फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   pakistani shelling on border's villages

दहशत से बार्डर गांवों में पसरा सन्नाटा

Sun, 24 Aug 2014 01:33 AM IST
राघवेंद्र नारायण मिश्र/अमर उजाला, जम्मू
राघवेंद्र नारायण मिश्र/अमर उजाला, जम्मू Updated Sun, 24 Aug 2014 01:33 AM IST
विज्ञापन
pakistani shelling on border's villages

भारत- पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे गांव की गलियां सूनी हो गईं हैं, घरों में ताले लटक रहे हैं। हर तरफ पाकिस्तानी गोलों की दहशत है। पाकिस्तान ने अब हद कर दी है। पहले सीमा पार के गोले डेढ़ किलोमीटर के दायरे को छलनी करते थे।

विज्ञापन


अब उनका रेंज बढ़ गया है और मोर्टार की मार चार किलोमीटर की परिधि में आने वाले गांवों को तबाह कर रही है। इस इलाके में रात भर पाकिस्तानी गोलों की गूंज सुनाई पड़ती है और उजाले में बरबादी का गहरे निशान चारों तरफ बिखरे दिखते हैं।
विज्ञापन


पाक की इस नापाक करतूत के बावजूद ग्रामीणों ने हिम्मत नहीं हारी थी, लेकिन, जब दुश्मन के गोलों ने जानमाल को निशाना बनाना शुरू किया तो उनके हौसले टूट गए। सीमांत ग्रामीणों ने पलायन शुरू कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

पाक गोलाबारी के कारण प्रशासन ने 27 गांव खाली कराए

pakistani shelling on border's villages

स्थिति की गंभीरता को भांपकर प्रशासन भी हरकत में आया और बार्डर के 27 गांव खाली करा दिए गए। शुक्रवार की रात एक बजे से लेकर शनिवार की सुबह आठ बजे तक पाक लगातार बड़े गोले बरसाता रहा जिसमें दो लोगों की जानें गईं और बीएसएफ जवान समेत पांच घायल हुए। एक गाय मर गई। बछड़ा और पालतू कुत्ता घायल हैं।

आरएसपुरा से सीमा की ओर बढ़ते हुए राह में सुचेतगढ़, विधिपुर, चंडूचक, अब्दुल्लियां, घराना, गरानी, बेगा, बेरा, कोटली, मीरादयानी और फलौरा गांवों के खेत पाकिस्तानी मोर्टार से पटे पड़े हैं।

इनमें से कई दग चुके हैं और कई अब तक घातक हैं। इन्हें खोजकर निष्क्रिय करने का अभियान अभी शुरू भी नहीं हो पाया है।

तीन कैंपों में पांच हजार शरणार्थी

pakistani shelling on border's villages

आरएसपुरा के तीन शरणार्थी कैंपों में लगभग पांच हजार ग्रामीणों को ठहराया गया है। आईटीआई कैंपस में अब्दुल्लियां गांव के लोग हैं तो रंगपुर मलेलियन के गर्ल्स हाई स्कूल में करोटोना और नई बस्ती के ग्रामीणों को पनाह मिली है।

थोड़ी दूर ब्वायज स्कूल में विधिपुर के ग्रामीणों का डेरा है। करोटोना के दर्शन लाल को पाकिस्तान के साथ-साथ अपनी सरकार पर भी गुस्सा है।  वह कहते हैं 1947 से अब तक सरकारें ढ़पोरशंखी घोषणाएं करती रहीं हैं।

वास्तविकता तो यह है कि हम तब भी शरणार्थी थे और अब भी शरणार्थी ही हैं। सुविधाएं और हक तो मिला नहीं, उल्टे हर वक्त सिर पर मौत मंडराती रहती है। नरेंद्र मोदी की सरकार बनने के बाद यह लगा था कि अब पाक को करारा जवाब मिलेगा, लेकिन, पाकिस्तानी अपनी हरकतों से अब भी बाज नहीं आ रहा।

मवेशियों को चारा डालने वाला कोई नहीं

pakistani shelling on border's villages

बार्डर के 27 गांवों में मवेशियों को चारा डालने वाला भी कोई नहीं बचा है। भारत और पाक के बीच सचिव स्तर की वार्ता रद्द होने के बाद एक दिन गोलाबारी बंद हुई थी।

दूसरे दिन से पाकिस्तानी मोर्टार फिर गरजने लगे। ग्रामीणों ने दो रातें बंकरों में गुजारीं, लेकिन, जब जान पर बन आई तो गांव छोड़ दिया।

नई बस्ती की सोमा देवी अपनी गाय की मौत पर बिलख पड़ी। गाय का दूध बेचकर ही उसके घर का गुजारा चलता था जिसे पाक गोलाबारी ने छीन लिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed