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जम्मू-कश्मीर: जेल से जंगलों में छिपे आतंकियों को ऑपरेट कर रहा था मारा गया आतंकी मुस्तफा, 20 किलोमीटर लंबे जंगल के चप्पे-चप्पे से था वाकिफ

Mon, 25 Oct 2021 10:03 AM IST
Trainee Trainee अजय मीनिया, जम्मू
अजय मीनिया, जम्मू Published by: Trainee Trainee Updated Mon, 25 Oct 2021 10:03 AM IST
सार

पुंछ मुठभेड़ में मारा गया आतंकी जिया मुस्तफा भाटादूड़ियां जंगल में छिपने वाले स्थानों से भली भांति परिचित था। उससे पांच महीने पहले जेल में मोबाइल सिम बरामद किया गया था। 

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Pakistani terrorist Zia Mustafa was operating the terrorists hiding in the jungle from the jail
poonch encounter - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पुंछ में मेंढर के भाटादूड़ियां जंगल में आतंकी हमले में मारा गया पाकिस्तानी दहशतगर्द जिया मुस्तफा जम्मू की कोट भलवाल जेल में बैठ कर इस ऑपरेशन में आतंकियों को आपरेट कर रहा था। जिया की पीओके में बैठे आतंकी सैफुल्लाह से बात हो रही थी। सैफुल्लाह से बात करके जिया पुंछ में छिपे आतंकियों को लगातार गाइड कर रहा था।

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जिया मुस्तफा मेंढर से लेकर बफलियाज तक के 25 किलोमीटर जंगल के चप्पे-चप्पे से वाकिफ था। वह पकड़े जाने से पहले इस रूट से आतंकियों की घुसपैठ कराता था और आतंकियों के छुपने के एक दर्जन ठिकाने बना चुका था। यही कारण है कि 12 दिन से वह जेल में बैठ कर आतंकियों से मोबाइल पर संपर्क में था और उन्हें छुपने, जगह बदलने और हमला करने के तरीके बता रहा था।
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जानकारी के अनुसार 5 मई 2021 को कोट भलवाल जेल में सीआरपीएफ और पुलिस की संयुक्त छापों में 12 मोबाइल फोन सिम बरामद हुई थी। इनमें से एक सिम को जिया मुस्तफा इस्तेमाल कर रहा था। इसके बावजूद अब फिर से मुस्तफा मोबाइल का इस्तेमाल कर आतंकियों को ऑपरेट कर रहा था। सुरक्षा एजेंसियों के सूत्रों ने बताया कि मुस्तफा ने एक मैप बनाकर आतंकियों तक पहुंचाया था जिसके जरिए आतंकी सेना पर ठिकाने बदल-बदल कर हमले कर रहे हैं। मुस्तफा इन आतंकियों को यह भी बता रहा था कि उन्हें कहां से कोई गाइड लेने आएगा और कहां लेकर जाएगा। 
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कौन है मुस्तफा
वर्ष 2003 में मुस्तफा को जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। वह कश्मीर के पुलवामा में 22 कश्मीरी पंडितों का नरसंहार करने के मामले में शामिल था। वह पाकिस्तान के रावलाकोट का रहने वाला था, जो लश्कर का एक प्रशिक्षित कमांडर था। 2007 में इसे जम्मू की कोट भलवाल जेल में भेज दिया गया था। मुस्तफा 2003 से पहले पुंछ और राजोरी जिलों में आतंकियों को घुसपैठ कराकर उनको एक गुप्त रूट से कश्मीर पहुंचाता था। यही कारण है कि उसे इस रूट की पूरी जानकारी थी। इसीलिए पीओके में बैठे आतंकियों ने मुस्तफा से संपर्क साधा और उसके जरिए पुंछ के जंगलों में आतंकी हमलों को अंजाम दिया। 

जेल की सुरक्षा में फिर लगी सेंध, एक साल में 4 बार सिम मिले
सेंट्रल जेल कोट भलवाल जम्मू की सुरक्षा एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं। पुंछ में 12 दिन से 9 सैन्य कर्मियों को शहीद करने वाले आतंकियों को इस जेल में बैठा एक पाकिस्तानी आतंकी आपरेट कर रहा था और किसी को खबर तक नहीं लगी। सूत्रों का कहना है कि मुस्तफा को पुलिस की वर्दी में ले जाया गया था। आतंकियों ने इसे भी पुलिस समझ कर फायर कर दिया।

कोट भलवाल जेल जम्मू की सेंट्रल जेल है। सुरक्षा में सेंधमारी की घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। साल भर में जेल के कैदियों से मोबाइल फोन सिम कार्ड मिलने की 4 वारदातें हो चुकी हैं। इसके बावजूद जेल में आतंकी और अपराधी जेल से अपना नेटवर्क चला रहे हैं। 

कब-कब पकड़ी गई सिम

  • 5 मई 2021 को छापों में कैदियों से 12 मोबाइल फोन सिम बरामद हुए
  • 12 अप्रैल 2021 को आरएस पुरा पुलिस ने इसी जेल में बंद जैश आतंकी मुजफ्फर बेग को मोबाइल फोन और सिम कार्ड के साथ पकड़ा 
  • 7 अक्तूबर को जेल में पार्सल से भेजी गई एयरटेल कंपनी की दो सिम बरामद की गईं
  • 15 जुलाई को भी इसी जेल में पुलिस, सीआरपीएफ ने मिलकर छापा मारा जिसमें मोबाइल फोन एवं सिम बरामद की।
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