरूरत पड़ने पर पुनर्निर्माण की मांग की है। ड्रेनेज, सफाई और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं की बहाली की भी मांग रखी गई।

संगठन ने पिछले दस वर्षों में जगती के रखरखाव के लिए मंजूर, जारी और खर्च किए गए फंड का पारदर्शी ऑडिट सार्वजनिक करने को कहा है। साथ ही काम करने वाली एजेंसियों और खर्च का विवरण सामने लाने, जिम्मेदारी तय करने तथा कार्यों की समयसीमा वाला एक्शन प्लान जारी करने की मांग की है।

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पनुन कश्मीर ने विस्थापित कश्मीरी पंडितों के अधिकारों और पुनर्वास को लेकर सवाल उठाए
विधानसभा की ओर से राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग संबंधी प्रस्ताव पारित किए जाने के बीच पनुन कश्मीर ने विस्थापित कश्मीरी पंडितों के अधिकारों और पुनर्वास को लेकर सवाल उठाए हैं। संगठन के महासचिव कुलदीप रैना ने कहा कि विधानसभा में राज्य का दर्जा बहाली का प्रस्ताव लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है, लेकिन इसके साथ कश्मीरी पंडितों के विस्थापन, सुरक्षा, संपत्ति और सम्मानजनक वापसी के मुद्दों को भी संबोधित किया जाना चाहिए।

रैना ने कहा कि कश्मीरी पंडित आतंक, धमकियों और लक्षित हत्याओं के बाद अपने पैतृक घरों से विस्थापित हुए। उनके अनुसार मकानों और मंदिरों से जुड़े मामलों, संपत्ति अधिकारों तथा पुनर्वास के सवालों का समाधान अभी बाकी है। उन्होंने कहा कि केवल चुनाव होने और विधानसभा के काम करने से विस्थापन समाप्त नहीं हो जाता।

पनुन कश्मीर ने कहा कि विस्थापित समुदाय के राजनीतिक, सांविधानिक, सुरक्षा और पुनर्वास संबंधी मुद्दों के समाधान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। रैना ने आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस, कानून के समान अनुपालन और संवेदनशील पदों पर नियुक्तियों की सुरक्षा जांच की मांग भी रखी। उन्होंने कहा कि संगठन कश्मीरी पंडितों के लिए न्याय, जवाबदेही, सुरक्षा, सांविधानिक सम्मान और पैतृक भूमि पर सुरक्षित एवं सम्मानजनक वापसी की मांग करता है। साथ ही पनुन कश्मीर ने कश्मीरी पंडितों के लिए अलग होमलैंड की मांग दोहराई।

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